भोपाल। कोरोना महामारी के कठिन दौर में अपनी जान जोखिम में डालकर जनता की सेवा करने वाले मध्य प्रदेश के लगभग 4,000 आयुष चिकित्सक और स्वास्थ्यकर्मी अब अपने रोजगार के लिए सड़क पर उतर आए हैं। राजधानी भोपाल के नीलम पार्क में मध्य प्रदेश कोविड-19 आयुष चिकित्सक संघ के बैनर तले कोरोना योद्धाओं का अनिश्चितकालीन धरना गुरुवार को लगातार 11वें दिन भी जारी रहा।
सरकार तक अपनी मांग पहुंचाने के लिए इस बार प्रदर्शनकारियों ने अनोखा तरीका अपनायाकृजहां पुरुष कोरोना योद्धाओं ने अर्धनग्न होकर विरोध जताया, वहीं महिला स्वास्थ्यकर्मियों ने पीपीई किट पहनकर सरकार से दोबारा नौकरी पर रखने की भावनात्मक अपील की। संघ के प्रदेश संयोजक डॉ. अंकित असाटी ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश, हरियाणा, बिहार और महाराष्ट्र जैसे राज्यों ने महामारी के दौरान सेवाएं देने वाले स्वास्थ्यकर्मियों के पुनर्नियोजन के प्रयास किए हैं, लेकिन मध्य प्रदेश में इन अनुभवी कर्मियों को बेरोजगार छोड़ दिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक तरफ सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के दावे करती है, वहीं दूसरी तरफ बजट का हवाला देकर हजारों परिवारों को आर्थिक संकट में धकेल रही है। डॉ. असाटी ने दो टूक शब्दों में कहा कि कोरोना योद्धाओं का सम्मान केवल जुबानी जमा-खर्च से नहीं, बल्कि उन्हें पुनः सेवा में बहाल करके किया जाना चाहिए। जब तक सरकार पुनर्बहाली को लेकर कोई ठोस निर्णय नहीं लेती, तब तक यह आंदोलन और अधिक तेज किया जाएगा।
आउटसोर्स और ठेका कर्मचारियों को मिलेगा बोनस
श्रम विभाग ने दिए सख्त निर्देश
भोपाल। प्रदेश के सरकारी विभागों, निगम-मंडलों, बोर्डों और स्थानीय निकायों में कार्यरत करीब 8 लाख आउटसोर्स और ठेका कर्मचारियों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। श्रम विभाग ने इन सभी कर्मचारियों को अनिवार्य रूप से नियमित बोनस का भुगतान करने के कड़े निर्देश जारी किए हैं। नियमों का उल्लंघन करने वाली एजेंसियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
श्रम विभाग की विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी पी. जैसमीन अली सितारा ने इस संबंध में श्रमायुक्त को आधिकारिक पत्र भेजा है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि सरकारी संस्थानों में सेवाएं दे रहे इन कर्मचारियों को बोनस का पूरा लाभ दिलाया जाए तथा इस पर की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट तुरंत विभाग को सौंपी जाए। इस नए और कड़े आदेश के दायरे में प्रदेशभर में सक्रिय लगभग 5 हजार प्लेसमेंट और ठेका एजेंसियां आ जाएंगी। जानकारों के अनुसार, बोनस भुगतान का यह नियम पहले से ही अस्तित्व में था, किंतु मैदानी स्तर पर इसका कड़ाई से पालन नहीं हो रहा था। इसे अमलीजामा पहनाने के लिए विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने लंबे समय तक विरोध प्रदर्शन और आंदोलन किए थे, जिसके बाद अब जाकर इन कर्मचारियों को उनका हक मिलने की उम्मीद जगी है।
इज्तिमें के दौरान नागरिक सुविधाओं, सुरक्षा व्यवस्था पर जोर
भोपाल। राजधानी भोपाल में प्रतिवर्ष आयोजित होने वाला विश्व प्रसिद्ध इज्तिमा इस वर्ष आगामी 4 दिसंबर से 7 दिसंबर तक ईटखेड़ी में भव्य रूप से आयोजित किया जाएगा। इस आयोजन को सुचारू, सुरक्षित और सफल बनाने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह सक्रिय हो गया है। संभागायुक्त कर्मवीर शर्मा ने बैठक में इज्तिमा के दौरान आने वाली जमातों के लिए नागरिक सुविधाओं, सुरक्षा व्यवस्था और अन्य आवश्यक प्रबंधों पर विस्तार से चर्चा की गई और संबंधित अधिकारियों को सख्त दिशा-निर्देश दिए गए।
संभागायुक्त शर्मा ने सभी संबंधित विभागों को ताकीद किया कि वे अपने-अपने सभी कार्य निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरे करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि इज्तिमा स्थल पर आने वाली जमातों की सुरक्षा और उन्हें बेहतरीन सुविधाएं उपलब्ध कराना प्रशासन की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। आईजी चौहान ने सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद रखने के निर्देश देते हुए कहा कि स्थल पर पर्याप्त संख्या में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं, भीड़ नियंत्रण के पुख्ता इंतजाम हों और ट्रैफिक पुलिस द्वारा ऐसा सुचारू यातायात प्रबंधन सुनिश्चित किया जाए जिससे आने-जाने वालों को किसी भी प्रकार की असुविधा न उठानी पड़े।
प्रशासन और इज्तिमा समिति के बीच बेहतर समन्वय पर जोर देते हुए अधिकारियों को स्थल का भौतिक निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए। सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए इलेक्ट्रिकल इंस्टॉलेशन की कार्य-पूर्व और पश्चात अनिवार्य जांच करने को कहा गया है। वालंटियर्स की सूची तैयार कर उन्हें सभी व्यवस्थाओं से अवगत कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।
जबलपुर-इंदौर इकोनॉमिक कॉरिडोर के लिए बनेगी सरकारी कंपनी
कैबिनेट के बड़े फैसले, सोयाबीन किसानों के पंजीयन की अंतिम तारीख 17 अक्टूबर, सिंचाई परियोजनाओं के लिए 3076 करोड़ मंजूर
भोपाल। मध्यप्रदेश में औद्योगिक निवेश को गति देने, किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के लिए राज्य सरकार ने कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में जबलपुर-इंदौर इकोनॉमिक कॉरिडोर डेवलपमेंट कंपनी के गठन, खरीफ 2026 में सोयाबीन उत्पादकों के लिए भावांतर भुगतान योजना लागू करने तथा सिंचाई और शिक्षा संबंधी योजनाओं को जारी रखने की मंजूरी दी गई। इसके साथ ही चार नवगठित जिलों में महिला एवं बाल विकास विभाग के कार्यालयों के लिए पदों के सृजन और प्रतिस्थापन को भी स्वीकृति प्रदान की गई।
मंत्रिमंडल की बैठक में प्रदेश में औद्योगिक निवेश और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए जबलपुर-इंदौर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर तथा चयनित औद्योगिक एवं आर्थिक हबों के समेकित विकास के लिए पूर्णतः शासकीय स्वामित्व वाली विशेष प्रयोजन कंपनी (एसपीवी) ‘जबलपुर-इंदौर इकोनॉमिक कॉरिडोर डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड’ गठित की जाएगी। कंपनी पर मध्यप्रदेश शासन का पूर्ण स्वामित्व और नियंत्रण रहेगा। इसके सुदृढ़ वित्तीय आधार के लिए राज्य सरकार 100 करोड़ रुपये की प्रारंभिक चुकता पूंजी उपलब्ध कराएगी। कंपनी के प्रभावी संचालन और नीतिगत निर्णयों के लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय गवर्निंग काउंसिल गठित की जाएगी। वहीं, मुख्यमंत्री द्वारा नामित एवं नियुक्त उपाध्यक्ष की अध्यक्षता में कार्यकारी निकाय कंपनी के कामकाज का संचालन करेगा।
औद्योगिक पार्कों और आर्थिक हबों का होगा विकास
कंपनी को भूमि की पहचान, प्रबंधन, भू-अर्जन, विकास, जोनिंग, मास्टर प्लानिंग, ले-आउट तैयार करने, भू-आवंटन, लीज और सब-लीज, भूमि के मौद्रीकरण तथा बुनियादी एवं सामाजिक अधोसंरचना विकसित करने की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। आवश्यकता के अनुसार राज्य शासन की भूमि सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी से रियायती दरों अथवा निर्धारित शर्तों पर उपलब्ध कराई जा सकेगी। कंपनी के माध्यम से औद्योगिक पार्कों के साथ फूड पार्क, एग्री-प्रोसेसिंग पार्क, लॉजिस्टिक्स पार्क, टेक्नोलॉजी एवं आईटी पार्क और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर विकसित किए जाएंगे। इनके साथ आवासीय सुविधाओं तथा सामाजिक बुनियादी ढांचे से जुड़ी परियोजनाएं भी विकसित की जा सकेंगी। परियोजनाओं के क्रियान्वयन के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी), इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एवं कंस्ट्रक्शन (ईपीसी), कन्सेशन, लीज, संयुक्त उपक्रम और डेवलपमेंट एग्रीमेंट जैसे मॉडल अपनाए जा सकेंगे।
सोयाबीन किसानों के लिए भावांतर भुगतान योजना मंजूर
मंत्रिमंडल ने खरीफ वर्ष 2026 में सोयाबीन उत्पादक किसानों को उचित मूल्य दिलाने के लिए भावांतर भुगतान योजना लागू करने की मंजूरी दी है। योजना का लाभ लेने के लिए सोयाबीन उत्पादक किसानों को खाद्य विभाग के ई-उपार्जन पोर्टल पर 17 अक्टूबर तक पंजीयन कराना अनिवार्य होगा। अधिसूचित मंडियों में सोयाबीन की बिक्री की अवधि 22 अक्टूबर 2026 से 15 जनवरी 2027 तक निर्धारित की गई है। आवश्यकता पड़ने पर इस अवधि में संशोधन किया जा सकेगा।
चार जिलों में महिला एवं बाल विकास विभाग को मिलेंगे नए पद
नवगठित निवाड़ी, मऊगंज, पांढुर्णा और मैहर जिलों में महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी कार्यालयों के लिए 24 नवीन पदों के सृजन तथा प्रतिस्थापन के माध्यम से 12 पदों की स्वीकृति दी गई है। इसके अलावा समेकित बाल संरक्षण योजना और सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0 के अंतर्गत केंद्र सरकार की स्वीकृति के अनुसार आउटसोर्स आधार पर मानव संसाधन उपलब्ध कराने को भी मंजूरी दी गई।
सिंचाई परियोजनाओं के लिए 3076.37 करोड़
बुरहानपुर, रायसेन, मंदसौर और सिंगरौली की सिंचाई परियोजनाओं को निरंतर संचालित करने के लिए कुल 3076.37 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है। इसके अंतर्गत बुरहानपुर जिले की झिरमिटी मध्यम सिंचाई परियोजना के वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक निरंतर संचालन के लिए 922 करोड़ 91 लाख रुपये मंजूर किए गए हैं। इस परियोजना से जिले की खकनार तहसील के 42 गांवों की लगभग 17,700 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा मिलेगी।
स्कूलों और छात्रावासों के विकास के लिए 2875.20 करोड़
प्रदेश के शासकीय स्कूलों, छात्रावासों, पुस्तकालयों और आवासीय खेलकूद भवनों के निर्माण एवं विस्तार से संबंधित योजना को वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक जारी रखने के लिए 2875.20 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। प्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग के अधीन कुल 7122 हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी स्कूल संचालित हैं। इस निर्णय से इन संस्थानों के लिए निर्माण एवं विस्तार संबंधी कार्यों को निरंतरता देने का मार्ग प्रशस्त होगा।
दोहरे हत्याकांड में दोषी पूर्व एएसआई को दोहरी उम्रकैद
पत्नी पर 16 और साली पर किए थे 56 वार, अदालत ने दी कड़ी सजा
भोपाल। राजधानी के ऐशबाग थाना क्षेत्र में हुए सनसनीखेज दोहरे हत्याकांड में विशेष न्यायाधीश सुचिता श्रीवास्तव की अदालत ने ऐतिहासिक और कड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने आरोपी पूर्व सहायक उप निरीक्षक (एएसआई) योगेश मरावी को दोषी करार देते हुए दोहरी आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा से दंडित किया है। इसके अलावा, आर्म्स एक्ट के तहत तीन साल के अतिरिक्त कारावास की सजा भी सुनाई गई है। लोक अभियोजन अधिकारी सुधा श्रीवास्तव ने इस महत्वपूर्ण फैसले की पुष्टि की है।
यह खौफनाक वारदात 3 दिसंबर 2024 की है। मूल रूप से मंडला जिले में एएसआई के पद पर पदस्थ आरोपी योगेश मरावी ने भोपाल के ऐशबाग स्थित एक फ्लैट में अपनी पत्नी विनीता मरावी और साली मेघा उइके पर बेरहमी से चाकू से ताबड़तोड़ हमले किए थे। जांच में सनसनीखेज खुलासा हुआ था कि आरोपी ने अपनी साली मेघा पर 56 और पत्नी विनीता पर 16 वार किए थे, जिससे दोनों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई थी।
करियर की उड़ान रोकना बना मौत की वजह
मृतक मेघा उइके अपनी पढ़ाई को लेकर बेहद गंभीर थीं और भविष्य में एक ऊंचा मुकाम हासिल करना चाहती थीं। उन्होंने हाल ही में सब इंस्पेक्टर (एसआई) भर्ती परीक्षा का लिखित चरण भी सफलतापूर्वक पास कर लिया था। प्रारंभिक जांच और गवाहों के बयानों के अनुसार, मेघा की बढ़ती सफलता और करियर को लेकर आरोपी योगेश मरावी के मन में विवाद चल रहा था, जो इस भीषण हत्याकांड की मुख्य वजह बना। मूल रूप से बैहर की रहने वाली मेघा ने जबलपुर के एमएच कॉलेज से शिक्षा प्राप्त की थी।
मंडला से दबोचा था कातिल को
वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी योगेश मरावी मौके से फरार हो गया था। भोपाल पुलिस की तीन विशेष टीमें उसकी सरगर्मी से तलाश कर रही थीं। तकनीकी जांच और सीसीटीवी फुटेज खंगालने पर पता चला कि आरोपी एक कार से ड्राइवर को लेकर भोपाल आया था। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए वाहन और आरोपी की तस्वीरें सभी जिलों में प्रसारित कीं। इसके आधार पर मंडला जिले के नैनपुर थाना क्षेत्र के पिंडरई चौकी पर पुलिस ने नाकाबंदी कर कार को रुकवाया और आरोपी योगेश मरावी तथा उसके ड्राइवर को धर दबोचा।
प्रदेश में बिजली संकट, मांग और उपलब्धता में बढ़ा अंतर
अल्पवृष्टि और कोयले की कमी ने बढ़ाई मुश्किलें, मंत्री बोले एक्सचेंज में भी नहीं मिल रही पर्याप्त बिजली
भोपाल। प्रदेश में बिजली की मांग और उपलब्धता के बीच भारी अंतर के चलते विद्युत आपूर्ति व्यवस्था पर गंभीर दबाव बन गया है। राज्य में वर्तमान बिजली की मांग लगभग 15 से 17 हजार मेगावाट तक पहुंच चुकी है, जबकि उत्पादन मात्र 12 से 13 हजार मेगावाट के आसपास सिमट गया है। इस वजह से रोजाना 2 से 3 हजार मेगावाट बिजली की अतिरिक्त कमी का सामना करना पड़ रहा है, जिससे कई क्षेत्रों में आपूर्ति प्रभावित होने लगी है।
ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर के अनुसार, इस वर्ष कुछ क्षेत्रों में अल्पवृष्टि होने, धान की सिंचाई और खेतों में पलेवा के कारण बिजली की मांग में अचानक अभूतपूर्व तेजी आई है। पिछले साल 14 अक्टूबर 2025 को राज्य की अधिकतम मांग 11,874 मेगावाट थी, जो इस वर्ष बढ़कर 17,124 मेगावाट हो गई है। यानी केवल एक साल में मांग में लगभग 5,000 मेगावाट की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। खासतौर पर कृषि क्षेत्र में बिजली की मांग पिछले साल के 1,752 मेगावाट (1 अक्टूबर 2025) से दोगुनी होकर इस वर्ष 1 अक्टूबर 2026 को 3,701 मेगावाट पर पहुंच गई है।
जल विद्युत और ताप विद्युत उत्पादन में गिरावट
ऊर्जा विभाग के मुताबिक, इस साल बारिश की कमी के कारण जल विद्युत उत्पादन क्षमता पर भी बुरा असर पड़ा है। गांधीसागर, ओंकारेश्वर, इंदिरा सागर, राजघाट और सरदार सरोवर जैसे प्रमुख बांधों से होने वाले जल विद्युत उत्पादन में लगभग 1,500 मेगावाट की कमी आई है। इसके अलावा, पूरे देश में कोयले की किल्लत और तकनीकी खराबी के चलते ताप विद्युत इकाइयों की ट्रिपिंग से भी उत्पादन को झटका लगा है। थर्मल पावर प्लांटों में तकनीकी समस्याओं के कारण लगभग 1,000 मेगावाट का उत्पादन प्रभावित हुआ है।
एक्सचेंज में बिजली का संकट, उत्तर प्रदेश से हो रही आपूर्ति
ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया कि 13 अक्टूबर 2026 की स्थिति में देश के प्रमुख बिजली एक्सचेंज (इंडियन एनर्जी एक्सचेंज) में पीक आवर्स के दौरान बिजली खरीदने की अधिकतम बोली लगभग 70,000 मेगावाट तक पहुंच गई थी, जबकि बेचने वाले केवल 500 मेगावाट के आसपास ही उपलब्ध थे और इसकी दर भी 10 रुपए प्रति यूनिट तक पहुंच गई थी। पूरे देश में बिजली की कमी होने के कारण वर्तमान में एक्सचेंज में भी पर्याप्त बिजली उपलब्ध नहीं है। ऐसे में प्रदेश में बिजली की निर्बाध उपलब्धता बनाए रखने के लिए उत्तर प्रदेश से पीक घंटों में 500 मेगावाट बिजली ली जा रही है।
करार किया मॉल बनाने का, बसा दी कॉलोनी
कांग्रेस का आरोप, लोकायुक्त से जांच कराएं
भोपाल। प्रदेश की सियासत में 2007 की ग्लोबल इन्वेस्टमेंट मीट एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई है। प्रदेश कांग्रेस ने इंदौर के कुमेड़ी में मॉल निर्माण के लिए हुए 51 एकड़ जमीन के करार में बड़े पैमाने पर अनियमित्ताओं और शर्तों के उल्लंघन का सनसनीखेज आरोप लगाया है। पार्टी ने इस पूरे भूमि प्रकरण की लोकायुक्त से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक ने दस्तावेजों के हवाले से गंभीर खुलासे किए। उन्होंने आरोप लगाया कि 490 करोड़ रुपए के निवेश और 4 हजार रोजगार सृजन का वादा करने वाली जेकेएम इन्वेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड (निदेशक अभिषेक मोदी) ने तयशुदा परियोजना को धरातल पर उतारने के बजाय जमीन को ही बेच दिया। नायक के मुताबिक, इस जमीन पर बाद में श्रीराम एन्क्लेव कॉलोनी विकसित कर दी गई तथा एक हिस्से को पांच सितारा होटल के निर्माण के लिए बेच दिया गया।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की मौजूदगी में हुए इस एमओयू के तहत 11 जुलाई 2008 की आईडीए नोटशीट में जमीन को योजना से मुक्त रखने की शर्त रखी गई थी कि कंपनी केवल मॉल का निर्माण करेगी। शर्तों का पालन न होने पर इंदौर विकास प्राधिकरण को जमीन पुनः अधिग्रहित करनी थी, लेकिन वर्षों तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। परियोजना के नाम पर महज 30 मीटर का एक ढांचा खड़ा किया गया और 28 अक्टूबर 2010 को आईडीए द्वारा प्रगति रिपोर्ट मांगे जाने के बावजूद मॉल नहीं बना। कांग्रेस के इस आक्रामक रुख से राज्य में एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है।