पद की आस में दावेदार, फैसले के इंतजार में भाजपा

कुर्सियां खाली, दावेदार बेचैन और पावर’ का इंतजार
भोपाल। प्रदेश भाजपा में इन दिनों सबसे बड़ा सवाल यह नहीं है कि अगला राजनीतिक कदम क्या होगा, बल्कि यह है कि खाली कुर्सियों पर बैठेगा कौन? संगठन महामंत्री और प्रदेश मीडिया प्रभारी जैसे अहम पद लंबे समय से रिक्त हैं, वहीं निगम-मंडल, बोर्ड और प्राधिकरणों में नियुक्तियों का सिलसिला भी अभी पूरा नहीं हुआ है। लिहाजा संगठन से लेकर सत्ता तक नियुक्तियों की राजनीति अब पार्टी के भीतर बढ़ती बेचैनी का कारण बनती जा रही है। खास बात यह है कि यह बेचैनी केवल पद पाने की नहीं, बल्कि पद के साथ प्रभाव और अधिकार हासिल करने की भी है।
जनवरी के अंत में हितानंद शर्मा के दायित्व परिवर्तन के बाद प्रदेश भाजपा को अब तक नया संगठन महामंत्री नहीं मिल पाया है। क्षेत्रीय संगठन मंत्री अजय जामवाल लगातार प्रवास कर संगठन को सक्रिय बनाए हुए हैं, लेकिन प्रदेश संगठन की धुरी माने जाने वाले संगठन महामंत्री की खाली कुर्सी अपने आप में संकेत है। इस पद पर दिनकर राव सबनीस का नाम सबसे आगे माना जा रहा है। वहीं अभय महाजन, अखिलेश मिश्रा, राजमोहन विमल गुप्ता और निखिलेश माहेश्वरी भी संभावित नामों में हैं, लेकिन अंतिम फैसला संघ को करना है। यही वजह है कि इस नियुक्ति में भाजपा की राजनीतिक पसंद से ज्यादा संघ की संगठनात्मक कसौटी महत्वपूर्ण होगी। फैसला जितना देर से होगा, उतनी ही दावेदारों की बेचौनी बढ़ेगी।
दरअसल, भाजपा के सामने अब नियुक्तियों से बड़ी चुनौती असंतोष प्रबंधन की है। एक नियुक्ति किसी एक दावेदार को संतुष्ट करती है तो कई दूसरे दावेदारों को निराश करती है। संगठन महामंत्री के लिए संघ का फैसला, मीडिया प्रभारी के लिए नेतृत्व की पसंद और निगम-मंडलों में राजनीतिक संतुलन इन तीनों मोर्चों पर पार्टी को ऐसा फैसला करना होगा जिससे पद भी भरें और भीतर की खींचतान भी न बढ़े। नियुक्तियों में देरी अब महज प्रशासनिक सुस्ती नहीं रह गई है। यह भाजपा के भीतर चल रहे राजनीतिक संतुलन की परीक्षा बन चुकी है। आने वाले फैसले बताएंगे कि पार्टी ने सिर्फ खाली कुर्सियां भरी हैं या सत्ता-संगठन के बीच नई राजनीतिक पटकथा भी लिखी है।
मीडिया प्रभारी, अनुभव भारी या पसंद
आशीष ऊषा अग्रवाल के राष्ट्रीय सह-मीडिया प्रभारी बनने के बाद प्रदेश मीडिया प्रभारी का पद खाली है। यहां मुकाबला अपेक्षाकृत दिलचस्प है। पूर्व प्रदेश मीडिया प्रभारी डॉ. हितेश वाजपेयी के पास अनुभव और आक्रामक तरीके से पार्टी का पक्ष रखने की क्षमता है। दूसरी ओर मिलन भार्गव लंबे समय से मीडिया टीम में सक्रिय हैं और उन्हें प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की पसंद के रूप में देखा जा रहा है। वहीं अंशुल तिवारी, आलोक दुबे और ब्रज गोपाल लोया भी दौड़ में बताए जा रहे हैं, लेकिन फिलहाल मुकाबला मुख्यतः डा वाजपेयी और भार्गव के बीच सिमटा दिखाई देता है। यानी यहां सवाल केवल यह नहीं कि कौन बेहतर मीडिया मैनेजर है, बल्कि यह भी है कि पार्टी को आक्रामक चेहरा चाहिए या संगठन के साथ सहज तालमेल वाला चेहरा।
पद मिले, पावर’ कब मिलेगा?
सबसे ज्यादा राजनीतिक पेच निगम-मंडल और प्राधिकरणों की नियुक्तियों में है। सत्ता और संगठन की सहमति से अब तक 34 अध्यक्ष और 14 उपाध्यक्ष बनाए जा चुके हैं, लेकिन कई वरिष्ठ नेता अभी भी समायोजन की प्रतीक्षा में हैं। भोपाल और इंदौर के नेताओं की महत्वाकांक्षाएं इस गणित को और कठिन बना रही हैं। विडंबना यह है कि जिन्हें पद मिल चुका है, उनमें भी पूरी संतुष्टि नहीं है। कई अध्यक्षों और उपाध्यक्षों को अब तक मंत्री दर्जा नहीं मिला है। यानी भाजपा कार्यकर्ता पहले पद के लिए इंतजार करता रहा और पद मिलने के बाद अधिकार के लिए इंतजार कर रहा है। राजनीतिक रूप से यही सबसे असहज स्थिति है।
7500 से अधिक टॉपरों को 16 को स्कूटी सौंपेगी सरकार
70 फीसदी से अधिक अंक वाले पात्र, पेट्रोल और ई-स्कूटी चुनने का विकल्प उपलब्ध
भोपाल। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में 12वीं कक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी विद्यार्थियों का इंतजार अब खत्म होने जा रहा है। राज्य सरकार आगामी 16 सितंबर को एक भव्य राज्यस्तरीय कार्यक्रम में 7,500 से अधिक टॉपर छात्र-छात्राओं को निशुल्क स्कूटी की सौगात देने जा रही है। पहले यह वितरण कार्यक्रम 11 सितंबर को प्रस्तावित था, लेकिन प्रशासनिक कारणों से तिथि में संशोधन कर अब 16 सितंबर तय की गई है।
स्कूल शिक्षा विभाग ने योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए लगभग 200 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया है। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत प्रत्येक पात्र विद्यार्थी को स्कूटी खरीदने के लिए 1 लाख रुपये से लेकर 1.25 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता सीधे प्रदान की जाएगी। पूर्व में सरकारी स्कूलों के 60 प्रतिशत अंक लाने वाले स्कूल टॉपर्स भी इस योजना के दायरे में शामिल थे। हालांकि, नए संशोधनों के तहत अब केवल उन्हीं विद्यार्थियों को पात्र माना गया है जिन्होंने 12वीं बोर्ड परीक्षा में 70 प्रतिशत या उससे अधिक अंक हासिल किए हैं।
ई-स्कूटी की ओर बढ़ा रुझान
योजना की सबसे खास बात यह है कि विद्यार्थियों को अपनी पसंद के अनुसार पेट्रोल चालित या ई-स्कूटी (इलेक्ट्रिक) चुनने की छूट दी गई है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष छात्रों के बीच पर्यावरण-अनुकूल और किफायती ई-स्कूटी को लेकर जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है।
बीते वर्ष 7,832 विद्यार्थियों को मिली थी चाबी
उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में आयोजित एक विशेष समारोह में 7,832 मेधावी विद्यार्थियों को स्कूटी की चाबियां सौंपी थीं। उस दौरान सरकार ने सभी लाभार्थी छात्र-छात्राओं को बधाई देने के साथ ही अनिवार्य रूप से ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने, नंबर प्लेट लगाने और यातायात नियमों का पालन करते हुए सुरक्षित वाहन चलाने की सीख भी दी थी। इस वर्ष भी राजधानी में आयोजित होने वाले मुख्य समारोह की तैयारियां अंतिम चरण में हैं।
 मांग पूरी होने तक पीछे हटने को तैयार नहीं अभ्यर्थी
 25वें दिन भी जारी रहा अनशन
भोपाल। मध्यप्रदेश में शिक्षक भर्ती-2025 में वर्ग-2 और वर्ग-3 के पदों में वृद्धि की मांग को लेकर अभ्यर्थियों का संघर्ष अब आर-पार की लड़ाई में बदल चुका है। राजधानी के नीलम पार्क में चल रहे अनिश्चितकालीन आंदोलन के 25वें दिन अभ्यर्थियों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा और तेज कर दिया है। लगातार तीन दिनों से अन्न-जल त्यागकर निर्जल अनशन पर बैठे आंदोलनकारी नरेंद्र राजपूत की तबीयत लगातार बिगड़ती जा रही है, लेकिन मांगों को लेकर अभ्यर्थियों का रुख जस का तस बना हुआ है।
प्रशासनिक बेरुखी और सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस फैसला न आने से नीलम पार्क में मौजूद युवाओं में भारी आक्रोश व्याप्त है। उल्लेखनीय है कि पदवृद्धि को लेकर यह आंदोलन बीते 21 अगस्त से अनवरत जारी है। अगस्त माह में भी आंदोलन के दौरान नरेंद्र राजपूत कई दिनों तक निर्जल अनशन पर रहे थे, जिसके बाद स्वास्थ्य बिगड़ने पर पुलिस उन्हें जबरन अस्पताल ले गई थी। अस्पताल से लौटते ही अभ्यर्थियों ने अपने तेवर और तीखे कर लिए हैं।
लिखित आष्वासन पर ही समाप्त होगा आंदोलन
21 अगस्त से शुरू हुआ धरना-प्रदर्शन अब उग्र रूप ले चुका है। नरेंद्र राजपूत लगातार तीसरे दिन से बिना अन्न और जल ग्रहण किए अनशन पर हैं, जिससे उनकी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। पूर्व में पांच दिनों के निर्जल अनशन के बाद पुलिस द्वारा अस्पताल पहुंचाए जाने की कार्रवाई से आंदोलनकारियों में नाराजगी और गहरा गई है। अभ्यर्थियों का स्पष्ट कहना है कि जब तक वर्ग-2 और वर्ग-3 में सम्मानजनक पदवृद्धि का लिखित आश्वासन नहीं मिलता, आंदोलन समाप्त नहीं होगा।
 निजी प्रैक्टिस से सरकारी ड्यूटी प्रभावित हुई तो डॉक्टरों पर होगी कार्रवाई
 मरीजों को निजी अस्पताल भेजने की प्रवृत्ति पर भी रोक
भोपाल। प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस और ड्यूटी के दौरान अनुपस्थिति को लेकर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। उप मुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने निर्देश दिए हैं कि मेडिकल कॉलेजों में तैनात डॉक्टर संस्थान और मरीजों के लिए निर्धारित समय पूरी जिम्मेदारी से दें। निजी प्रैक्टिस के कारण सरकारी अस्पताल की सेवाएं, मरीजों का इलाज या मेडिकल छात्रों की पढ़ाई प्रभावित होने पर संबंधित डॉक्टर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और सरकारी मेडिकल कॉलेजों के एचओडी के साथ हुई बैठक में डॉक्टरों की कार्यप्रणाली और जिम्मेदारियों की समीक्षा की गई। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों की जिम्मेदारी केवल ओपीडी में मरीज देखने तक सीमित नहीं है। उन्हें ऑपरेशन थिएटर, नियमित वार्ड राउंड, मेडिकल छात्रों की कक्षाओं और पीजी विद्यार्थियों के प्रशिक्षण में भी सक्रिय भूमिका निभानी होगी।
निलंबन से सेवा समाप्ति तक कार्रवाई
सरकार ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि सरकारी ड्यूटी प्रभावित होने की स्थिति में संबंधित डॉक्टर के खिलाफ निलंबन से लेकर सेवा समाप्ति तक की कार्रवाई की जा सकती है। सरकार का कहना है कि निजी प्रैक्टिस और सरकारी जिम्मेदारियों के बीच स्पष्ट सीमा बनाए रखना जरूरी है। मरीजों की सेवाओं और मेडिकल कॉलेजों के कामकाज में किसी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
निजी अस्पताल भेजने पर भी नजर
सरकारी मेडिकल कॉलेजों से मरीजों को निजी अस्पतालों या निजी क्लीनिकों की ओर भेजे जाने की प्रवृत्ति पर भी सरकार ने गंभीरता दिखाई है। बैठक में इस पर रोक लगाने पर जोर दिया गया। सरकार चाहती है कि मेडिकल कॉलेजों में उपलब्ध विशेषज्ञ डॉक्टरों, संसाधनों और सुविधाओं का अधिकतम उपयोग सरकारी व्यवस्था के भीतर ही मरीजों के इलाज के लिए किया जाए।
 जर्जर स्कूलों और बेरोजगारी से जूझ रहे युवा, भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी
कांग्रेस  प्रदेश  अध्यक्ष ने शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
भोपाल।  प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मध्यप्रदेश की शिक्षा व्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, बेरोजगारी और आगामी 19 सितंबर को इंदौर में होने वाले छात्रों की गूंज कार्यक्रम को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों के कारण प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था लगातार कमजोर हुई है और युवाओं का भर्ती परीक्षाओं से भरोसा उठता जा रहा है।
पटवारी ने कहा कि प्रदेश के अनेक स्कूल जर्जर हालत में हैं, शिक्षकों की कमी बनी हुई है और शिक्षा लगातार महंगी होती जा रही है। उन्होंने कहा कि शिक्षा किसी विचारधारा की प्रयोगशाला नहीं, बल्कि ज्ञान, तर्क, शोध और वैज्ञानिक सोच का केंद्र होनी चाहिए। उच्च शिक्षा संस्थानों में वैचारिक हस्तक्षेप बढ़ने को उन्होंने गंभीर चिंता का विषय बताया। उनका आरोप था कि इतिहास और पाठ्यक्रमों को वैचारिक नजरिये से प्रभावित करने के बजाय शिक्षा नीति की स्वतंत्र, निष्पक्ष और वैज्ञानिक समीक्षा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि 2026-27 के प्रदेश बजट में शिक्षा, खेल, कला एवं संस्कृति के लिए 52,917 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जबकि 2025-26 के संशोधित अनुमान में यह राशि 46,844 करोड़ रुपये थी। पटवारी ने कहा कि बजट बढ़ने के दावों से ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि उसका वास्तविक लाभ विद्यार्थियों और शिक्षकों तक कितना पहुंच रहा है।
एक दर्जन से अधिक परीक्षाओं में अनियमितता
प्रतियोगी परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए उन्होंने व्यापम/एमपीईएसबी, पुलिस आरक्षक भर्ती और नर्सिंग भर्ती समेत विभिन्न परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों का उल्लेख किया। पटवारी के अनुसार, 2020 से जून 2026 के बीच आयोजित परीक्षाओं में एक दर्जन से अधिक परीक्षाएं कथित अनियमितताओं और फर्जीवाड़े से जुड़े पुलिस मामलों की जद में आईं, जबकि तीन भर्ती परीक्षाएं रद्द भी हुईं। उन्होंने दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की।
रोजगार के सवालों पर जवाब दे सरकार
बेरोजगारी के मुद्दे पर पटवारी ने कहा कि सरकारी आंकड़ों में करीब 30 लाख युवा बेरोजगार बताए जाते हैं। उनका आरोप है कि रोजगार की तलाश में बड़ी संख्या में युवा गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान और दिल्ली सहित अन्य राज्यों का रुख कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को उत्सव और प्रचार से पहले रोजगार के सवालों का जवाब देना चाहिए।
छात्रों से एक घंटे संवाद करेंगे राहुल गांधी
इंदौर में 19 सितंबर को प्रस्तावित छात्रों की गूंज कार्यक्रम पर उन्होंने कहा कि प्रशासनिक स्तर पर 10 लाख रुपए की राशि की मांग की गई है। पटवारी ने कहा कि कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षा, रोजगार, भर्ती परीक्षाओं और युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर संवाद करना है। उनके अनुसार राहुल गांधी करीब एक घंटे तक विद्यार्थियों और युवाओं से संवाद करेंगे।
ओवैसी के के कार्यक्रम का विरोध, जताई शांति व्यवस्था बिगड़ने की आशंका
मुस्लिम त्योहार कमेटी ने सौंपा ज्ञापन
भोपाल।  राजधानी भोपाल में आगामी 15 सितंबर को प्रस्तावित ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के प्रमुख व सांसद असदुद्दीन ओवैसी के कार्यक्रम को लेकर सियासी व सामाजिक हलचल तेज हो गई है। मध्य प्रदेश मुस्लिम त्योहार कमेटी ने शहर की गंगा-जमुनी तहजीब और शांति-व्यवस्था का हवाला देते हुए पुलिस और प्रशासन से इस कार्यक्रम की अनुमति तुरंत रद्द करने की मांग की है। इस संबंध में कमेटी ने प्रशासनिक अधिकारियों को एक ज्ञापन सौंपा है।
ज्ञापन में कमेटी ने आशंका जताई है कि आयोजन के दौरान दिए जाने वाले संभावित भाषणों से धार्मिक भावनाएं आहत हो सकती हैं, जिससे शहर की फिजा खराब होने का खतरा है। विवाद की एक बड़ी वजह कार्यक्रम का स्थान भी है। ओवैसी का यह आयोजन सेंट्रल लाइब्रेरी परिसर में प्रस्तावित है। कमेटी का तर्क है कि गणेशोत्सव के इस पवित्र समय में इस परिसर में कई धार्मिक व सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं, ऐसे में किसी भी संवेदनशील आयोजन से शहर का सौहार्द प्रभावित हो सकता है।
कनून-व्यवस्था बिगड़ने की जताई आषंका
प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए मुस्लिम त्योहार कमेटी ने तेलंगाना के विधायक टी. राजा सिंह के हालिया मामले की याद दिलाई। कमेटी के प्रतिनिधियों ने कहा कि जब कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका के आधार पर टी. राजा सिंह के कार्यक्रम को अनुमति नहीं दी गई थी, तो ठीक उसी नीति को अपनाते हुए ओवैसी के कार्यक्रम की अनुमति भी निरस्त की जानी चाहिए। अब देखना यह होगा कि 15 सितंबर के इस प्रस्तावित आयोजन को लेकर पुलिस प्रशासन क्या रुख अपनाता है और इस पर क्या अंतिम फैसला लेता है।
 

  
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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