भुगतान न होने पर बिजली कंपनियों ने थमाया नोटिस

नगरीय प्रशासन विभाग ने समायोजन के लिए जारी किए निर्देश
भोपाल। प्रदेश के 217 नगरीय निकायों द्वारा बिजली बिलों का भुगतान न करना अब उनके लिए मुसीबत बन गया है। प्रदेश की तीनों प्रमुख बिजली कंपनियों का निकायों पर कुल ’106 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया है। इस भारी भरकम राशि की वसूली को लेकर अब बिजली कंपनियां और नगरीय निकाय आमने-सामने हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए नगरीय प्रशासन विभाग ने बीच का रास्ता निकालते हुए बकाया राशि का समायोजन ’’मार्च माह की चुंगी क्षतिपूर्ति’’ से करने का निर्णय लिया है।
बिजली कंपनियों द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में करोड़ों रुपये की राशि अटकी हुई है। मध्य क्षेत्र (भोपाल) के 75 नगरीय निकायों पर 40.75 करोड़ से अधिक का बकाया है। वहीं पश्चिम क्षेत्र (इंदौर) में 70 नगरीय निकायों से 41.29 करोड़ की वसूली शेष है, जबकि ’पूर्व क्षेत्र (जबलपुर) में 72 नगरीय निकायों पर 24.55 करोड़ का बिल लंबित है।  प्रदेश के बड़े नगर निगम भी इस डिफ़ॉल्ट सूची में शामिल हैं। इंदौर नगर निगम इस सूची में शीर्ष पर है, जिसने 26 करोड़ से अधिक का भुगतान नहीं किया है।इंदौर में 26.69 करोड., भोपाल में 13.76 करोड़, ग्वालियर पर 9.34 करोड़, जबलपुर’ पर 6.22 करोड़, सतना 6.16 करोड़ पर और सागर निकाय पर 2.12 करोड़  का बकाया है।  इसके अलावा मुरैना (1.17 करोड़), गुना (1.12 करोड़), विदिशा (1.02 करोड़), रीवा (1.45 करोड़), सिंगरौली (1.36 करोड़), कटनी (1.21 करोड़), देवास (1.42 करोड़) और खंडवा (1.24 करोड़) निकाय पर भी ष्षेश है।
चुंगी से कटेगा पैसा
लगातार नोटिस दिए जाने के बावजूद बिलों का भुगतान न होने पर नगरीय प्रशासन विभाग ने कड़ा फैसला लिया है। विभाग ने निर्देश दिए हैं कि इन बकाया बिलों की राशि को मार्च महीने में मिलने वाली चुंगी क्षतिपूर्ति राशि से समायोजित किया जाए। तीनों बिजली कंपनियों को इस प्रक्रिया की जानकारी दे दी गई है। साथ ही, सभी संबंधित निकायों और संचालनालय को भी समायोजन की विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि भविष्य में बिजली आपूर्ति में कोई बाधा न आए।

Leave Comments

Top