संविधान का हवाला देकर शुभेंदु ने घेरा
ममता बनर्जी के इस अड़ियल रुख पर भारतीय जनता पार्टी के नवनिर्वाचित विधायक शुभेंदु अधिकारी ने पलटवार किया है। शुभेंदु ने इस पूरे विवाद पर बहुत नपी-तुली और संविधानिक टिप्पणी की है। उन्होंने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा, 'सब कुछ संविधान में लिखा है। मुझे इस बारे में ज्यादा कुछ कहने की जरूरत नहीं है।
शुभेंदु अधिकारी का यह इशारा साफ है कि लोकतंत्र में हार-जीत और पद पर बने रहने की प्रक्रिया संविधान के नियमों से चलती है। बंगाल की हाई-प्रोफाइल चुनावी जंग के बाद अब सारा मामला कानूनी और संविधानिक मर्यादाओं के इर्द-गिर्द सिमटता दिख रहा है। ममता बनर्जी के बयान को उनके समर्थकों ने उनके जुझारू व्यक्तित्व से जोड़ा है, वहीं भाजपा इसे नियम विरुद्ध बता रही है। ममता बनर्जी ने क्या कहा था?
पश्चिम बंगाल की निवर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सूबे में पार्टी की हार के बाद भड़क गई हैं। मंगलवार को मीडिया ने उनसे लोकभवन जाकर इस्तीफा देने के बारे में सवाल पूछा। इस पर दीदी ने कहा, 'मैं क्यों जाऊंगी? हम तो हारे नहीं हैं, जो जाएंगे। अगर मैं जीत गई होती तो शपथ से पहले इस्तीफा देने जाती। लोकभवन जाने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता। चोरी करके जीतने से उन्हें अगर लगता है कि मुझे इस्तीफा देना होगा तो ऐसा नहीं होगा।' उन्होंने कहा, 'मैं स्पष्ट कहती हूं कि हम हारे नहीं हैं। उन्होंने जबरन हमें हराया है। चुनाव आयोग के साथ मिलकर वो जीते हैं, लेकिन नैतिक तौर पर मेरी जीत हुई है।'
कल्याण बनर्जी का तर्क
इस बीच तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के इस्तीफे की संभावना को पूरी तरह से नकारते हुए एक अनोखा तर्क पेश किया है। उन्होंने कहा कि पिछले तीन महीनों से राज्य में आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू थी, जिसके दौरान सरकार का संचालन मुख्यमंत्री के बजाय मुख्य सचिव के हाथों में था। बनर्जी के अनुसार, जब ममता बनर्जी पिछले तीन महीनों से तकनीकी रूप से प्रशासनिक कामकाज नहीं संभाल रही थीं, तो उनके इस्तीफे का सवाल ही पैदा नहीं होता। उन्होंने विपक्षी दलों की मांग को निराधार बताते हुए स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री अपने पद पर बनी रहेंगी।
कल्याण बनर्जी ने चुनाव परिणामों की शुचिता पर भी कड़े प्रहार किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस बार मतगणना के दौरान बड़े पैमाने पर चोरी हुई है और लोकतंत्र की सरेआम हत्या की गई है। टीएमसी सांसद ने दावा किया कि सीआईएसएफ और सीआरपीएफ के जवानों ने उनके उम्मीदवारों और काउंटिंग एजेंटों के साथ बेरहमी से मारपीट की और उन्हें केंद्रों से बाहर निकाल दिया।