दिल्ली में पुलिस कार्रवाई पर सुको सख्त, जस्टिस बागची बोले- नागरिकों की आजादी का मामला, तह तक जाएंगे

नई दिल्ली. राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में जारी विरोध प्रदर्शनों और पुलिस की सख्त पाबंदियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में विशेष सुनवाई शुरू हो गई है. शीर्ष अदालत की विशेष पीठ के समक्ष सॉलिसिटर जनरल (एसजी) तुषार मेहता दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ पेश हुए, जबकि पूर्व अटॉर्नी जनरल के.के. वेणुगोपाल, वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, गोपाल शंकरनारायणन और मेनका गुरुस्वामी याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत से जुड़े. 

सुनवाई की शुरुआत में जस्टिस बागची ने स्पष्ट किया कि पीठ पहले सॉलिसिटर जनरल का पक्ष सुनेगी और उसके बाद अन्य वकीलों को अपनी बात रखने का मौका दिया जाएगा. साथ ही, उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर दाखिल नई याचिकाओं पर सोमवार को सुनवाई की जाएगी.

नागरिकों के अधिकारों का खुला हनन, दिल्ली में खड़े होने तक की इजाजत नहीं

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े किए. अदालत को बताया गया कि शनिवार को पूरी दिल्ली में आम नागरिकों के खड़े होने तक पर पाबंदी लगा दी गई थी, जो मौलिक अधिकारों का खुला उल्लंघन है. पूर्व अटॉर्नी जनरल के.के. वेणुगोपाल ने इस मामले में पुलिस प्रशासन के खिलाफ अवमानना नोटिस जारी करने की मांग की.

इस पर जस्टिस बागची ने कहा कि अदालत के समक्ष ऐसी ही राहत के लिए पहले से याचिकाएं लंबित हैं. पीठ ने प्रस्ताव रखा कि या तो इसे सोमवार को नए मामले के तौर पर लिस्ट किया जाए या फिर पहले से सूचीबद्ध मामलों के साथ टैग कर दिया जाए. जब वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने रविवार को विशेष सुनवाई के लिए अदालत का आभार व्यक्त किया, तो जस्टिस बागची ने टिप्पणी करते हुए कहा कि धन्यवाद की कोई आवश्यकता नहीं है, न्यायपालिका सदैव देश सेवा के लिए प्रस्तुत है.

निहत्थे युवाओं पर लाठियां और वकीलों से बदसलूकी, पेश किए वीडियो साक्ष्य

वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने पुलिस की ज्यादतियों से जुड़े वीडियो फुटेज और स्क्रीन शॉट्स पेनड्राइव के जरिए अदालत के समक्ष पेश किए. उन्होंने दलील दी कि जंतर-मंतर के दायरे से काफी दूर शांतिपूर्ण लोगों और वकीलों के खिलाफ बल प्रयोग किया गया. कई अधिवक्ताओं को हिरासत में लिया गया और सुप्रीम कोर्ट के बाहर तक धारा 163 लागू कर दी गई. उन्होंने आरोप लगाया कि निहत्थे युवाओं को लातों और डंडों से पीटा गया, जिसे पुलिस अपनी बहादुरी समझ रही है.

वहीं, वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने अदालत को बताया कि जब वे कुछ वकीलों के साथ जा रही थीं, तब पुलिस ने उन्हें घेर लिया और एक महिला पुलिसकर्मी ने उनके साथ बदसलूकी व खींचातानी की. वकीलों ने दावा किया कि दिल्ली बॉर्डर और गुरुग्राम समेत कई इलाकों से 6 से 7 हजार लोगों को गैरकानूनी तरीके से हिरासत में लिया गया है.

लोगों के जीवन और स्वतंत्रता से जुड़ा मुद्दा, तह तक जाएगी अदालत- जस्टिस बागची

याचिकाकर्ताओं की दलीलें सुनने के बाद जस्टिस बागची ने मामले की संवेदनशीलता को स्वीकार करते हुए सख्त टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि पुलिस अधिकारियों को व्यक्तिगत तौर पर कानून-व्यवस्था तय करने का अधिकार नहीं होता, जब तक कि राज्य प्रशासन द्वारा विधिवत निर्णय न लिया गया हो. पीठ ने सभी अधिवक्ताओं को आश्वस्त करते हुए कहा कि वे बिल्कुल चिंता न करें, क्योंकि यह नागरिकों के जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़ा अत्यंत गंभीर मुद्दा है. अदालत इस पूरे मामले की तह तक जाएगी और दोनों पक्षों को विस्तार से सुनने के बाद ही उचित आदेश पारित करेगी.


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