शिक्षकों को मिलेगा 7 दिन से एक माह तक का प्रशिक्षण, तैयार होंगे मास्टर ट्रेनर
भोपाल। प्रदेश में योग शिक्षा को स्कूल स्तर पर प्रभावी बनाने के लिए सरकार अब हर जिले में मुख्यमंत्री योग प्रशिक्षण केंद्र शुरू करने की तैयारी में है। योग आयोग ने इसके लिए कवायद तेज कर दी है। शासन की योग शिक्षा नीति-2007 के तहत कक्षा पहली से 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए स्कूलों में योग कक्षाएं अनिवार्य हैं। इसके लिए कक्षावार पाठ्यक्रम भी तैयार किया जा चुका है। अब शिक्षकों को प्रशिक्षित कर स्कूलों तक योग शिक्षा पहुंचाने की व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है।
कक्षा पहली से पांचवीं, पांचवीं से आठवीं तथा नौवीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए अलग-अलग योग पाठ्यक्रम तैयार किए गए हैं। इसके साथ ही शिक्षकों के प्रशिक्षण की भी रूपरेखा बनाई गई है। प्रदेश के प्रत्येक जिले में संचालित जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) इस पूरी व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। डाइट में डीएड का प्रशिक्षण लेने आने वाले शिक्षकों को अब सपोर्टिंग तौर पर योग का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। यही प्रशिक्षित शिक्षक आगे चलकर जिलों में योग शिक्षा के लिए मास्टर ट्रेनर के रूप में काम करेंगे। इसके लिए डाइट में शिक्षकों को सात दिन से लेकर एक माह तक का प्रशिक्षण देने की तैयारी है। सात दिन का प्रशिक्षण सामान्य योग प्रशिक्षण होगा, जबकि एक माह के प्रशिक्षण के बाद शिक्षक को पूरी तरह मास्टर ट्रेनर के रूप में तैयार किया जाएगा।
हर स्कूल में होगा योग शिक्षक
योग आयोग ने भविष्य में प्रदेश के प्रत्येक स्कूल में एक योग शिक्षक की व्यवस्था करने का लक्ष्य तय किया है। यह व्यवस्था सरकारी स्कूलों के साथ निजी स्कूलों में भी लागू करने की तैयारी है। इसके तहत आगे चलकर निजी स्कूलों में भी योग शिक्षक रखना अनिवार्य किया जा सकता है। जिलों में योग गतिविधियों की निगरानी के लिए जिला योग समितियां गठित की जा चुकी हैं।
एक-दो महीने में शुरू हो सकते हैं केंद्र
सब कुछ योजना के मुताबिक रहा तो मौजूदा शैक्षणिक सत्र में ही प्रदेश के सभी जिलों में मुख्यमंत्री योग प्रशिक्षण केंद्र शुरू किए जा सकते हैं। अधिकतम एक से दो महीने में इन केंद्रों पर प्रशिक्षण गतिविधियां शुरू करने की तैयारी है। इसके लिए सभी जिलों के डाइट में प्रारंभिक स्तर पर काम शुरू किया जा चुका है। डाइट को प्रशिक्षण केंद्र के रूप में चुने जाने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यहां पहले से ही आवासीय सुविधाएं उपलब्ध हैं। ऐसे में डीएड का प्रशिक्षण लेने वाले शिक्षक हॉस्टल में रहकर योग का प्रशिक्षण भी प्राप्त कर सकेंगे। इससे प्रशिक्षित शिक्षकों का एक मजबूत नेटवर्क तैयार कर स्कूलों तक योग शिक्षा पहुंचाने में मदद मिलेगी।