UP: पंचायत चुनाव पर हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जा सकती है सरकार, संभव नहीं है तीन माह में चुनाव

अजीत बिसारिया, अमर उजाला लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Wed, 14 Oct 2026 09:43 PM IST

Panchayat elections in UP: यूपी में पंचायत चुनाव विधानसभा चुनाव के बाद ही होंगे। इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट जा सकती है। 

UP: Government may approach Supreme Court against High Court's decision on Panchayat elections, elections not

यूपी पंचायत चुनाव। - फोटो : अमर उजाला।

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प्रदेश में तीन माह में पंचायत चुनाव करा पाना आसान नहीं है। जातीय जनगणना, परीक्षाएं और विधानसभा चुनाव इन्हीं 3-4 महीनों में होने हैं। उच्चपदस्थ सूत्रों की मानें तो इन परिस्थितियों में हाईकोर्ट के तीन माह में पंचायत चुनाव कराने के आदेश के खिलाफ प्रदेश सरकार सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी। हालांकि, पंचायतीराज मंत्री ओमप्रकाश राजभर का कहना है कि हाईकोर्ट के आदेश के अध्ययन के बाद अगले कदम के बारे में निर्णय लेंगे

विगत 25 मई को ग्राम प्रधानों का कार्यकाल खत्म होने के बाद उन्हें प्रशासक बनाया गया था। उसके बाद जुलाई में ब्लॉक प्रमुख व जिला पंचायत अध्यक्षों को भी कार्यकाल पूरा होने के बाद प्रशासक बना दिया गया। वहीं, राज्य निर्वाचन आयोग पंचायत चुनाव की मतदाता सूची 10 जून को जारी कर चुका है। आयोग का अपनी तैयारियां पूरी होने का दावा है
प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) का आरक्षण तय करने के लिए राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन 20 मई को किया गया था। इसका छह महीने का कार्यकाल 20 नवंबर को पूरा होगा। फिलहाल पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट का इंतजार है, जो अभी तक 75 में से 42 जिलों में सर्वे और भ्रमण का काम पूरा कर पाया है।
उत्तर प्रदेश में जनगणना का दूसरा चरण 1 दिसंबर 2026 से 4 जनवरी के बीच चलेगा, जिसमें पूरी प्रशासनिक मशीनरी व्यस्त रहेगी। जनवरी के पहले सप्ताह में ही विधानसभा चुनाव के लिए अधिसूचना जारी होने की संभावना है। ऐसे में न सरकार के लिए चुनाव करा पाना आसान होगा और न ही विपक्ष चाहेगा कि उसकी ऊर्जा, समय व संसाधन दो जगह बंटें। समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग से जुड़े सूत्र भी बताते हैं कि इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील किए जाने की पूरी संभावना है।

क्या कहा था इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार को ग्राम पंचायत चुनाव मामले में एक अहम फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार को तीन महीने के भीतर चुनाव कराने का निर्देश दिया है। कोर्ट के आदेश के अनुसार, जब तक नए चुनाव संपन्न नहीं हो जाते, तब तक सभी निवर्तमान ग्राम प्रधान प्रशासक के रूप में अपने पदों पर कार्य करते रहेंगे। यह फैसला न्यायमूर्ति जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस गरिमा प्रसाद की डिवीजन बेंच ने शाम 4:00 बजे खुली अदालत में सुनाया। यह याचिका प्रयागराज के इम्तियाज हुसैन और अन्य द्वारा समय पर चुनाव कराने की मांग को लेकर दायर की गई थी।

पंचायत चुनाव पर न्यायालय के निर्णय का पूरा सम्मान: ओपी राजभर

पंचायत चुनाव को लेकर न्यायालय के निर्णय पर प्रदेश के पंचायतीराज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि न्यायपालिका के प्रति सरकार का पूरा सम्मान और विश्वास है। न्यायालय के निर्णय का सम्मान करना हम सभी का दायित्व है। हालांकि, अभी उन्होंने न्यायालय का आदेश पढ़ा नहीं है। ऐसे में आदेश का अध्ययन किए बिना इस पर कोई टिप्पणी करना उचित नहीं होगा।
 
राजभर ने कहा कि पंचायत चुनाव एक महत्वपूर्ण विषय है। इससे जुड़े सभी पहलुओं पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। पहले न्यायालय के आदेश का विस्तार से अध्ययन किया जाएगा और उसमें दिए गए निर्देशों को समझा जाएगा। इसके बाद ही आगे की प्रक्रिया को लेकर विचार होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस विषय में जल्दबाजी में कोई निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है। न्यायालय के आदेश और संवैधानिक प्रावधानों का पूरा सम्मान करते हुए ही आगे की दिशा तय की जाएगी।

33 जिलों का दौरा अभी बाकी : आयोग

समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष राम औतार सिंह ने कहा कि हम 42 जिलों का दौरा पूरा कर चुके हैं। हाईकोर्ट के आदेश की कॉपी के अध्ययन के बाद आगे का निर्णय लेंगे। रिपोर्ट जल्दी देने के लिए कहा जाएगा तो पूरा आयोग एक साथ जाने के बजाय उसके सदस्य 2-3 टीमें बनाकर शेष जिलों का अलग-अलग दौरा पूरा करेंगे।

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