यूपीआई एमडीआर पर सियासत तेज: राहुल के हमलों पर सिंधिया का पलटवार, बोले- आम लोगों के लिए फ्री रहेगा यूपीआई

एएनआई, नई दिल्ली Published by: अमन तिवारी Updated Wed, 16 Sep 2026 09:50 PM IST

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने यूपीआई एमडीआर के मुद्दे पर राहुल गांधी के आरोपों पर पलटवार किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नए ढांचे से आम उपभोक्ताओं पर किसी तरह का वित्तीय बोझ नहीं आएगा और यह व्यवस्था उनके लिए पूरी तरह मुफ्त रहेगी।

Jyotiraditya Scindia attacks Congress leader Rahul gandhi over UPI tax remarks

ज्योतिरादित्य सिंधिया - फोटो : अमर उजाला

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केंद्रीय संचार और पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बुधवार को यूपीआई मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) के मुद्दे पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला। एक समाचार एजेंसी को दिए इंटरव्यू में सिंधिया ने कहा कि राहुल गांधी को हर जगह 'अमेरिका का भूत' नजर आता है और वे कभी राष्ट्र निर्माण की बात नहीं करते। उन्होंने कहा कि राहुल का ध्यान देश में या विदेश में सिर्फ राष्ट्र को नीचा दिखाने पर रहता है, जबकि देश की जनता नकारात्मक सोच को कोई जगह नहीं देती और भाजपा सरकार सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ रही है।

सिंधिया ने यह पलटवार राहुल गांधी के उन आरोपों पर किया, जिनमें उन्होंने दावा किया था कि सरकार अमेरिकी दबाव में यूपीआई लेन-देन पर शुल्क लगा रही है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने झुकने के बजाय सीधे खड़े होना चाहिए और इस फैसले को वापस लेना चाहिए।

इस पर जवाब देते हुए सिंधिया ने स्पष्ट किया कि आम ग्राहकों पर इसका कोई बोझ नहीं पड़ेगा। ग्राहकों से शुल्क वसूलने की कोई सिफारिश नहीं है और ऐसा करना कानून का उल्लंघन और एक आपराधिक कृत्य माना जाएगा। उन्होंने कहा कि आम लोगों के बीच आपसी लेन-देन (पीयर-टू-पीयर) पूरी तरह मुफ्त रहेगा, चाहे भेजी जाने वाली रकम कितनी भी हो।
सिंधिया ने बताया कि यह शुल्क केवल व्यापारियों पर लागू होगा, वह भी उन व्यापारियों पर जिनका महीने का यूपीआई लेन-देन 1 लाख रुपये से अधिक है। ऐसे व्यापारी कुल संख्या का मात्र 4 प्रतिशत हैं। एनपीसीआई के अनुसार, यह नया नियम 15 अक्टूबर 2026 से लागू होगा।
 
उन्होंने बताया कि 2,000 रुपये तक के लेन-देन पर शुल्क शून्य रहेगा। देश के 360 लाख करोड़ रुपये के कुल यूपीआई लेन-देन में से 96 प्रतिशत लेन-देन 2,000 रुपये से कम के होते हैं। इसका अर्थ यह है कि शुल्क सिर्फ 4 प्रतिशत लेन-देन पर ही लगेगा। 2,000 से 75,000 रुपये के लेन-देन पर 0.4 प्रतिशत शुल्क तय है, जबकि 75,000 रुपये से ऊपर की रकम पर अधिकतम सीमा 300 रुपये रखी गई है। 1 लाख रुपये से कम मासिक कारोबार वाले व्यापारियों पर कोई देनदारी नहीं होगी। वहीं बिजली-पानी बिल, रेल टिकट, बीमा और पेट्रोल-डीजल की खरीद पर व्यापारियों के लिए अधिकतम शुल्क केवल 5 रुपये तय किया गया है।

सिंधिया ने तुलना करते हुए बताया कि क्रेडिट कार्ड पर 1.5 से 2.5 प्रतिशत और डेबिट कार्ड पर 0.9 प्रतिशत खर्च आता है, जबकि यूपीआई पर इसे सिर्फ 0.4 प्रतिशत रखा गया है। उन्होंने कहा कि जिस तरह एक बच्चा पढ़-लिखकर परिवार को सहारा देता है, उसी तरह इस व्यवस्था को भी आत्मनिर्भर बनाने के लिए यह मॉडल लाया गया है। इस राशि से सर्वर और तकनीकी नेटवर्क मजबूत होगा और ग्रामीण व्यापारियों को जोड़ने के लिए सब्सिडी फंड बनेगा। सरकार ने साफ किया है कि एमडीआर कोई सरकारी टैक्स नहीं है और न ही इसे सरकार या एनपीसीआई अपने पास रखती है, बल्कि इसे बैंकों और पेमेंट ऐप कंपनियों के बीच व्यवस्था के संचालन के लिए बांटा जाता है।

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