इंदौर दूषित पानी मामले में प्रभारी जोनल अधिकारी बर्खास्त

सहायक यंत्री और प्रभारी सहायक यंत्री को किया निलंबित
भोपाल। इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से हुई मौतों के मामले में मुख्यमंत्री डा मोहन यादव ने सख्त एक्शन लिया है और तीन अधिकारियों पर कार्रवाई की है। प्रभारी उप यंत्री को सेवा से किया बर्खास्त कर दिया गया है। वहीं जोनल अधिकारी, सहायक यंत्री और प्रभारी सहायक यंत्री निलंबित कर दिया है।
दरअसल, भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने के बाद लोगों को उल्टी की शिकायत हुई, जिनमें से कई लोग अस्पताल में पहुंचे। अस्पताल पहुंचे लोगों में से आधा दर्जन लोगों की मौत हो चुकी है। इस घटनाक्रम पर मुख्यमंत्री डामोहन यादव ने सख्त कार्रवाई की है, वहीं बीमार मरीजों के उपचार और मृतकों के परिजनों को आर्थिक सहायता भी देने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री डा यादव ने कहा कि इंदौर शहर के भागीरथपुरा क्षेत्र में हुई घटना बेहद दुखद है। उन्होंने मृतकों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए इलाजरत प्रभावितों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। इसके साथ ही मुख्यंत्री ने इस हादसे में क्षेत्र का दायित्व संभालने वाले अधिकारियों पर कारवाई के निर्देश दिए हैं।
गौरतलब है कि इंदौर में पानी की आपूर्ति खरगोन जिले के जलुद स्थित नर्मदा पंपिंग स्टेशन से की जाती है और आशंका इस बात की है कि पाइपलाइन में कहीं गंदा पानी मिल गया था और उसी के चलते लोगों की तबीयत बिगड़ी है।
तीन सदस्यों की समिति करेगी जांच
भागीरथपुरा मामले में जोनल अधिकारी शालिग्राम सितोले और सहायक यंत्री योगेश जोशी को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है और प्रभारी उपयंत्री पीएचई शुभम श्रीवास्तव को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त किया गया है। साथ ही इस पूरे मामले की जांच के लिए तीन सदस्यों की एक समिति गठित की गई है। समिति आईएएस नवजीवन पंवार के निर्देशन में जांच करेगी। समिति में प्रदीप निगम, सुपरिटेंडेंट इंजीनियर और मेडिकल कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. शैलेश राय को भी शामिल किया गया है।
पटवारी ने निगम के खिलाफ एफआईआर की मांग
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने अस्पताल में भर्ती मरीजों से भेंट की. वहीं उन्होंने पूरे घटनाक्रम के लिए महापौर और नगर निगम कमिश्नर को जिम्मेदार ठहराते हुए उनके खिलाफ एफआईआर की मांग की. जीतू पटवारी ने कहा कि इंदौर में गंदे पानी से डायरिया होता है, ड्रेनेज का पानी नर्मदा की लाइन में मिलता है, जिससे डायरिया, पीलिया और अन्य बीमारियां होती है. फिर भी गंदे पानी से व्यक्ति की मौत नहीं होती, लेकिन अगर तीन-तीन लोग मारे गए हैं, तो इसका मतलब पानी में जहर है. इसकी जांच होना चाहिए।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा जमीनी कार्रवाई करे सरकार
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई मौतों और सैकड़ों नागरिकों के बीमार होने की गंभीर घटना को लेकर आज मुख्यमंत्री को औपचारिक पत्र लिखकर तत्काल कार्यवाही की मांग की है। पत्र में नेता प्रतिपक्ष ने लिखा है कि भागीरथपुरा क्षेत्र में गंदे पानी की सप्लाई से हालात लगातार बिगड़ रहे हैं। यह प्रशासनिक लापरवाही का मामला है, जिसकी तत्काल निष्पक्ष जांच, दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई, पीड़ितों को समुचित इलाज और मुआवज़ा सुनिश्चित किया जाना चाहिए। जनता की सेहत से कोई समझौता स्वीकार्य नहीं है। सरकार को सिर्फ़ घोषणाएं नहीं, ज़मीनी कार्रवाई करनी होगी।
माकपा ने की पचास लाख मुआवजा देने की मांग
माकपा के राज्य सचिव जसविंदर सिंह ने कहा कि पिछले सात वर्षों से आंकड़ों की बाजीगरी के जरिए सफाई में नंबर एक का दावा करने वाली इंदौर नगर निगम की हकीकत जहरीला पानी पीने से हुई आठ मौतों से सामने आ गई है। वहीं प्रदेश की संस्कारधानी कहे जाने वाले जबलपुर में जहरीली शराब से 19 लोगों की मौत का दिल दहला देने वाला मामला उजागर हुआ है। उन्होंने दोनों शहरों के सभी मृतकों के परिजनों को 50-50 लाख रूपए मुआवजा तथा एक आश्रित को सरकारी नौकरी देने की भी मांग की।
 


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