दो साल पुराने जन्म-मृत्यु पंजीयन की राह खुली
कलेक्टरों और अतिरिक्त मुख्य रजिस्ट्रार को निर्देश
भोपाल। प्रदेश में दो साल से अधिक पुराने जन्म-मृत्यु मामलों के विलंबित पंजीयन को लेकर बनी असमंजस की स्थिति फिलहाल दूर हो गई है। आर्थिक एवं सांख्यिकी संचालनालय ने स्पष्ट किया है कि आगामी आदेश तक ऐसे मामलों में पूर्ववत प्रक्रिया के तहत ही पंजीयन किया जाएगा।
मुख्य रजिस्ट्रार (जन्म-मृत्यु) एवं आयुक्त, आर्थिक एवं सांख्यिकी ने इस संबंध में प्रदेश के सभी कलेक्टरों और अतिरिक्त मुख्य रजिस्ट्रारों को पत्र जारी कर आवश्यक निर्देश दिए हैं। दरअसल, जिलों से लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि प्रशासनिक मजिस्ट्रेट यानी तहसीलदार 6 अगस्त 2026 के जन्म-मृत्यु संशोधन विधेयक के राजपत्र नोटिफिकेशन का हवाला देकर दो साल से अधिक पुराने मामलों के पंजीयन की अनुमति संबंधी आवेदन स्वीकार नहीं कर रहे हैं। कई लोक सेवा केंद्रों पर भी ऐसे आवेदन नहीं लिए जाने की शिकायतें सामने आई थीं। इससे पुराने जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए आवेदन करने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।
जारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि जन्म-मृत्यु पंजीयन अधिनियम, 1969 की धारा 13(3) के तहत विलंबित पंजीयन की प्रक्रिया फिलहाल पहले की तरह लागू रहेगी। यानी जन्म या मृत्यु की घटना के दो वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी पंजीयन के लिए मौजूदा प्रक्रिया के अनुसार आवेदन लिया जाएगा और नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
रजिस्ट्रार जनरल की ओर से नया आदेश नहीं
मुख्य रजिस्ट्रार ने यह भी स्पष्ट किया है कि रजिस्ट्रार जनरल कार्यालय, नई दिल्ली की ओर से इस संबंध में अब तक कोई नया आदेश या निर्देश जारी नहीं किया गया है। ऐसे में 6 अगस्त के राजपत्र नोटिफिकेशन का हवाला देकर दो साल से अधिक पुराने जन्म-मृत्यु मामलों का पंजीयन रोकने का कोई आधार नहीं है। संचालनालय ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि आगामी आदेश तक पूर्व निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ही मामलों का निराकरण किया जाए।
आउटसोर्स कर्मियों के वेतन और सेवा रिकॉर्ड की होगी ऑनलाइन निगरानी
31 अक्टूबर तक पोर्टल पर दर्ज करना होगा पूरा रिकॉर्ड
भोपाल। प्रदेश के करीब 1.5 लाख आउटसोर्स कर्मियों के वेतन और सेवा रिकॉर्ड की अब ऑनलाइन निगरानी होगी। सरकार ने सभी विभागों को 31 अक्टूबर तक आउटसोर्स कर्मचारियों की पूरी जानकारी आरओएमएस (रिसोर्स आउटसोर्सिंग एजेंसी मैनेजमेंट सिस्टम) पोर्टल पर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। नई व्यवस्था के तहत यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि आउटसोर्स कर्मियों को सरकार द्वारा निर्धारित वेतन का पूरा भुगतान हो रहा है या नहीं। रिकॉर्ड ऑनलाइन होने के बाद सरकार के पास कर्मचारी, एजेंसी और विभाग से जुड़ी जानकारी एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध रहेगी।
नई व्यवस्था में प्रत्येक विभाग में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों का पूरा रिकॉर्ड पोर्टल पर दर्ज करना अनिवार्य होगा। इसमें कर्मचारी की केवाईसी, योग्यता, पद, कार्य, पहचान और उपस्थिति से संबंधित जानकारी शामिल होगी। कर्मचारियों की पहचान को आधार आधारित ई-केवाईसी से जोड़ा जाएगा। साथ ही यह जानकारी भी ऑनलाइन उपलब्ध रहेगी कि किस विभाग में किस एजेंसी के कितने कर्मचारी काम कर रहे हैं। वित्त विभाग ने सभी संबंधित विभागों को 31 अक्टूबर तक रिकॉर्ड दर्ज करने की प्रक्रिया पूरी करने’’ के निर्देश दिए हैं। तय समय सीमा में जानकारी ऑनलाइन दर्ज नहीं करने वाली आउटसोर्स एजेंसियों के बिल रोके जा सकते हैं।
कम वेतन देने की शिकायतों के बाद फैसला
सरकार की ओर से आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए न्यूनतम वेतन निर्धारित किया जाता है। इसके बावजूद लंबे समय से ऐसी शिकायतें सामने आ रही थीं कि कुछ एजेंसियां सरकार से निर्धारित राशि का भुगतान लेने के बाद कर्मचारियों को पूरी राशि नहीं दे रही हैं। कर्मचारियों ने कई बार एजेंसियों पर तय वेतन से कम भुगतान करने के आरोप लगाए हैं।
तीन माह में नहीं बना मास्टर प्लान तो इंदौर से भोपाल तक पैदल मार्च
31 घंटे के उपवास के बाद कांग्रेस नेता का अनशन खत्म
भोपाल। राजधानी के मास्टर प्लान को लेकर सियासत एक बार फिर गरमा गई है। रोशनपुरा चौराहे पर कांग्रेस के प्रदर्शन के दौरान पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने भाजपा सरकार को सीधे निशाने पर लेते हुए कहा कि प्रदेश में करीब 20 साल से भाजपा की सरकार है, लेकिन भोपाल को अब तक मास्टर प्लान नहीं मिल सका।
पटवारी ने कहा कि मास्टर प्लान नहीं आने की जिम्मेदारी सरकार की है। कांग्रेस ने सरकार को इस मामले में तीन महीने की मोहलत देते हुए चेतावनी दी है कि तय अवधि में फैसला नहीं हुआ तो इंदौर से भोपाल तक पैदल मार्च निकाला जाएगा। मास्टर प्लान की मांग को लेकर कांग्रेस ने रोशनपुरा चौराहे पर बड़ा प्रदर्शन किया। पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने इस दौरान 31 घंटे तक उपवास किया। शनिवार, 12 सितंबर को प्रदेष कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने उन्हें जूस पिलाकर उपवास समाप्त कराया।
लाखों परिवारों के उजड़ने का खतरारू पटवारी
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए पटवारी ने आरोप लगाया कि मास्टर प्लान के नाम पर लाखों परिवारों के सामने उजड़ने का खतरा पैदा हो रहा है। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि जिन दुकानों से पिछले 15 वर्षों से टैक्स वसूला जा रहा था, अब उन्हीं पर कार्रवाई क्यों की जा रही है। पटवारी ने कहा कि राजधानी के विकास और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए मास्टर प्लान जरूरी है, लेकिन सरकार इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर निर्णय लेने से बच रही है। उन्होंने मीडिया की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार से मास्टर प्लान को लेकर सवाल क्यों नहीं किए जा रहे हैं।
तो 50 हजार लोग करेंगे भोपाल कूच
कांग्रेस ने सरकार को तीन महीने का समय दिया है। पटवारी ने ऐलान किया कि यदि इस अवधि में मास्टर प्लान को लेकर कोई ठोस फैसला नहीं हुआ तो कांग्रेस इंदौर से भोपाल तक पैदल मार्च करेगी। उन्होंने कहा कि इंदौर से करीब 50 हजार लोगों के साथ भोपाल कूच किया जाएगा।
राहुल गांधी के कार्यकम के लिए जमा कराए दस लाख
पटवारी ने बताया कि छात्रों के अधिकारों की आवाज उठाने के लिए राहुल गांधी इंदौर आएंगे। वे छात्रों की गूंज कार्यक्रम में शामिल होंगे। पटवारी के मुताबिक, मध्यप्रदेश में पहली बार राहुल गांधी किसी छात्र कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे हैं। कार्यक्रम के लिए सरकार से अनुमति मिल चुकी है। कांग्रेस ने कार्यक्रम के लिए ग्राउंड को लेकर आईडीए में 10 लाख रुपए जमा कराए हैं। पटवारी ने कहा कि छात्रों के अधिकारों को लेकर इंदौर में राहुल गांधी का बड़ा कार्यक्रम होगा और कांग्रेस इसे छात्रों की आवाज को मजबूती देने के अवसर के रूप में देख रही है।
सर्पदंश अब स्थानीय आपदा, हर जिले को 23.17 लाख जारी
जिलों में तैयार होगा स्नेक बाइट डेटाबेस और सर्प-मित्रों का नेटवर्क
भोपाल। मानसून के दस्तक देते ही सर्पदंश के बढ़ते खतरों को देखते हुए प्रदेश सरकार ने एक बेहद अहम और संवेदनशील कदम उठाया है। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने सर्पदंश (स्नेक बाइट) को आधिकारिक तौर पर स्थानीय आपदा घोषित कर दिया है। सरकार के इस फैसले के बाद अब सभी जिलों को अलर्ट मोड पर रखते हुए विशेष कार्ययोजना (एक्शन प्लान) बनाकर तत्काल प्रभाव से कार्रवाई शुरू करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं।
प्राधिकरण की ओर से जारी गाइडलाइंस में स्पष्ट किया गया है कि बारिश के दौरान प्राकृतिक आवासों और बिलों में पानी भर जाने के कारण सांप सुरक्षित स्थानों और मानव बस्तियों की ओर रुख करते हैं। इस स्थिति से निपटने के लिए प्रदेश के सभी शासकीय अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में एंटी-वेनम तथा अन्य जीवनरक्षक दवाओं का पर्याप्त स्टॉक रखने को कहा गया है, ताकि किसी भी मरीज को तत्काल और गुणवत्तापूर्ण इलाज मिल सके।
जिला स्तर पर तैयार होगा डेटाबेस
हर जिले में सर्पदंश के मामलों की रियल-टाइम ट्रैकिंग के लिए डेटाबेस तैयार होगा। इससे अति-संवेदनशील (हॉटस्पॉट) क्षेत्रों की पहचान कर वहां विशेष जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे। स्थानीय स्तर पर रेस्क्यू और जन-जागरूकता के लिए प्रशिक्षित सर्प-मित्रों का नेटवर्क तैयार किया जाएगा, जो आपात स्थिति में त्वरित मदद पहुंचाएंगे। क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण योजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 के तहत प्रत्येक जिले को 23.17 लाख रुपये की राशि आवंटित कर दी गई है।
सागर शराब कांड की जांच करेगा आयोग, 3 महीने में सरकार को सौंपेगा रिपोर्ट
भोपाल। प्रदेष के सागर में हुई संदिग्ध जहरीली शराब त्रासदी की परतें उधेड़ने के लिए राज्य सरकार ने कड़ा कदम उठाया है। मामले की निष्पक्ष और तथ्यपरक जांच के लिए हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश विष्णु प्रताप सिंह चौहान की अध्यक्षता में एक सदस्यीय जांच आयोग का गठन किया गया है।
आयोग का मुख्यालय सागर ही बनाया गया है, जहाँ से वह सीधे तौर पर घटना की बारीकियों की पड़ताल करेगा। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, आयोग को 3 महीने के भीतर अपनी जांच पूरी कर रिपोर्ट राज्य शासन को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। गठित जांच आयोग मुख्य रूप से 3 प्रमुख बिंदुओं पर केंद्रित रहकर पड़ताल करेगा। इनमें जहरीली शराब के सेवन से हुई मौतों और लोगों के बीमार पड़ने के मूल कारणों, घटना के वास्तविक स्वरूप और उससे जुड़ी तमाम परिस्थितियों का तथ्यात्मक परीक्षण कर सच सामने लाना। संबंधित क्षेत्र के आबकारी, पुलिस व अन्य जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा अपने निर्धारित दायित्वों के निर्वहन में की गई लापरवाही की जांच करना। इस तरह की त्रासदी की पुनरावृत्ति रोकने, अवैध शराब पर प्रभावी नियंत्रण लगाने और निगरानी तंत्र को मजबूत करने के लिए जरूरी सिफारिशें प्रस्तुत करना प्रमुख हैं।
सीधे परीक्षा देकर बन सकेंगे नायब तहसीलदार
17 सितंबर से शुरू होंगे ऑनलाइन आवेदन, 5 साल के अनुभव वाले पटवारी
भोपाल। राजस्व विभाग में कार्यरत मैदानी और प्रशासनिक कर्मचारियों के लिए नायब तहसीलदार बनने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल ने सीमित विभागीय प्रतियोगिता परीक्षा-2026 की घोषणा कर दी है, जिसके माध्यम से नायब तहसीलदार के कुल 73 पदों पर सीधी पदोन्नति सह नियुक्ति की जाएगी। इस विभागीय परीक्षा में पात्रता पूरी करने वाले पटवारी, राजस्व निरीक्षक (आरआई) और लिपिक संवर्ग के कर्मचारी भाग ले सकेंगे।
विभाग द्वारा जारी समय-सारणी के अनुसार, अभ्यर्थी 17 सितंबर से 1 अक्टूबर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन जमा कर सकते हैं। भरे गए आवेदनों में किसी प्रकार के संशोधन के लिए 6 अक्टूबर तक की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। चयन बोर्ड ने परीक्षा की संभावित तिथि 14 नवंबर 2026 निर्धारित की है। यह परीक्षा प्रदेश के चार प्रमुख शहरों के भोपाल, इंदौर, जबलपुर और उज्जैनकृमें आयोजित की जाएगी।
5 साल का अनुभव और स्नातक डिग्री अनिवार्य
विभागीय परीक्षा में सम्मिलित होने के लिए कर्मचारियों के पास राजस्व विभाग के लिपिक वर्ग, पटवारी या राजस्व निरीक्षक के पद पर न्यूनतम 5 वर्ष का सेवा अनुभव होना आवश्यक है। सेवा स्थायी या स्थानापन्न किसी भी रूप में स्वीकार्य होगी। इसके अतिरिक्त, अभ्यर्थी के पास किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से कला, विज्ञान, वाणिज्य या कृषि विषय में स्नातक होना अनिवार्य है। यह शैक्षणिक योग्यता आवेदन की अंतिम तिथि (1 अक्टूबर 2026) तक पूर्ण हो जानी चाहिए। निर्धारित तिथि के बाद डिग्री हासिल करने वाले कर्मचारी इस प्रक्रिया के लिए पात्र नहीं माने जाएंगे।
पदों का संवर्गवार विभाजन
नायब तहसीलदार के कुल 73 पदों को दो अलग-अलग संवर्गों में विभाजित किया गया है। लिपिक संवर्ग के 46 पदों में से 32 पद सामान्य प्रशासन विभाग के आरक्षण रोस्टर के अनुसार हैं तथा 14 पद बैकलॉग के हैं। रोस्टर आधारित 32 पदों में अनारक्षित के 9, ईडब्ल्यूएस के 3, अनुसूचित जाति के 5, अनुसूचित जनजाति के 6 और अन्य पिछड़ा वर्ग के 9 पद शामिल हैं। वहीं पटवारी व राजस्व निरीक्षक संवर्ग के 27 पदों में से 12 पद रोस्टर के तहत और 15 पद बैकलॉग के निर्धारित हैं। रोस्टर के 12 पदों में अनारक्षित के 4, ईडब्ल्यूएस का 1, एससी के 2, एसटी के 2 और ओबीसी के 3 पद शामिल हैं।
आयु सीमा और परीक्षा का स्वरूप
1 जनवरी 2026 को अभ्यर्थी की अधिकतम आयु 55 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए। कोई भी कर्मचारी इस सीमित विभागीय परीक्षा में अधिकतम 3 बार ही शामिल हो सकता है। परीक्षा वस्तुनिष्ठ बहुविकल्पीय प्रश्नों पर आधारित होगी। कुल 100 प्रश्नों के लिए 100 अंक निर्धारित किए गए हैं और परीक्षा की अवधि 2 घंटे होगी, जो दो पालियों में संपन्न होगी। परीक्षा उत्तीर्ण करने के लिए सामान्य श्रेणी के अभ्यर्थियों को न्यूनतम 55 फीसदी तथा अनुसूचित जनजाति वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए 40 फीसदी हासिल करना अनिवार्य होगा।
वेतनमान मिलेगा लेवल-9 का पे-स्केल
अंतिम रूप से चयनित अभ्यर्थियों को नायब तहसीलदार पद पर मध्य प्रदेश वेतन पुनरीक्षण नियम-2017 के तहत लेवल-9 का वेतनमान प्रदान किया जाएगा। इसका वेतन बैंड 36,200 से 1,14,800 निर्धारित है। इसके साथ ही राज्य शासन के नियमानुसार लागू महंगाई भत्ता एवं अन्य भत्ते भी देय होंगे। बुंदेलखंड की माटी उगलेगी सोना, अन्नदाताओं को हर सुविधा देगी सरकार
बलराम कृषि महोत्सव में मुख्यमंत्री ने वर्चुअली जुड़कर प्रगतिशील किसानों से किया सीधा संवाद
भोपाल। धरती पुत्र अपने अथक परिश्रम से फसलें उगाकर पूरे देश का पेट भरते हैं। अन्नदाता किसानों की हर समस्या का समाधान करना और उन्हें सभी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना राज्य सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है।
यह बात मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नई दिल्ली प्रवास के दौरान शनिवार को छतरपुर में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव को वर्चुअली संबोधित करते हुए कही। बुंदेलखंड की समृद्ध माटी की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह हीरों की धरती है, जहां की ज़मीन से अमूल्य रत्न निकलते हैं। उन्होंने जिले में पिपरमेंट की उन्नत खेती और स्थानीय फर्नीचर उद्योग की बेहतरीन गुणवत्ता का विशेष रूप से उल्लेख किया।
किसानों ने साझा किए जैविक खेती व होलिस्टिक फार्मिंग के अनुभव
संवाद के दौरान प्रगतिशील किसानों ने अपने नवाचारों से मुख्यमंत्री को अवगत कराया। सलीम खान ने जैविक, प्राकृतिक एवं औषधीय फसलों के उत्पादन के साथ-साथ अन्य कृषकों को भी इस दिशा में प्रेरित कर रहे हैं। सौरभ भटनागर (बिजावर) ने प्राकृतिक खेती के साथ फल-सब्जी उत्पादन और मुर्गी, मछली व बतख पालन (होलिस्टिक फार्मिंग) का मॉडल प्रस्तुत किया। हब्बीबाई (ग्राम सलैया) ने श्रीअन्न (कोदो, कुटकी, रागी, बाजरा, ज्वार) का उत्पादन और प्रोसेसिंग कर बाजार में बेचने का सफल अनुभव साझा किया।
प्रदर्शनी और कृषि वैज्ञानिकों ने दिया आधुनिक तकनीक का ज्ञान
रबी सीजन को ध्यान में रखते हुए आयोजित इस महोत्सव में कृषि वैज्ञानिकों और विषय विशेषज्ञों ने किसानों को उन्नत बीज किस्मों, समसामयिक फसल प्रबंधन और आधुनिक तकनीकों के माध्यम से आय बढ़ाने के तरीके बताए। कार्यक्रम स्थल पर उद्यानिकी, पशुपालन और कृषि अभियांत्रिकी विभाग द्वारा स्टॉल व प्रदर्शनियां लगाई गईं, जिनमें ई-विकास प्रणाली से उर्वरक वितरण और नवीनतम कृषि यंत्रों की जानकारी दी गई।
लाड़ली बहनों के खातों आज जमा होगी राषि
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव रविवार 13 सितंबर को आगर मालवा से मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना की सितंबर माह की 40वीं किस्त का अंतरण करेंगे। इस अवसर पर प्रदेश की 1 करोड़ 25 लाख 10 हजार 150 पात्र महिलाओं के बैंक खातों में 1,835 करोड़ 9 लाख 22 हजार 450 रुपये की मासिक आर्थिक सहायता सीधे अंतरित की जाएगी। सितंबर की किस्त के साथ ही योजना के प्रारंभ से अब तक महिलाओं को नियमित मासिक सहायता के रूप में अंतरित राशि 65,395.99 करोड़ रुपये हो जाएगी।
पुलिस विभाग में सौ से ज्यादा अधिकारियों के हुए तबादले
भोपाल। पुलिस मुख्यालय ने पुलिस विभाग में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है। पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी किए गए दो अलग-अलग आदेशों में कुल 112 पुलिस अधिकारियों की नई पदस्थापना की गई है। इनमें 68 निरीक्षक और कार्यवाहक निरीक्षक, जबकि 44 रक्षित निरीक्षक शामिल हैं।
पुलिस स्थापना बोर्ड की मंजूरी के बाद जारी इन आदेशों के तहत कई अधिकारियों को एक जिले से दूसरे जिले में भेजा गया है। वहीं कुछ अधिकारियों को एसटीएफ, राज्य साइबर मुख्यालय, विशेष शाखा, लोकायुक्त संगठन, मानव अधिकार आयोग और पुलिस प्रशिक्षण संस्थानों जैसी महत्वपूर्ण इकाइयों में नई जिम्मेदारियां दी गई हैं। पहले आदेश में राम शर्मा को पीटीएस तिघरा से जिला भिंड, बनवारी लाल त्यागी को नरसिंहपुर से सीहोर और बाबूलाल कुमावत को इंदौर नगरीय से खंडवा पदस्थ किया गया है। इसके अलावा ग्वालियर, जबलपुर, भोपाल, देवास, झाबुआ और सागर समेत कई जिलों में अधिकारियों की जिम्मेदारियां बदली गई हैं। वहीं दूसरे आदेश में 44 रक्षित निरीक्षकों की पदस्थापना में बदलाव किया गया है। इस आदेश की खास बात यह है कि बड़ी संख्या में अधिकारियों को यातायात शाखा में भेजा गया है। ऐसे में आने वाले दिनों में प्रदेश के कई शहरों और जिलों की ट्रैफिक व्यवस्था में बदलाव देखने को मिल सकता है।
पुलिस मुख्यालय ने सभी संबंधित अधिकारियों को स्थानांतरण नीति-2026 के अनुसार समय पर कार्यमुक्त करने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, निलंबित अधिकारियों को कार्यमुक्त नहीं किया जाएगा और इसकी सूचना मुख्यालय को देनी होगी। कुल मिलाकर, 112 अधिकारियों के इस बड़े फेरबदल से मध्यप्रदेश पुलिस के जिला स्तर से लेकर विशेष इकाइयों तक जिम्मेदारियों में व्यापक बदलाव हुआ है।
स्नातक और स्नातकोत्तर की रिक्त सीटों पर प्रवेश का अंतिम मौका
सीएलसी चरण 16 सितंबर तक
भोपाल। उच्च शिक्षा विभाग ने सत्र 2026-27 के लिए स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों की रिक्त सीटों पर दाखिले के लिए विद्यार्थियों को एक और अवसर दिया है। विभाग ने अतिरिक्त कॉलेज लेवल काउंसलिंग चरण की घोषणा की है, जो 12 से 16 सितंबर तक आयोजित किया जाएगा।
पूर्व जारी आदेश के तहत पहले आओ, पहले पाओ आधार पर प्रवेश प्रक्रिया 21 से 31 अगस्त तक निर्धारित की गई थी। हालांकि, छात्र हित को ध्यान में रखते हुए और छूटे हुए विद्यार्थियों को राहत देने के लिए इस अवधि को बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। इसके तहत 12 से 16 सितंबर तक आवेदन कर सकते हैं। प्रदेश के सभी शासकीय, अनुदान प्राप्त अशासकीय एवं अशासकीय महाविद्यालयों में पहले आओ, पहले पाओ की नीति लागू रहेगी। इस चरण की अंतिम तारीख 16 सितंबर को निर्धारित की गई है। इस समय के बाद कोई भी प्रवेश मान्य नहीं होगा। उच्च शिक्षा संचालनालय ने सभी कॉलेजों को निर्देश दिए हैं कि वे तय समय-सीमा में प्रक्रिया पूरी करें और विद्यार्थियों को आवश्यक सहयोग प्रदान करें। साथ ही, विभाग ने छात्रों से अपील की है कि वे अंतिम तिथि का इंतजार किए बिना समय पर प्रवेश प्रक्रिया पूर्ण कर लें।