रीवा संभाग के पदाधिकारियों बैठक, विंध्य में खोई जमीन तलाशने की कोशिश
भोपाल। प्रदेश में कांग्रेस ने सरकार की नीतियों के खिलाफ आर-पार की लड़ाई लड़ने का बिगुल फूंक दिया है। राहुल गांधी के हालिया प्रदेश दौरों से मिले नए सियासी उत्साह के बीच पार्टी अब अपने मैदानी कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और जमीनी संघर्ष को तेज करने में जुट गई है। इसी कड़ी में बुधवार को भोपाल स्थित मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्यालय इंदिरा भवन में विंध्य क्षेत्र के रीवा संभाग से जुड़े 6 जिलों की एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें आगामी चुनावी व सांगठनिक रणनीतियों पर गहन मंथन हुआ।
राज्य में हालांकि विधानसभा चुनाव में अभी समय शेष है, लेकिन आगामी नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव को सियासी सेमीफाइनल माना जा रहा है। यही वजह है कि पार्टी इन चुनावों के जरिए प्रदेश में अपना जनाधार और राजनीतिक प्रभाव साबित करना चाहती है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में रीवा, मैहर, मऊगंज, सतना, सीधी और सिंगरौली जिलों के सभी जिलाध्यक्षों, विधानसभा प्रभारियों तथा जिला प्रभारियों ने प्रमुख रूप से भाग लिया। बैठक में पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा एवं प्रदेश महासचिव गौरव रघुवंशी भी मौजूद रहे। नेताओं ने एक स्वर में दावा किया कि पूरी एकजुटता और ऊर्जा के साथ कांग्रेस संगठन को बूथ स्तर तक सशक्त बनाया जाएगा और जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को घेरा जाएगा। उल्लेखनीय है कि विंध्य क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से कांग्रेस का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह, गोविंद नारायण सिंह और पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह जैसे दिग्गजों की कर्मभूमि रहे इस अंचल में पार्टी अपने पुराने जनाधार को दोबारा हासिल करने पर खास ध्यान दे रही है।
राहुल के दौरों ने दी नई ऊर्जा
हाल ही में राहुल गांधी ने इंदौर में छात्रों की गूंज कार्यक्रम में हिस्सा लिया था और बालाघाट में कुपोषण तथा बीमारियों से हुई मौतों के शिकार बच्चों के परिजनों से मुलाकात की थी। राहुल गांधी की इस सक्रियता से पार्टी कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा का संचार हुआ है। कांग्रेस इसी माहौल का लाभ उठाकर बूथ स्तर तक संगठन को धार देने और आगामी स्थानीय निकायों के चुनाव में भाजपा को कड़ी शिकस्त देने की योजना बना चुकी है।
पांच लाख रिक्त पदों पर तुरंत शुरू हो भर्ती: पटवारी
भोपाल। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने बुधवार को एक पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए राज्य की भाजपा सरकार पर रोजगार, भर्ती परीक्षाओं और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को लेकर तीखे हमले किए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार रोजगार देने के स्थान पर केवल खोखली घोषणाएं कर रही है, जबकि प्रदेश में लाखों सरकारी पद खाली पड़े हैं।
पटवारी ने हाल ही में आयोजित युवा वर्ष और यूथ कॉन्क्लेव पर तंज कसते हुए कहा कि बॉलीवुड गायक पर 17 लाख रुपए खर्च कर दिए गए, लेकिन युवाओं के लिए बुनियादी व्यवस्थाएं तक नहीं थीं। उन्होंने कार्यक्रम में पुलिस द्वारा युवाओं के बाल खींचकर बाहर निकाले जाने की घटना की कड़े शब्दों में निंदा की और दोषी पुलिस अधिकारियों को तुरंत निलंबित करने की मांग की। आंकड़ों का हवाला देते हुए पटवारी ने दावा किया कि प्रदेश में स्वीकृत 13-14 लाख पदों के मुकाबले मात्र 7.4 लाख पद ही भरे हैं और 5 लाख से ज्यादा पद रिक्त हैं। मप्र लोक सेवा आयोग में भी 1,500 से अधिक पद खाली हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब पद ही उपलब्ध नहीं हैं, तो साल में दो बार परीक्षा कराने की घोषणा का क्या औचित्य है? पूर्व की परीक्षाओं के परिणाम आने में तीन-तीन साल लगे हैं।
कर्ज और एक लाख नौकरियों का सच
पटवारी ने कहा कि सरकार द्वारा एक लाख नौकरियों की नई घोषणा पुरानी 2.5 लाख और 5 लाख नौकरियों के वादों की तरह ही हवा-हवाई है। रोजगार पोर्टल पर 25 लाख से अधिक बेरोजगार पंजीकृत हैं। इसके अलावा प्रदेश पर कर्ज का बोझ बढ़कर 6.35 लाख करोड़ रुपए पहुंच गया है।
कांग्रेस की सात प्रमुख मांगें
सभी स्वीकृत और रिक्त पदों का ब्योरा सार्वजनिक किया जाए, भर्ती परीक्षाओं का पारदर्शी वार्षिक कैलेंडर जारी हो, पेपर लीक मामलों की स्वतंत्र जांच कराई जाए, लंबित नियुक्तियां शीघ्र पूर्ण की जाएं, 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण के तहत नियुक्तियां दी जाएं, विश्वविद्यालयों में पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया अपनाई जाए, केवल रोजगार मेलों का ढांचा खड़ा करने के बजाय वास्तविक स्थायी नौकरियां दी जाएं।
दिग्विजय निकालेंगे 1800 किमी की ‘सत्य, सनातन, स्वाभिमान यात्रा’
महाकाल से अयोध्या तक पैदल सफर, सनातन, राम मंदिर, चुनाव आयोग और ईवीएम पर उठाएंगे सवाल
भोपाल। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह दशहरा से उज्जैन के महाकाल मंदिर से अयोध्या तक करीब 1800 किलोमीटर की ‘सत्य, सनातन, स्वाभिमान यात्रा’ निकालेंगे। मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश से गुजरने वाली इस यात्रा को उन्होंने गैर-राजनीतिक बताया है। हालांकि, यात्रा के दौरान वे सनातन धर्म, राम मंदिर, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस), नियुक्तियों, मतदाता सूची, चुनाव आयोग और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) जैसे मुद्दों पर सवाल उठाएंगे।
दिग्विजय रोज करीब 15 किलोमीटर पैदल चलेंगे। यात्रा का लगभग आधा हिस्सा मध्यप्रदेश और आधा उत्तरप्रदेश में होगा। दिग्विजय ने कहा कि यात्रा का उद्देश्य अधर्म पर धर्म, असत्य पर सत्य और अन्याय पर न्याय की जीत का संदेश देना है। उन्होंने कहा कि उत्तरप्रदेश में उनकी पार्टी की सरकार नहीं है, इसलिए वहां भी आम लोगों के बीच जाकर यात्रा के उद्देश्यों और विचारों को रखा जाएगा।
मेरा सनातन गांधी का, संघ की विचारधारा से सहमति नहीं
दिग्विजय ने कहा कि वे गांधीवादी विचारधारा में विश्वास करते हैं और आरएसएस की विचारधारा से उनका कभी मेल नहीं रहा। उनके मुताबिक महात्मा गांधी सबसे बड़े सनातनी थे। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म प्राचीन है, जबकि बाद में इसे हिंदू नाम से संबोधित किया जाने लगा। दिग्विजय ने खुद को हिंदू विरोधी बताए जाने पर आपत्ति जताते हुए कहा कि वे सत्य और अहिंसा में विश्वास करते हैं तथा धर्म के राजनीतिक इस्तेमाल के विरोधी हैं। आरएसएस पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्तियों में संघ से जुड़े लोगों के प्रभाव को लेकर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने तंज किया, “जहां पूछो, वहां संघ है, क्या संघ का आदमी खुदा हो गया?
राम मंदिर चंदे का हिसाब सार्वजनिक करने की मांग
दिग्विजय ने राम मंदिर के लिए जुटाए गए चंदे का हिसाब सार्वजनिक करने की मांग भी उठाई। उन्होंने कहा कि धर्म के नाम पर लोगों से चंदा लिया जाता है तो उसका हिसाब भी जनता के सामने होना चाहिए। उनका आरोप है कि चुनाव के समय राम को राजनीतिक मुद्दा बना दिया जाता है, जबकि राम आस्था का विषय हैं और उनका इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए नहीं होना चाहिए। उन्होंने मंदिरों और मठों पर आरएसएस के बढ़ते प्रभाव का भी आरोप लगाया। साथ ही कथा वाचकों और धार्मिक आयोजनों से जुड़े आर्थिक मामलों पर पारदर्शिता की जरूरत बताई।
वृंदावन ग्राम में होगी पशु प्रतियोगिता, गोवर्धन पूजा पर विजेता पशुपालक को मिलेगा इनाम
मुख्यमंत्री ने किया किसानों को रबी सीजन में दिन में 10 घंटे बिजली देने और 30 लाख खेतों में सोलर पंप लगाने का ऐलान
भोपाल। प्रदेश में दुग्ध उत्पादन को नई ऊंचाइयों पर ले जाने और पशुपालकों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ी पहल की है। प्रदेश के गांवों में उन्नत नस्ल के पशुपालन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से श्वृंदावन ग्रामश् योजना के तहत पशु प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। इनमें प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले पशुपालक को 1 लाख रुपये, द्वितीय स्थान के लिए 50 हजार रुपये और तृतीय स्थान के लिए 25 हजार रुपये का नकद पुरस्कार दिया जाएगा। इन पुरस्कारों का वितरण दीपावली के पावन अवसर पर गोवर्धन पूजा के दिन किया जाएगा।
यह घोषणा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को उज्जैन से वर्चुअल माध्यम से रतलाम में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव को संबोधित करते हुए की। कार्यक्रम के दौरान किसानों से संवाद करते हुए मुख्यमंत्री ने कृषि और ऊर्जा क्षेत्र के लिए सरकार के संकल्प को दोहराया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सिंचाई का रकबा बढ़ाने के साथ-साथ किसानों की लागत कम करने के प्रयास जारी हैं। सरकार ने 30 लाख किसानों के खेतों पर सोलर सिस्टम (पंप ऊर्जीकरण) लगाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। इसके साथ ही आगामी रबी सीजन में फसलों की सिंचाई के लिए किसानों को दिन के समय 10 घंटे बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।
सेव, स्वर्ण और उन्नत खेती की पहचान है रतलाम
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रतलाम के किसानों के नवाचारों की सराहना करते हुए कहा कि यहाँ के किसान पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर प्रोसेसिंग, उद्यानिकी और बहुउद्देशीय फसलों को अपना रहे हैं। रतलाम में चंबल के पानी से सिंचाई का विस्तार हो रहा है और नदी जोड़ो अभियान से क्षेत्र की तस्वीर बदलेगी। एक्सप्रेस-वे के निर्माण से स्थानीय उत्पादों के लिए बेहतरीन बाजार व्यवस्था तैयार हुई है। उन्होंने रतलाम की विश्वप्रसिद्ध सेव, अंगूर की उन्नत खेती व उसकी प्रोसेसिंग और स्वर्ण आभूषण व्यवसाय का जिक्र करते हुए रतलाम की मशहूर तेल वाली कचौरी के स्वाद की भी खुले मन से तारीफ की।
देशी बिलोना घी का अमेरिका और श्रीलंका तक निर्यात
संवाद सत्र के दौरान पीएम एफएमई योजना के लाभार्थी किसान दिलीप पाटीदार ने मुख्यमंत्री से अपना अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि सरकार से मिली 30 लाख 10 हजार रुपये की सब्सिडी की मदद से उन्होंने बिलोना पद्धति से शुद्ध देशी घी बनाने का प्लांट लगाया है। पारंपरिक बिलोना पद्धति से तैयार इस घी की शुद्धता और स्वाद के कारण आज इसकी मांग अमेरिका और श्रीलंका तक पहुँच चुकी है। किसान ने इस सहयोग के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का आभार जताया।
आयुष्मान के बकाये भुगतान को लेकर अस्पताल संचालकों ने किया प्रदर्शन
भोपाल। आयुष्मान भारत योजना का बकाया भुगतान न मिलने से नाराज राजधानी भोपाल के निजी अस्पताल संचालकों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। अपनी मांगों को लेकर अस्पतालों ने सड़कों पर एम्बुलेंस रैली निकालकर उग्र प्रदर्शन किया और अस्पताल परिसरों में योजना बंद करने के पोस्टर चिपका दिए।
अस्पताल संचालकों का आरोप है कि राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण द्वारा लंबे समय से क्लेम अटकाए गए हैं, कई दावों को बिना ठोस वजह रिजेक्ट किया जा रहा है और स्वीकृत राशि में भारी कटौती हो रही है। इसके अतिरिक्त एनएबीएच की अनिवार्यता, प्री-ऑथराइजेशन और क्लेम सेटलमेंट की जटिल प्रक्रिया से भी वे बेहद असंतुष्ट हैं। निजी अस्पताल संघ ने सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि 8 अक्टूबर तक उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं निकाला गया, तो वे आयुष्मान योजना का अनिश्चितकालीन बहिष्कार करेंगे। अपनी मांगों को केंद्र सरकार तक पहुँचाने के लिए प्रदेशभर से करीब 1,000 एम्बुलेंसों के काफिले के साथ दिल्ली कूच कर प्रधानमंत्री कार्यालय तक अपनी बात रखने की रणनीति बनाई गई है।
नौरादेही बना चीतों का नया ठिकाना, ‘वियोम’ और ‘मीरा’ को मिला नया घर’
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने छोड़े दो चीते, कहा मध्यप्रदेश की धरती वन्यजीवों के लिए अनुकूल
भोपाल। मध्यप्रदेश के वन्यजीव संरक्षण के इतिहास में बुधवार को एक और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सागर जिले स्थित नौरादेही वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में दो चीतों को छोड़ा। मुख्यमंत्री ने इनका नामकरण ‘वियोम’ और ‘मीरा’ किया। इसके साथ ही उन्होंने वन्य प्राणी संरक्षण सप्ताह के समापन समारोह में ’गिद्ध संख्या आंकलन-2026 रिपोर्ट’ जारी की और बुंदेलखंडी भाषा में तैयार ’वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व’ पुस्तक का विमोचन किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि चीतों की बसाहट के लिए मध्यप्रदेश की धरती बेहद अनुकूल है। नौरादेही प्रदेश में चीतों का तीसरा घर बन रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि चीतों की मौजूदगी से क्षेत्र का ईको-सिस्टम और मजबूत होगा तथा पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वन्यजीवों की चिंता के साथ जंगलों के आसपास रहने वाले ग्रामीणों के हितों का ध्यान रखना भी सरकार का दायित्व है। अभयारण्यों और टाइगर रिजर्व में आने वाले पर्यटकों से होने वाली आय में स्थानीय ग्रामीणों की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष अभयारण्यों से करीब 80 करोड़ रुपये का कलेक्शन हुआ है, जिसमें से 20 करोड़ रुपये आसपास के ग्रामीणों को वितरित किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह ग्रामीणों का हक है, क्योंकि वे वर्षों से अभयारण्यों के आसपास रहकर वन और वन्यजीव संरक्षण की व्यवस्था का हिस्सा रहे हैं। जिन ग्रामीणों को अभी तक इसका लाभ नहीं मिल रहा था, उन्हें भी लाभ दिलाने के लिए सरकार ने निर्णय लिया है।
बफर जोन में होम स्टे, 2-3 लाख तक अनुदान
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ग्रामीणों को आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए होम स्टे की सुविधा को भी बढ़ावा दे रही है। टाइगर रिजर्व के बफर जोन में जिन लोगों के मकान हैं, वे उन्हें होम स्टे के रूप में संचालित कर सकते हैं। इसके लिए सरकार की ओर से 2 से 3 लाख रुपये तक का अनुदान भी दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि नौरादेही की खासियत यह है कि यहां पहले से टाइगर मौजूद हैं और अब चीतों की बसाहट भी हो रही है। करीब 170 साल बाद इस क्षेत्र में चीते फिर दिखाई दे रहे हैं।
2022 में शुरू हुआ था चीता प्रोजेक्ट
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में वर्ष 2022 में मध्यप्रदेश में चीता प्रोजेक्ट की शुरुआत हुई थी। उस समय बाहर से लाए गए चीतों की संख्या आठ थी, जो अब बढ़कर 60 हो गई है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश की धरती मनुष्यों के साथ-साथ वन्यजीवों के लिए भी अनुकूल है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में गिद्धों की संख्या भी तेजी से बढ़ी है और देश में सबसे अधिक टाइगर मध्यप्रदेश में हैं। चंबल नदी में घड़ियाल, नर्मदा में मगरमच्छ और अन्य जल क्षेत्रों में दुर्लभ प्रजातियों के कछुए छोड़े गए हैं। यह प्रदेश में वन्यजीव संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों का परिणाम है।
‘जीयो और जीने दो’ की संस्कृति पर जोर
डॉ. यादव ने कहा कि पहले जंगलों को नुकसान पहुंचा, लेकिन अब समय जीयो और जीने दो की संस्कृति अपनाने का है। जंगल भी आबाद रहें और मनुष्य भी अपनी जीवनशैली के साथ आगे बढ़े। उन्होंने कहा कि चीते सामान्यतः मनुष्यों के साथ संघर्ष नहीं करते और नौरादेही में इनकी मौजूदगी लोगों के लिए रोमांच और पर्यटन का नया अनुभव लेकर आएगी।
राहुल गांधी पर साधा निशाना
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि देश आज आशा भरी निगाहों से भारत की ओर देख रहा है, लेकिन सत्ता से बाहर हुए लोग अपनी राजनीतिक बेचौनी में कुछ भी बोल रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान सभी को सद्बुद्धि दे।
नौरादेही बनेगा चीतों का तीसरा घर
कार्यक्रम के बाद मीडिया से चर्चा में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शुरू हुआ चीता प्रोजेक्ट मध्यप्रदेश के लिए बड़ी उपलब्धि बन चुका है। सरकार ने नौरादेही को चीतों का तीसरा घर बनाने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि एशिया से विलुप्त हो चुकी चीता प्रजाति की पुनर्बसाहट में मध्यप्रदेश एक उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभरा है। चीतों की संख्या आठ से बढ़कर 60 तक पहुंचना इस अभियान की सफलता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि नौरादेही में चीतों और टाइगर की मौजूदगी से ईको-सिस्टम मजबूत होगा और पर्यटन का विकास तेज होगा।