'जहाजों पर हमले तुरंत रुकने चाहिए': विदेश मंत्री जयशंकर ने यूएन में उठाया मुद्दा; और क्या-क्या कहा?

एएनआई, न्यूयॉर्क। Published by: राकेश कुमार Updated Fri, 25 Sep 2026 08:35 PM IST
 

यूएन में एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र में वाणिज्यिक जहाजों और नाविकों पर हो रहे हमलों को रोकने की मांग की। भारत और लाइबेरिया ने समुद्री सुरक्षा के मुद्दे पर दूसरे देशों और बड़े जहाज मालिकों को साथ लाने की पहल की है। भारत के विदेश मंत्री ने क्या-क्या कहा है? जानिए...

S Jaishankar raises shipping attacks issue at unga Strait of Hormuz

एस जयशंकर, विदेश मंत्री - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में वाणिज्यिक जहाजों और नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि हाल के महीनों में होर्मुज जलडमरूमध्य, लाल सागर और काला सागर में व्यापारिक जहाजों और नाविकों पर कई हमले हुए हैं। ऐसी हिंसा और जानमाल के नुकसान का कोई औचित्य नहीं है। सीधे शब्दों में कहें तो ये हमले बंद होने चाहिए।
भारत और लाइबेरिया ने शुरू की पहल
भारत के विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि भारत दुनिया में नाविकों का एक बड़ा स्रोत देश है, जबकि लाइबेरिया दुनिया की सबसे बड़ी शिपिंग रजिस्ट्री की मेजबानी करता है। दोनों देशों ने जहाजों और नाविकों की सुरक्षा के मुद्दे पर अन्य देशों और बड़े जहाज मालिकों को साथ लाने की पहल की है। यह पहल समुद्री परिवहन और उस पर काम करने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर है।
ओमान की खाड़ी में भारतीय नाविक की मौत
एस जयशंकर ने कहा कि दो दिन पहले एंटीगुआ और बारबुडा के झंडे वाले बल्क कैरियर एमवी केप दाओ पर ओमान की खाड़ी में हमला हुआ। इस घटना में एक भारतीय नाविक की मौत हो गई। इससे करीब दस दिन पहले पनामा के झंडे वाले तेल टैंकर एल गैया को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरते समय निशाना बनाया गया था। इस घटना के बाद एक भारतीय क्रू सदस्य लापता हो गया
काला सागर में भी हुए हमले
विदेश मंत्री ने काला सागर में हुई घटनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि एमवी ओमोर्फी को 18 जुलाई को रूसी क्षेत्रीय जल में निशाना बनाया गया था। इसमें भारतीय चीफ ऑफिसर की मौत हो गई। इसके अगले दिन ओडेसा से निकलने के बाद एमवी गोल्डन लियो पर हमला हुआ, जिसमें चार भारतीय नाविकों की जान चली गई।
नाविकों को सिर्फ हमलों का खतरा नहीं
विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि नाविकों के सामने शारीरिक हमलों के अलावा भी कई मुश्किलें हैं। लंबे समय तक जहाजों पर फंसे रहना, क्रू बदलने में देरी, स्वदेश वापसी में परेशानी और परिवारों से लंबे समय तक दूर रहना उनके लिए बड़ी चुनौतियां हैं। उन्होंने नाविकों पर पड़ने वाले मानसिक तनाव को भी गंभीर चिंता बताया। जयशंकर ने कहा कि हाल की घटनाओं में सिर्फ भारतीय नाविक ही प्रभावित नहीं हुए हैं, बल्कि कई दूसरे देशों के नाविक भी इसकी चपेट में आए हैं।

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