MP Rajya Sabha: एमपी की तीन सीटों पर BJP के उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित, रिटर्निंग अफसर ने सौंपा प्रमाण पत्र

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: Sabahat Husain Updated Thu, 11 Jun 2026 03:27 PM IST

नाम वापसी की समय-सीमा खत्म होने के बाद और केवल तीन पदों के लिए तीन ही नामांकन शेष रहने के चलते सभी उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हो गए हैं। ऐसे में रिटर्निंग अधिकारी ने उन्हें प्रमाण पत्र सौंपा है।

MP Rajya Sabha Polls BJP’s Three Nominees Declared Elected Receive Election Certificates
रजनीश अग्रवाल, तरुण चुघ, महेश केवट - फोटो : अमर उजाल

विस्तार

मध्य प्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटों पर बीजेपी के उम्मीदवारों को आज ही जीत का प्रमाण पत्र दे दिया गया। दरअसल, नाम वापसी की समय-सीमा खत्म होने के बाद और केवल तीन पदों के लिए तीन ही नामांकन शेष रहने के चलते सभी उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हो गए हैं। ऐसे में रिटर्निंग अधिकारी ने उन्हें प्रमाण पत्र सौंपा ह

बता दें कि राज्यसभा चुनाव के लिए आज 11 जून को दोपहर 3 बजे तक नाम वापसी की अंतिम समय-सीमा तय है। लेकिन कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद स्थिति यह बन गई कि तीन सीटों के मुकाबले केवल तीन ही उम्मीदवार मैदान में रह गए, जिससे चुनाव निर्विरोध हो गया। जिसके बाद बीजेपी के तीनों राज्यसभा सांसदों का स्वागत पार्टी कार्यालय में करने की भी तैयारी की जा रही है। विधायक दल के बाद ये सभी नव-निर्वाचित सांसद बीजेपी प्रदेश कार्यालय पहुंचेंगे, जहां प्रदेश अध्यक्ष उनका स्वागत करेंगे। इन सीटों से बीजेपी के तरुण चुघ, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट का राज्यसभा जाना तय हो गया है।

क्यों आई ऐसी स्थिति?
यह पूरा विवाद कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन के नामांकन खारिज होने के बाद शुरू हुआ। बीजेपी ने उन पर आपराधिक मामले की जानकारी छिपाने का आरोप लगाया था। स्क्रूटनी के दौरान रिटर्निंग ऑफिसर ने आपत्ति सही मानते हुए उनका नामांकन रद्द कर दिया। इसके बाद कांग्रेस ने इस फैसले के खिलाफ विरोध दर्ज कराया और सड़क पर प्रदर्शन भी किया। मामला चुनाव आयोग तक पहुंचा, लेकिन वहां से भी राहत नहीं मिली। आयोग ने भी आपराधिक मामले की जानकारी छिपाने को आधार मानते हुए नामांकन खारिज रखने का निर्णय बरकरार रखा। फिलहाल कांग्रेस की ओर से मीनाक्षी नटराजन ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।

क्या था वो मामला?
राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पत्र पर भाजपा ने आपत्ति दर्ज कराई है। भाजपा का आरोप है कि मीनाक्षी नटराजन ने अपने शपथ पत्र में हैदराबाद की एक अदालत में लंबित प्रकरण की जानकारी नहीं दी है। इसी आधार पर भाजपा ने उनका नामांकन निरस्त करने की मांग की है। वहीं कांग्रेस का कहना है कि मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है। पार्टी के अनुसार उन्हें केवल अदालत की ओर से नोटिस प्राप्त हुआ था, इसलिए शपथ पत्र में इसका उल्लेख करने का कोई दायित्व नहीं था

भाजपा ने केवट पर क्यों दांव लगाया था?
मध्य प्रदेश की रिक्त हुई तीन राज्यसभा सीटों के नतीजे आज घोषित हो गए हैं। तीनों सीटों पर भाजपा के उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं। इनमें एक उम्मीदवार महेश केवट का नाम चर्चा में रहा। भाजपा ने महेश केवट को प्रत्याशी बनाकर पूरे देश और खासकर यूपी में सामाजिक और राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की थी। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा ने इस फैसले से प्रदेश के अति पिछड़ा वर्ग के साथ-साथ आगामी उत्तर प्रदेश चुनाव को देखते हुए वहां के प्रभावशाली निषाद-केवट समाज को भी साधने का प्रयास किया था। दिलचस्प बात यह थी कि भाजपा ने तीसरा उम्मीदवार ऐसे समय मैदान में उतारा था, जब उसके पास सीधे तौर पर जीत के लिए आवश्यक संख्या नहीं थी। हालांकि कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन के नमांकन के बाद ये स्थिति साफ हो गई।

भाजपा ने चुघ पर क्यों दांव लगाया था?
बीजेपी ने मध्य प्रदेश से राज्यसभा उम्मीदवार के तौर पर पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ को नामित किया था। पार्टी का यह फैसला पंजाब की राजनीति में दूरगामी असर वाला माना जा रहा है। हाल ही में पंजाब भाजपा में हुए संगठनात्मक बदलाव और 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच इस निर्णय को पार्टी की व्यापक राजनीतिक रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार भाजपा ने इस फैसले के जरिए एक साथ कई संदेश देने की कोशिश की है। एक ओर जाट सिख चेहरे के रूप में केवल सिंह ढिल्लों को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है तो दूसरी ओर हिंदू नेतृत्व को प्रतिनिधित्व देने के लिए तरुण चुघ को राज्यसभा भेजा गया है। 

भाजपा ने रजनीश पर क्यों दांव लगाया था?
रजनीश अग्रवाल लंबे समय से मध्य प्रदेश में भाजपा संगठन के साथ सक्रिय रूप से जुड़े रहे हैं। पार्टी ने उन्हें बूथों के डिजिटलीकरण की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी हुई थी। यदि उनके व्यक्तिगत व्यक्तित्व की बात करें, तो वे सौम्य, सरल और मिलनसार स्वभाव के व्यक्ति माने जाते हैं। इन्हीं गुणों और संगठन में उनके लंबे अनुभव को देखते हुए पार्टी ने उन पर भरोसा जताते हुए उन्हें उम्मीदवार बनाया

कितने अमीर है भाजपा के जीते हुए प्रत्याशी
1- तरुण चुघ

भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा प्रत्याशी तरुण चुघ तथा उनके परिवार के पास करीब 22 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्ति है। चुघ ने अपने नामांकन पत्र के साथ प्रस्तुत शपथपत्र में अपने नाम पर 8 करोड़ रुपये से अधिक की चल एवं अचल संपत्तियों का ब्यौरा दिया है। शपथपत्र के अनुसार उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला लंबित नहीं है और न ही किसी मामले में उन्हें दोषसिद्ध ठहराया गया है। शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो तरुण चुग ने वर्ष 2012 में महात्मा गांधी यूनिवर्सिटी, मेघालय से मास्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (एमबीए) की डिग्री प्राप्त की है।


2- रजनीश अग्रवाल
भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा प्रत्याशी रजनीश कुमार अग्रवाल ने नामांकन के साथ दाखिल शपथपत्र में दी गई जानकारी के अनुसार, उनके पास लगभग 59.59 लाख रुपये की चल संपत्ति है। वहीं उनकी पत्नी गरिमा विजयवर्गीय के नाम 32.12 लाख रुपये की चल संपत्ति दर्ज है। उनके आश्रित पुत्र ज्योतिर्मन अग्रवाल के नाम 5 लाख रुपये की संपत्ति बताई गई है। इस प्रकार परिवार की कुल चल संपत्ति करीब 96.71 लाख रुपये है। अचल संपत्तियों की बात करें तो रजनीश अग्रवाल के नाम विदिशा जिले की लटेरी तहसील में कृषि एवं गैर-कृषि भूमि दर्ज है। हलफनामे के अनुसार उनकी अचल संपत्तियों का वर्तमान बाजार मूल्य लगभग 1.16 करोड़ रुपये है। इस तरह परिवार की कुल घोषित चल और अचल संपत्ति 2 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है।

3- महेश केवट
महेश केवट के पास 2.73 करोड़ से अधिक की संपत्ति है। महेश केवट के खिलाफ कोई भी आपराधिक मामला लंबित नहीं है और न ही किसी मामले में उन्हें दोषी ठहराया गया है। 52 वर्षीय महेश केवट मूल रूप से निवाड़ी जिले के ओरछा निवासी हैं। उनके शपथ पत्र के अनुसार वर्ष 2025-26 की आयकर विवरणी में उनकी कुल आय 5.37 लाख रुपये दर्ज है। शपथ पत्र के अनुसार उनके नाम पर ओरछा क्षेत्र में कृषि और गैर-कृषि भूमि दर्ज है। अधिकांश संपत्तियां पैतृक (विरासत) में प्राप्त बताई गई हैं। कृषि भूमि का अनुमानित बाजार मूल्य करीब 25 लाख रुपये। गैर-कृषि भूमि का अनुमानित बाजार मूल्य करीब 1.50 करोड़ रुपये। दो आवासीय भवनों का बाजार मूल्य लगभग 78 लाख रुपये। कुल मिलाकर उनकी स्थावर संपत्तियों का वर्तमान बाजार मूल्य 2.53 करोड़ रुपये बताया गया है।


Leave Comments

Top