अतिथि विद्वानों का भोपाल में जोरदार प्रदर्शन: शिवराज का काफिला रोक लगाई गुहार, उच्च शिक्षा मंत्री बंगले पर डाला डेरा

भोपाल में अतिथि विद्वानों ने शिवराज सिंह चौहान के सामने 11 सितंबर 2023 की महापंचायत में किए गए आश्वासन की याद दिलाते हुए फॉलन आउट प्रक्रिया बंद करने क...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: bhupendra Singh RajputPublish Date: Wed, 16 Sep 2026 09:17:26 PM (IST)Updated Date: Wed, 16 Sep 2026
  1. भोपाल में करीब 200 अतिथि विद्वानों ने शिवराज सिंह चौहान का काफिला रोका
  2. उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार के बंगले के सामने प्रदर्शन जारी
  3. आश्वासन की याद दिलाते हुए फॉलन आउट प्रक्रिया बंद करने की मांग

डिजिटल डेस्क, भोपाल। मध्य प्रदेश में नियमितीकरण और स्थायित्व की मांग को लेकर उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार के भोपाल स्थित आवास के बाहर प्रदर्शन कर रहे अतिथि विद्वानों का आंदोलन बुधवार को और तेज हो गया।

मंत्री बंगले के बाहर धरना दे रहे लगभग 200 अतिथि विद्वानों ने वहां से गुजर रहे केंद्रीय कृषि मंत्री एवं पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का काफिला रोक लिया।

शिवराज को याद दिलाई घोषणा

प्रदर्शनकारियों ने चौहान को 11 सितंबर 2023 की महापंचायत में दिए गए आश्वासनों की याद दिलाई। इस पर शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि "एक मुख्यमंत्री की घोषणा दूसरे मुख्यमंत्री को पूरी करनी चाहिए" और भरोसा दिया कि वे उनकी बात सरकार तक पहुंचाएंगे।
 
इससे पहले बुधवार सुबह उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने अतिथि विद्वानों के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। हालांकि, उन्होंने नीति बनने तक फॉलन आउट प्रक्रिया को तत्काल रोकने से इनकार कर दिया, जिससे आंदोलनकारियों में नाराजगी और बढ़ गई है।

वादों और आश्वासनों का दिया हवाला

11 सितंबर 2023 की महापंचायत: तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने घोषणा की थी कि किसी भी अतिथि विद्वान को सेवा से बाहर (फॉलन आउट) नहीं किया जाएगा और खाली पदों पर पुनः समायोजित किया जाएगा।
10 जुलाई 2026 का सम्मेलन: भोपाल के रवींद्र भवन में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और मंत्री इंदर सिंह परमार ने हरियाणा मॉडल से बेहतर नीति बनाने का भरोसा दिया था।
28 अगस्त 2026 (रक्षाबंधन): उज्जैन में मुख्यमंत्री आवास पर अतिथि विद्वान बहनों ने सीएम डॉ. मोहन यादव को रक्षा सूत्र बांधकर नीति बनने तक फॉलन आउट प्रक्रिया रोकने का आग्रह किया था।

अतिथि विद्वानों की दो प्रमुख मांगें

समयबद्ध नीति का निर्धारण: नियमितीकरण और नौकरी के स्थायित्व के लिए एक निश्चित समयावधि तय कर नीति लागू की जाए।
फॉलन आउट पर तत्काल रोक: जब तक स्थायी नीति लागू नहीं होती, तब तक प्रदेश भर के कॉलेजों में फॉलन
आउट प्रक्रिया को पूरी तरह स्थगित रखा जाए।

क्या है 'फॉलन आउट' प्रक्रिया?

शासकीय महाविद्यालयों में जब किसी नियमित सहायक प्राध्यापक की नई नियुक्ति या स्थानांतरण के जरिए पदस्थापना होती है, तो वहां पहले से कार्यरत अतिथि विद्वान को पद से हटा दिया जाता है। इस प्रक्रिया को तकनीकी भाषा में 'फॉलन आउट' कहा जाता है।

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