मुंबई की सत्ता पर महायुति की मजबूत पकड़ के संकेत, बीएमसी चुनाव के एग्जिट पोल में भाजपा शिंदे शिवसेना को स्पष्ट बढ़त

मुंबई.मुंबई की सियासी तस्वीर को लेकर बड़ा संकेत सामने आया है. महाराष्ट्र की आर्थिक राजधानी मुंबई में हुए बृहन्मुंबई महानगरपालिका चुनाव 2026 के लिए आए लगभग सभी एग्जिट पोल भाजपा शिवसेना (शिंदे) के नेतृत्व वाली महायुति को स्पष्ट बहुमत की ओर बढ़ता हुआ दिखा रहे हैं. गुरुवार, 15 जनवरी को सभी 227 सीटों के लिए मतदान संपन्न होने के बाद देर शाम जारी हुए एग्जिट पोल के नतीजों ने यह साफ कर दिया है कि मुंबई की सबसे ताकतवर स्थानीय संस्था बीएमसी पर इस बार सत्ता परिवर्तन लगभग तय माना जा रहा है.

एग्जिट पोल्स के मुताबिक महायुति गठबंधन, जिसमें भारतीय जनता पार्टी, एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया शामिल है, बहुमत के आंकड़े को काफी आसानी से पार करता नजर आ रहा है. Axis My India के एग्जिट पोल में महायुति को 131 से 151 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है, जबकि उसे करीब 42 प्रतिशत वोट शेयर मिलने की संभावना बताई गई है. इसके मुकाबले उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी), महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना और एनसीपी (शरद पवार) के गठबंधन को 58 से 68 सीटों पर सिमटते हुए दिखाया गया है, जिनका अनुमानित वोट शेयर 32 प्रतिशत के आसपास बताया गया है.

CNN-News18 के लिए किए गए JVC एग्जिट पोल ने भी इसी तरह का रुझान दिखाया है. इसके अनुसार महायुति लगभग 138 सीटों के साथ स्पष्ट बहुमत हासिल कर सकती है, जबकि उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के नेतृत्व वाला गठबंधन करीब 59 सीटों पर सिमट सकता है. कांग्रेस और वंचित बहुजन आघाड़ी के गठबंधन को 23 सीटें मिलने का अनुमान है, वहीं अन्य दलों और निर्दलीयों के खाते में करीब 7 सीटें जा सकती हैं. इन आंकड़ों ने यह संकेत दे दिया है कि अगर ये अनुमान नतीजों में बदलते हैं, तो यह पहली बार होगा जब भाजपा मुंबई महानगरपालिका की सत्ता पर सीधे काबिज होगी.

ABP News–DV Research के एग्जिट पोल में भी महायुति को बढ़त मिलती दिख रही है, हालांकि सीटों का अनुमान कुछ कम है. इस सर्वे के अनुसार महायुति को 107 से 122 सीटें मिल सकती हैं. शिवसेना (यूबीटी) और मनसे को मिलाकर 68 से 83 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है. कांग्रेस और वीबीए के खाते में 18 से 25 सीटें जा सकती हैं, जबकि अजित पवार की एनसीपी को 2 से 4 सीटें मिलने का अनुमान है. अन्य दलों और निर्दलीयों को 8 से 15 सीटें मिलने की बात कही गई है.

साम टीवी के मेगा एग्जिट पोल ने भी महायुति को बढ़त में दिखाया है. इसके अनुसार अकेले भाजपा को 84 सीटें मिल सकती हैं, जबकि शिंदे गुट की शिवसेना 35 सीटें जीत सकती है. वहीं उद्धव ठाकरे की शिवसेना को 65 सीटें और मनसे को करीब 10 सीटें मिलने का अनुमान है. कांग्रेस और वीबीए गठबंधन को 23 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है. लोकशाही और जनमत जैसे अन्य एग्जिट पोल भी मोटे तौर पर यही कहानी बयान कर रहे हैं कि मुंबई की सियासत में इस बार पलड़ा महायुति की ओर झुका हुआ है.

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीएमसी चुनाव के एग्जिट पोल केवल नगर निगम तक सीमित संदेश नहीं देते, बल्कि इसका असर महाराष्ट्र की राज्य राजनीति पर भी पड़ेगा. लगभग चार वर्षों बाद मुंबई को एक निर्वाचित नगर निगम मिलने जा रहा है और ऐसे में यह चुनाव सत्ता और विपक्ष दोनों के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया था. भाजपा के लिए यह चुनाव इसलिए भी अहम है, क्योंकि अब तक वह बीएमसी में सबसे बड़ी पार्टी तो रही, लेकिन कभी मेयर और स्थायी समिति पर पूर्ण नियंत्रण नहीं कर पाई. यदि एग्जिट पोल के अनुमान सही साबित होते हैं, तो यह मुंबई में भाजपा के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि होगी.

दूसरी ओर उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के लिए यह चुनाव बेहद अहम माना जा रहा था. दोनों भाइयों के गठबंधन को लेकर उम्मीद जताई जा रही थी कि मराठी अस्मिता और शिवसेना की पुरानी पकड़ के दम पर वे मुंबई में मजबूत प्रदर्शन करेंगे, लेकिन एग्जिट पोल के आंकड़े उनके लिए झटका साबित हो सकते हैं. शिवसेना (यूबीटी) और मनसे के अलग-अलग चुनाव लड़ने के फैसले और वोटों के बंटवारे को भी इस संभावित हार की एक बड़ी वजह माना जा रहा है.

इस चुनाव में कांग्रेस, वंचित बहुजन आघाड़ी और अन्य दलों की भूमिका भी सीमित नजर आ रही है. एग्जिट पोल्स के अनुसार कांग्रेस और वीबीए को मिलाकर भी दो अंकों में सीटें मिलने का अनुमान है, जिससे यह साफ है कि मुख्य मुकाबला महायुति और ठाकरे गुट के बीच ही रहा. अजित पवार की एनसीपी भी इस चुनाव में कोई खास प्रभाव नहीं छोड़ पाई है.

मुंबई बीएमसी चुनाव 2026 कई मायनों में खास रहे. करीब 3.48 करोड़ पंजीकृत मतदाताओं ने लगभग 1700 उम्मीदवारों का भविष्य तय किया. यह चुनाव चार साल से अधिक समय से प्रशासक के भरोसे चल रही बीएमसी के लिए एक नई शुरुआत माना जा रहा है. मतदान के दिन मुंबई और आसपास के इलाकों में कई जगह उत्साह देखने को मिला, वहीं कुछ स्थानों पर अव्यवस्थाओं और हल्की झड़पों की खबरें भी सामने आईं.

अब सबकी निगाहें 16 जनवरी को होने वाली मतगणना पर टिकी हैं. एग्जिट पोल भले ही महायुति के पक्ष में स्पष्ट संकेत दे रहे हों, लेकिन अंतिम फैसला मतगणना के बाद ही सामने आएगा. फिर भी जिस तरह से अलग-अलग सर्वे एजेंसियों के आंकड़े एक-दूसरे से मेल खाते नजर आ रहे हैं, उससे यह कहा जा सकता है कि मुंबई की सियासत में बड़ा बदलाव दस्तक देने को तैयार है. अगर नतीजे एग्जिट पोल के अनुरूप आते हैं, तो बीएमसी की सत्ता में बदलाव न केवल मुंबई, बल्कि पूरे महाराष्ट्र की राजनीति के लिए एक नया अध्याय साबित होगा.


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