नई दिल्ली. देशव्यापी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम काटे जाने के विवाद में सुप्रीम कोर्ट से विपक्षी इँडिया गठबंधन को बड़ी कानूनी राहत मिली है. शीर्ष अदालत ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और विपक्ष के शीर्ष नेताओं की संयुक्त याचिका पर संज्ञान लेते हुए भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) को औपचारिक नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है. इस याचिका में चुनाव आयोग द्वारा चलाई जा रही एसआईआर प्रक्रिया की निष्पक्षता, कानूनी वैधता और बिना उचित सुनवाई के वोटरों के नाम हटाए जाने को सीधे चुनौती दी गई है.
राहुल, खरगे और अखिलेश समेत विपक्ष के शीर्ष दिग्गज बने सह-याचिकाकर्ता
सुप्रीम कोर्ट में दायर इस संयुक्त याचिका में विपक्ष की मजबूत एकजुटता देखने को मिली है. याचिकाकर्ताओं में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के अलावा कांग्रेस अध्यक्ष व राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, तृणमूल कांग्रेस सांसद सौगत रॉय, राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव, राकांपा (एसपी) की नेता सुप्रिया सुले, शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत और भाकपा महासचिव डी. राजा सहित अन्य प्रमुख विपक्षी नेता शामिल हैं.
एसआईआर प्रक्रिया और वोटर्स के नाम काटे जाने पर उठाए गंभीर सवाल
विपक्षी दलों ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि देश के कई राज्यों में चुनाव आयोग द्वारा चलाए जा रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) के दौरान कानूनी प्रावधानों और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों की अनदेखी की जा रही है. याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि किसी भी वैध नागरिक का नाम बिना लिखित नोटिस दिए और बिना उसकी बात सुने मतदाता सूची से नहीं हटाया जाना चाहिए. इसके साथ ही उन्होंने मांग की है कि आयोग हटाए गए नामों की बूथ-वार सूची और उसके ठोस कारण सार्वजनिक करे. विपक्ष ने ईआरओ-नेट और ईसीआई-नेट जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के डेटाबेस की स्वतंत्र ऑडिट कराने तथा फॉर्म-6 में किए गए बदलावों की संवैधानिक समीक्षा करने की भी गुहार लगाई है.