राजस्थान नगर निकाय चुनाव: शहरी क्षेत्रों में कौन आगे, भाजपा के मुकाबले कांग्रेस कहां, आप ने कहां बनाया दबदबा?

स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Mon, 14 Sep 2026 08:33 PM IST

राजस्थान नगर निकाय चुनाव के नतीजे: 41 जिलों के 309 निकायों में BJP ने 28 और कांग्रेस ने 13 जिलों में बनाई बढ़त। जानें AAP, RLP, माकपा और निर्दलीयों का पूरा वोट गणित।

Rajasthan Nikay Chunav Results BJP Congress AAP ward wise tally explainer
 
राजस्थान नगर निकाय चुनाव। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजस्थान में नगर निकाय चुनाव के नतीजे आने जारी हैं। राज्य के 41 जिलों में 309 नगरीय निकायों में 10 नगर निगम, 47 नगर परिषद और 252 नगरपालिकाएं भी शामिल रहीं। अब तक के नतीजों को देखा जाए तो शुरुआत में पिछड़ने के बाद भाजपा ने स्थानीय स्तर के इन चुनाव नतीजों में जबरदस्त वापसी की और कांग्रेस पर अपनी बढ़त बना ली। हालांकि, असली खेल एक बार फिर निर्दलीय प्रत्याशियों ने किया, जो कि भाजपा-कांग्रेस के बीच अंतर की एक बड़ी वजह भी बने। इतना ही नहीं दो मुख्यधारा की पार्टी- भाजपा-कांग्रेस के बीच राज्य में आम आदमी पार्टी भी कुछ जगह बनाने में सफल हुई है। इतना ही नहीं मार्क्सवादी पार्टी (सीपीएम) और बसपा भी अपना जनाधार बनाए रखने में कामयाब हुईं।
आइये जानते हैं कि राजस्थान में अब तक घोषित हुए निकाय चुनाव के नतीजों में क्या सामने आया है? कौन से जिले में किस राजनीतिक दल ने बढ़त हासिल की? किन नेताओं के गढ़ में क्या नतीजा रहा? छोटे दलों और निर्दलियों के लिए यह चुनाव क्या संदेश दे गया? आइये जानते हैं...

पहले जानें- अब तक नगर निकाय चुनाव के क्या नतीजे?

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राजस्थान नगर निकाय चुनाव। - फोटो : अमर उजाल

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राजस्थान नगर निकाय चुनाव। - फोटो : अमर उजाला

अब जानें- राजस्थान नगर निकाय चुनाव में किस पार्टी का प्रदर्शन कैसा?

1. जिलावार स्तर पर
राजस्थान नगरीय निकाय चुनाव परिणामों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अधिकतर जिलों में स्पष्ट बढ़त बनाते हुए अपना वर्चस्व कायम किया है। 41 जिलों के वार्डवार नतीजों में भाजपा ने 28 जिलों में सबसे ज्यादा वार्ड जीतकर बढ़त बनाई, जबकि कांग्रेस 13 जिलों में आगे रही।

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राजस्थान नगर निकाय चुनाव। - फोटो : अमर उजाला
इस पूरे चुनाव की सबसे बड़ी बात यह ही कि भाजपा ने राजस्थान के प्रमुख शहरी केंद्र माने जाने वाले जयपुर, कोटा, उदयपुर, अजमेर, भीलवाड़ा में कांग्रेस के मुकाबले ज्यादा वार्ड जीते। वहीं, जोधपुर, बीकानेर में भाजपा को कांग्रेस के मुकाबले छोटी, लेकिन अहम वार्डों पर जीत मिली।

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राजस्थान नगर निकाय चुनाव। - फोटो : अमर उजाला
उधर कांग्रेस की बात करें तो उसका प्रदर्शन शेखावटी क्षेत्र में बेहतर रहा। खासकर सीकर और झुंझुनूं में कांग्रेस ने भाजपा पर बड़ी बढ़त हासिल की। 

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राजस्थान नगर निकाय चुनाव। - फोटो : अमर उजाला

छोटे दलों का कैसा रहा प्रदर्शन, किन सीटों पर हासिल की बढ़त?

राजस्थान नगरीय निकाय चुनाव परिणामों में बड़े दलों- भाजपा, कांग्रेस के अलावा क्षेत्रीय और छोटी पार्टियों ने कुछ खास निकायों में ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। 

1. आप: बारां में ऐतिहासिक बहुमत
बारां नगर परिषद में आम आदमी पार्टी (आप) ने बड़ा राजनीतिक उलटफेर करते हुए कुल 60 में से 31 वार्डों पर जीत दर्ज कर स्पष्ट बहुमत हासिल किया। यहां कांग्रेस 18 और भाजपा केवल 9 सीटों पर सिमट गई। इसके अलावा आप ने झालावाड़ जिले की झालरापाटन (5 वार्ड) और पिड़ावा (5 वार्ड) में भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
2. माकपा: नोखा में एकतरफा कब्जा
  • बीकानेर की नोखा नगर पालिका में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने 45 में से 29 वार्ड जीतकर एकतरफा बढ़त बनाई। यहां भाजपा को 13 सीटें मिलीं, जबकि कांग्रेस का खाता भी नहीं खुल सका। 
  • इसके अलावा माकपा ने श्रीडूंगरगढ़, सूरतगढ़, हनुमानगढ़, टिब्बी , सीकर जिले के धोद , लोसल , पलसाना  और उदयपुर नगर निगम में 1-1 वार्ड जीता।

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राजस्थान नगर निकाय चुनाव। - फोटो : अमर उजाला
3. रालोपा: नागौर-मारवाड़ में बढ़त
हनुमान बेनीवाल की राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (रालोपा) ने राज्यभर में 62 वार्डों पर जीत दर्ज की। रालोपा ने नागौर जिले की बासनी नगर पालिका में 13 सीटें, मूंडवा में 7 सीटें, और मेड़ता रोड में 2 सीटें हासिल कीं।
इसके अलावा ब्यावर के रायपुर में 4 सीटें, चूरू के राजलदेसर में 2 सीटें और बीकानेर-जोधपुर नगर निगमों में भी पार्टी ने सीटें जीतीं।
4. बहुजन समाज पार्टी और भारत आदिवासी पार्टी
  • बसपा ने राजस्थान में 19 वार्ड जीते। पूर्वी राजस्थान के धौलपुर जिले (धौलपुर नगर परिषद 3, सैंपऊ 3, बाड़ी 2), दौसा (लवाण 1, महुआ 1), और भिवाड़ी (1) में पार्टी ने जीत दर्ज की।
  • वहीं, बीएपी ने कुल 8 वार्ड कब्जाए। वागड़ अंचल के डूंगरपुर जिले की सागवाड़ा नगर पालिका में 4 सीटें , डूंगरपुर नगर परिषद में 3 सीटें और सलूम्बर में 1 सीट जीती।
5. निर्दलियों का दबदबा
छोटे दलों के अलावा निर्दलीय प्रत्याशियों ने राज्यभर में 2,243 वार्डों पर जीत दर्ज की है। खासकर भरतपुर संभाग के भरतपुर नगर निगम (36 निर्दलीय), नदबई (25), डीग (24) और मकराना (36) में निर्दलियों ने दोनों राष्ट्रीय दलों- भाजपा और कांग्रेस को पीछे छोड़ दिया।

कुछ अहम नतीजे, जिन्होंने सियासी स्तर पर चौंकाया

झालावाड़: साख का संकट
पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के प्रभाव वाले क्षेत्र में परिणाम विभाजित रहे। झालावाड़ नगर परिषद के 25 वार्डों में से 18 जीतकर कांग्रेस ने भाजपा के अभेद्य दुर्ग में सेंध लगा दी। हालांकि, भाजपा ने वसुंधरा की विधानसभा सीट के अंतर्गत आने वाले झालरापाटन नगरपालिका में 11 सीटें जीतकर बहुमत बरकरार रखा। हालांकि, यहां भी 6 कांग्रेस और 3 निर्दलीय उम्मीदवारों की उपस्थिति ने भाजपा की चुनौती बढ़ा दी है।
परबतसर: चयन की विफलता 
वार्ड संख्या 13 का परिणाम राजनीतिक प्रबंधन के लिए एक सबक रहा। भाजपा उम्मीदवार कैलाशचंद्र को मात्र 1 वोट मिला। वे खुद वार्ड 12 के मतदाता थे और उन्हें वार्ड 13 से टिकट दिया गया था। इसके उलट कांग्रेस की हिना खानम ने 376 वोट पाकर बड़ी जीत दर्ज की।

नतीजों का कुल-जमा क्या?

राज्य के बड़े शहरी केंद्रों में मतदाताओं ने किसी भी एक दल को स्पष्ट जनादेश नहीं दिया। यहां विपक्षी गठबंधन के सहयोगियों और निर्दलीयों की कुल ताकत भाजपा की एकल बढ़त के लिए बड़ी चुनौती बनकर उभरी है।  
अजमेर: 80 वार्ड वाले अजमेर में कांग्रेस 37 सीटों के साथ भाजपा (32) और निर्दलीय (11) से आगे है। हालांकि, यहां बोर्ड बनाने के लिए कांग्रेस को निर्दलीयों की मदद लेनी होगी।
भरतपुर: यहां 65 में से 36 वार्डों पर निर्दलियों का कब्जा है यानी कुल वार्डों का 55%। भाजपा (20) और कांग्रेस (7) बिना निर्दलीयों के समर्थन के बोर्ड बनाने की स्थिति में भी नहीं हैं।

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