यूएन में भारत की पाकिस्तान को दो टूक: जयशंकर बोले- सीमा पार आतंक में शामिल सरकारों की जवाबदेही तय होनी चाहिए

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: प्रशांत तिवारी Updated Sat, 26 Sep 2026 11:10 PM IST

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने यूएनजीए के 81वें सत्र को संबोधित किया।  अपने संबोधन में उन्होंने स्पष्ट किया कि शांति केवल युद्ध की अनुपस्थिति नहीं, बल्कि स्थिरता, सुरक्षा और स्पष्टता की मौजूदगी भी है।

S. Jaishankar address UN External Affairs Minister says war disrupting supplies attacks on ships unacceptable

विदेश मंत्री - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने शनिवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के 81वें सत्र को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र अपने गठन के नौवें दशक में प्रवेश कर चुका है। इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखना और इसके लिए मिलकर काम करना था। उन्होंने कहा कि सदस्य देशों ने आपसी मित्रता बढ़ाने और विश्व में शांति मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई थी। लेकिन आज भी संघर्ष और टकराव बड़ी चुनौती बने हुए हैं।

युद्ध से विकास प्रभावित हो रहा
जयशंकर ने कहा कि शांति बनाए रखने में असफलता का असर सिर्फ सुरक्षा पर नहीं पड़ रहा, बल्कि इससे प्रगति रुक रही है और विकास भी प्रभावित हो रहा है। आज की वैश्विक दुनिया में किसी एक जगह होने वाले युद्ध का असर पूरी दुनिया पर पड़ता है।
वाणिज्यिक जहाजों पर हमले पूरी तरह अस्वीकार्य
जयशंकर ने यूएनजीए में कहा, 'इस साल हम खाड़ी क्षेत्र में संघर्ष देख रहे हैं। वाणिज्यिक जहाजों पर हमले पूरी तरह अस्वीकार्य हैं। सभी पक्षों को संयम बरतना चाहिए और नागरिकों तथा समुद्री यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाह
युद्ध न होना ही शांति नहीं: जयशंकर
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा, शांति का मतलब सिर्फ युद्ध का न होना नहीं है। अगर दुनिया लगातार खतरों और दबावों का सामना कर रही है, तो हम वास्तव में खतरे के किनारे खड़े हैं। एक और कदम हमें संकट में धकेल सकता है। उन्होंने कहा कि इसलिए स्थिरता, सुरक्षा और स्थिति में स्पष्टता को मजबूत करना जरूरी है। ये शांति के लिए जरूरी माहौल तैयार करने में अहम भूमिका निभाते हैं।
आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस पर जोर
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में आतंकवाद को वैश्विक शांति के लिए लगातार बने हुए खतरे के रूप में रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि यदि आतंकवाद को किसी राज्य का समर्थन प्राप्त हो और उसका उद्देश्य सीमा पार गतिविधियों से जुड़ा हो, तो यह वैश्विक व्यवस्था के लिए सीधी चुनौती है। ऐसे कृत्यों में शामिल सरकारों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए और आतंकवाद के खिलाफ भारत की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति में कोई कमी नहीं आनी चाहिए।

आतंकवाद के वित्तपोषण पर कार्रवाई जरूरी
जयशंकर ने आतंकवाद के वित्तीय पहलुओं पर विशेष ध्यान देने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि आतंकवाद को मिलने वाली वित्तीय सहायता को उजागर करने के साथ-साथ उसे रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की दृढ़ और समन्वित कार्रवाई जरूरी है।

दुनिया को देने के लिए भारत के पास बहुत कुछ
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि भारत के पास दुनिया को देने के लिए बहुत कुछ है। उन्होंने बताया कि भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर बेहतर शासन सुनिश्चित करने के साथ-साथ सामाजिक-आर्थिक लाभ पहुंचाने की रीढ़ बन चुका है। देश में बुनियादी ढांचे का तेजी से विस्तार हो रहा है। कारोबार और जीवन को आसान बनाने की दिशा में सुधार, स्टार्टअप व नवाचार की संस्कृति और विभिन्न क्षेत्रों पर केंद्रित मिशनों ने भारत की आर्थिक प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

 78 देशों में परियोजनाएं चला रहा भारत
डॉ. जयशंकर ने कहा कि भारत अपनी प्रगति के साथ वैश्विक जिम्मेदारियों के प्रति भी सजग है। भारत मानता है कि उसके कई अनुभव और उपलब्धियां अन्य देशों में भी दोहराई जा सकती हैं। ग्लोबल साउथ की गहरी एकजुटता ने भारत को अपने अनुभव और संसाधन साझा करने के लिए हमेशा प्रेरित किया है। इसी भावना के तहत भारत अपने साझेदार देशों की जरूरतों के प्रति अधिक सक्रियता से प्रतिक्रिया दे रहा है। उन्होंने बताया कि 78 देशों में भारत की 600 प्रमुख विकास परियोजनाएं उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं, जिनका दायरा बुनियादी ढांचे और विनिर्माण से लेकर कृषि तक फैला हुआ है।

आत्मरक्षा और युद्ध की समाप्ति का संदेश
विदेश मंत्री ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ भारत अपने आत्मरक्षा के अधिकार का प्रयोग करेगा। साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संदेश को दोहराते हुए कहा कि अंतहीन युद्ध अब समाप्त होना चाहिए और दुनिया को युद्ध के अंत की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों और समुद्री यात्रियों को निशाना बनाए जाने को भी अस्वीकार्य बताया।

समुद्री सुरक्षा के सामने नई चुनौतियां
संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा कि समुद्री क्षेत्र में नई चुनौतियों ने जमीन पर लंबे समय से मौजूद समस्याओं को और बढ़ा दिया है। खाड़ी क्षेत्र के साथ-साथ लाल सागर से लेकर काला सागर तक वाणिज्यिक जहाजों और नाविकों पर हमले हुए हैं। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं में भारतीय नाविकों के साथ-साथ अन्य देशों के लोगों की भी जान गई है, जो पूरी तरह अस्वीकार्य है।

अंतरराष्ट्रीय कानून के पालन पर जोर
डॉ. जयशंकर ने बताया कि भारत ने लाइबेरिया और 23 अन्य साझेदार देशों के साथ ऐसी अनुचित कार्रवाइयों के खिलाफ वैश्विक जनमत तैयार करने की पहल में भाग लिया है। उन्होंने कहा कि जहाजों और नाविकों की सुरक्षा से किसी भी स्थिति में समझौता नहीं होना चाहिए। इस प्रयास में अंतरराष्ट्रीय कानून का पूरी तरह और सख्ती से पालन करना एक महत्वपूर्ण तत्व है।

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