स्टाइपेंड वृद्धि की मांग को लेकर सीएम हाउस जा रहें इंटर्न डॉक्टरों को पुलिस ने रोका

                    लिखित आदेश मिलने तक धरना जारी रखने पर अड़े डॉक्टर’
भोपाल। राजधानी भोपाल के हमीदिया अस्पताल में स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर उग्र हुए इंटर्न डॉक्टरों के आंदोलन को प्रशासन ने रोक दिया है। डॉक्टर मुख्यमंत्री निवास की ओर विरोध मार्च निकालने की तैयारी में थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें अस्पताल परिसर के भीतर ही रोक लिया। मौके की संवेदनशीलता को देखते हुए अस्पताल के चारों ओर बैरिकेडिंग कर दी गई है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए वाटर कैनन, रिजर्व पुलिस बल और एसडीएम सहित वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी तैनात हैं।
प्रदर्शनकारी डॉक्टरों के अनुसार, लगभग डेढ़ महीने पहले शासन की ओर से स्टाइपेंड बढ़ाने का मौखिक आश्वासन मिला था, लेकिन अब तक कोई लिखित आदेश जारी नहीं हुआ। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे डॉक्टर मोहित मिश्रा ने बताया कि हमने पहले संवैधानिक तरीके से अपनी मांग रखी। सुनवाई न होने पर ही शांतिपूर्ण मार्च का कदम उठाना पड़ा। अब हम केवल आश्वासन नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री मोहन यादव के हाथों लिखित आदेश चाहते हैं। हमीदिया अस्पताल के गेट नंबर-1 पर डटे इंटर्न डॉक्टरों का कहना है कि जब तक मुख्यमंत्री स्वयं आकर मांग पूरी करने का लिखित आदेश नहीं देते, तब तक उनका यह धरना परिसर में ही जारी रहेगा।
डॉक्टरों की प्रमुख मांगें
डॉक्टरों को वर्तमान में 14,337 रुपए प्रतिमाह मिल रहे हैं, जिसे बढ़ाकर न्यूनतम 30 हजार रुपए करने की मांग है। डॉक्टरों का दावा है कि उपमुख्यमंत्री व स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने यूपी की तर्ज पर स्टाइपेंड बढ़ाने की बात कही थी। प्रदेशभर के मेडिकल कॉलेजों से डॉक्टर इस प्रदर्शन में शामिल हो रहे हैं।
 बंडा जहरीली शराब कांड, धार से शराब आपूर्ति का लगाया आरोप
सिंघार ने विश्व हिंदू परिषद, आरएसएस और भाजपा नेताओं की चुप्पी पर उठाए सवाल
भोपाल। सागर जिले के बंडा में हुई जहरीली शराब त्रासदी को लेकर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने राज्य सरकार और प्रशासनिक तंत्र पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि हादसे में इस्तेमाल शराब उत्तर प्रदेश से नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश के धार जिले से आई थी। इस पूरे अवैध कारोबार में शासन-प्रशासन के बड़े अधिकारी सीधे तौर पर शामिल हैं।
सिंघार ने मामले में प्रशासनिक साठगांठ का दावा करते हुए कहा कि रॉयल ब्रांड और सागर गोल्ड नाम की शराब पीने से लोगों की जान गई है। उन्होंने सवाल उठाया कि डिस्टिलरी तक मिथेनॉल कैसे पहुंचा? आरोप लगाया कि प्रशासनिक दबाव में महज कुछ घंटों के भीतर सागर गोल्ड को क्लीन चिट दे दी गई, जबकि पहले इसके प्रतिबंध का आदेश जारी हुआ था। नेता प्रतिपक्ष ने भाजपा और हिंदू संगठनों को घेरते हुए कहा कि पाकिस्तान के बाद अगर हिंदू कहीं सबसे ज्यादा खतरे में हैं, तो वह मध्य प्रदेश है। इंदौर, छिंदवाड़ा, बालाघाट, मुरैना और अब सागर में लगातार जानें जा रही हैं। बंडा में सबसे ज्यादा मौतें लोधी समाज के लोगों की हुई हैं।
परिजनों को 25 लाख दिया जाए मुआवजा
उन्होंने तंज कसते हुए पूछा कि इतने बड़े हादसे के बावजूद विश्व हिंदू परिषद या आरएसएस का कोई नेता पीड़ितों के बीच क्यों नहीं पहुंचा? इस दौरान उन्होंने उमा भारती और प्रह्लाद पटेल की खामोशी पर भी सवाल खड़े किए। सरकार द्वारा घोषित 4 लाख रुपये की अनुग्रह राशि को नाकाफी बताते हुए सिंघार ने प्रत्येक मृतक के परिजन को 25 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग की। उन्होंने कहा कि स्थानीय कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पहले भी अवैध शराब की शिकायतें की थीं, लेकिन प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की।
 प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था बदहाल, 65 फीसदी पद खाली
यूनिवर्सिटी में धांधली और व्यापमं परीक्षाओं में पारदर्शिता की कमी का आरोप
भोपाल।  प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था, उच्च शिक्षा, विश्वविद्यालयों और प्रतियोगी परीक्षाओं की स्थिति पर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला है। प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह पटरी से उतर चुकी है और सरकार के दावे धरातल पर हवा-हवाई साबित हो रहे हैं।
नायक ने कहा कि राज्य के 7,217 स्कूल केवल एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं, जबकि स्कूलों और विश्वविद्यालयों में करीब 65 प्रतिशत शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं। पन्ना जिले के मोहंदरा शासकीय कन्या विद्यालय का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वहां राजनीति शास्त्र के शिक्षक गाइड देखकर 12वीं के बच्चों को भौतिकी पढ़ा रहे हैं। इसके अलावा, प्रदेश के 463 स्कूलों में एक भी छात्र ने प्रवेश नहीं लिया है।
निजी यूनिवर्सिटी में फर्जीवाड़ा और एआई पाठ्यक्रमों का अभाव
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि राज्य के 54 निजी विश्वविद्यालयों को बिना जमीनी सत्यापन के मंजूरी दी जा रही है। दूसरे राज्यों के एजेंटों के जरिए फर्जी उपस्थिति दर्ज कराई जाती है और डिग्री मिलने में 4-4 साल की देरी हो रही है। आज दुनिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और बायोइन्फॉर्मेटिक्स की दिशा में आगे बढ़ रही है, लेकिन प्रदेश के विश्वविद्यालयों में आधुनिक व रोजगारोन्मुख पाठ्यक्रमों का अभाव है।
परीक्षाओं की पारदर्शिता और नॉर्मलाइजेशन पर सवाल
इस अवसर पर कांग्रेस नेता स्वतंत्र सिंह चौहान ने व्यापमं (कर्मचारी चयन मंडल) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि 2019 से मुख्य परीक्षा की कॉपियां दिखाने और दो सालों से ओएमआर शीट देखने की व्यवस्था बंद कर दी गई है। अलग-अलग शिफ्टों में परीक्षा कराने के बाद लागू होने वाली नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया से परिणामों में भारी अस्पष्टता आ रही है।
 कर्मचारी का हंगामा, महापौर की गाड़ी में आग लगाने की कोशिश
भोपाल। भोपाल नगर निगम कार्यालय परिसर में सोमवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब अपनी लंबित मांगों से नाराज एक कर्मचारी ने हंगामा करते हुए महापौर मालती राय के वाहन को आग के हवाले करने का प्रयास किया। कर्मचारियों की तत्परता से समय रहते आग पर काबू पा लिया गया, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। हालांकि, आग बुझाने की कोशिश में रामसिंह यादव नाम का एक कर्मचारी झुलस गया।
अनुसार, आरोपी कर्मचारी पिछले कुछ समय से अस्वस्थ था और अस्पताल में भर्ती था। सोमवार को वह सीधे अस्पताल से नगर निगम मुख्यालय पहुंचा और हाथ में पर्चे लहराते हुए उग्र नारेबाजी करने लगा। विरोध जताते हुए वह महापौर की गाड़ी के पास पहुंचा और कुछ कागजों में आग लगाकर उन्हें वाहन की छत पर रख दिया। गाड़ी से धुएं और लपटों को उठते देख मौके पर मौजूद अन्य कर्मियों ने बिना देर किए जलते हुए कागजों को हाथों से खींचकर नीचे फेंका। इसी दौरान कर्मचारी रामसिंह यादव का हाथ झुलस गया। घटनास्थल पर फेंके गए पर्चों पर कर्मचारी नगर निगम भोपाल के साथ सम्राट अशोक संगठन और नगर निगम भोपाल के कर्मचारी अध्यक्ष सुनील गायकवाड़ का नाम अंकित है। पर्चों के जरिए कर्मचारी ने अपनी विभिन्न समस्याओं और मांगों का निराकरण न होने पर गहरा रोष जताया था।
स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2026 में टॉप-5 में प्रदेश के तीन शहर
इंदौर दूसरे, जबलपुर तीसरे और भोपाल चौथे स्थान पर, वार्ड स्तर पर भी प्रदेश के शहरों का दबदबा
भोपाल। प्रदेश के शहरों ने स्वच्छ हवा की दिशा में अपने प्रदर्शन का दम दिखाया है। स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 की रैंकिंग में प्रदेश के तीन बड़े शहरों ने 10 लाख से अधिक आबादी वाली श्रेणी में टॉप-5 में जगह बनाई है। इंदौर दूसरे, जबलपुर तीसरे और भोपाल चौथे स्थान पर रहे। खास बात यह है कि इस श्रेणी में प्रदेश के तीनों शहरों के बीच स्कोर का अंतर भी बहुत कम रहा। वहीं अन्य श्रेणियों में उज्जैन, सागर और देवास ने भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। वार्ड स्तर की रैंकिंग में भी मध्यप्रदेश के शहरों का प्रदर्शन उल्लेखनीय रहा।
स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 की श्रेणी-एक में 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों को शामिल किया गया। इसमें मध्यप्रदेश के तीन शहर टॉप-5 में रहे। इंदौर का स्कोर 197, रैंक 2, जबलपुर का स्कोर 195 और रैंक 3 पर और भोपाल का स्कोर 192, रैंक 4 रही है।  इस तरह प्रदेश के इंदौर, जबलपुर और भोपाल ने मिलकर इस श्रेणी में मजबूत प्रदर्शन किया।
उज्जैन और सागर की भी रैंकिंग में जगह
 सर्वेक्षण की श्रेणी-दो में 3 लाख से 10 लाख आबादी वाले शहरों को रखा गया है। इस श्रेणी में मध्यप्रदेश के दो शहर शामिल हैं। उज्जैन का स्कोर 181.5, रैंक 13 एवं सागर का स्कोर 178, रैंक 18 रही है।  दोनों शहरों ने स्वच्छ वायु के क्षेत्र में अपनी स्थिति दर्ज कराई है।  इसी तरह श्रेणी-तीन में 3 लाख से कम आबादी वाले शहरों को शामिल किया गया। इस श्रेणी में मध्यप्रदेश से देवास ने जगह बनाई। देवास का स्कोर 188, रैंक 7 रही है।
वार्ड स्तर पर प्रदेश का प्रदर्शन
सर्वेक्षण में शहरों के साथ-साथ वार्ड स्तर पर भी रैंकिंग जारी की गई है। 30 हजार से अधिक आबादी वाले वार्डों की सूची में मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के वार्ड क्रमांक 60 ने दूसरी रैंक हासिल की। इसके अलावा राज्य-स्तरीय पुरस्कारों में भी प्रदेश के विभिन्न नगर निकायों के वार्डों को सम्मान मिला है। इनमें इंदौर नगर निगम के वार्ड क्रमांक 72, भोपाल के वार्ड क्रमांक 32 और देवास नगर निगम के वार्ड क्रमांक 26  शामिल हैं।
प्रदेश के लिए अहम उपलब्धि
स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 के आंकड़े बताते हैं कि बड़े शहरों की श्रेणी में मध्यप्रदेश का प्रदर्शन खास तौर पर मजबूत रहा है। इंदौर, जबलपुर और भोपाल का टॉप-5 में शामिल होना जहां प्रदेश के लिए बड़ी उपलब्धि है, वहीं उज्जैन, सागर और देवास की रैंकिंग तथा वार्ड स्तर पर मिली जगह यह संकेत देती है कि स्वच्छ हवा के लिए शहर स्तर पर किए जा रहे प्रयासों का असर अलग-अलग श्रेणियों में दिखाई दे रहा है।
पितृपक्ष के दौरान भोपाल से गया के बीच चलेगी स्पेशल ट्रेन
भोपाल। यात्रियों के लिए एक अच्छी खबर है। पितृपक्ष के दौरान यात्रियों की भीड़ को देखते हुए पश्चिम मध्य रेलवे भोपाल मंडल ने रानी कमलापति से गया के बीच स्पेशल ट्रेन चलाने का निर्णय लिया है। यह ट्रेन दोनों तरफ से 3-3 ट्रिप करेगी।
गाड़ी संख्या 01661 रानी कमलापति-गया स्पेशल 27 सितंबर, 2 अक्टूबर और 7 अक्टूबर को चलेगी। यह ट्रेन रानी कमलापति से दोपहर 15.20 बजे रवाना होकर नर्मदापुरम 16.34 बजे, इटारसी 17.05 बजे होते हुए अगले दिन दोपहर 14.30 बजे गया पहुंचेगी। वापसी में गाड़ी संख्या 01662 गया-रानी कमलापति स्पेशल गया से 30 सितंबर, 5 अक्टूबर और 10 अक्टूबर को चलेगी। यह गया से 15.30 बजे रवाना होकर अगले दिन इटारसी 14.05 बजे, नर्मदापुरम 14.43 बजे होते हुए रानी कमलापति 16.15 बजे पहुंचेगी। इस स्पेशल ट्रेन में कुल 24 कोच होंगे। इसमें 2 एसएलआर डी, 4 सामान्य, 12 स्लीपर, 4 एसी थर्ड और 2 एसी सेकंड कोच शामिल हैं।
यहां-यहां रुकेगी ट्रेन
ट्रेन का ठहराव नर्मदापुरम, इटारसी, पिपरिया, नरसिंहपुर, जबलपुर, सिहोरा रोड, कटनी, मैहर, सतना, मानिकपुर, प्रयागराज छिवकी, मिर्जापुर, पं. दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन, भभुआ रोड, सासाराम, डेहरी-ऑन-सोन, अनुग्रह नारायण रोड स्टेशनों पर होगा।


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