
तात्या टोपे और झांसी की रानी के दुर्लभ पत्र
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आह्वान पर देश भर में शुरू किए गए 'ज्ञान भारतम मिशन' के अंतर्गत मध्य प्रदेश में पांडुलिपियों से संबंधित 32 लाख पेज संग्रहित किए गए हैं। आम लोगों के व्यक्तिगत संग्रह, मठ-मंदिर आदि स्थानों से इन्हें एकत्र किया गया है। सर्वाधिक संख्या के मामले में मध्य प्रदेश देश के शीर्ष तीन राज्यों में शामिल है। इस अभियान में पुरातत्व संचालनालय को अत्यंत दुर्लभ सामग्रियां मिली हैं।
जैसे तात्या टोपे का वर्ष 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के समय बुंदेलखंड के राजाओं को लिखा पत्र। इस पत्र में वह एक राजा को संबोधित पत्र में कहते हैं, 'आप लोग जो रणनीति बनाओगे वह हमें भी स्वीकार होगी। उनका हस्ताक्षर भी है।' इस स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े 140 पेज मिले हैं। बता दें, केंद्र ने इसी साल 16 मार्च को ज्ञान भारतम मिशन एप लांच किया था। तभी से पांडुलिपियों के सर्वेक्षण व संग्रहण का काम चल रहा है।
झांसी की रानी द्वारा बुंदेलखंड की ही एक रियासत की रानी लड़ाई दुलैया को लिखा पत्र भी मिला है। इसमें उन्होंने लिखा था, 'आप मेरी बड़ी बहन की तरह हो। हमें एक रहना है।' उनके इस पत्र में छपी अष्टकोणीय मुहर भी पहली बार सामने आई है। अभी तक माना जा रहा था सिर्फ मराठा साम्राज्य में अष्टकोणीय मुहर उपयोग की जाती थी। झांसी की रानी की रंगीन तस्वीर भी सामने आई है। इतिहासकार मानते हैं कि इसे उन्होंने खुद बनाया होगा। जंबू द्वीप का नक्शा, पन्ना के प्राणनाथ मंदिर से 20 फीट लंबा पत्र और दतिया से 10 फीट लंबी जन्म पत्री मिली है।
पुरातत्व संचालनालय में संयुक्त संचालक डा. मनीषा शर्मा ने बताया कि चित्रकूट स्थित तुलसी शोध संस्थान में रामचरितमानस की उर्दू, पाली और संस्कृत में अनूदित लगभग 500 पांडुलिपियां प्राप्त हुई हैं। इनमें से करीब 30 पांडुलिपियों के कालखंड का आकलन किया जा चुका है, जबकि शेष पर अध्ययन जारी है। फिरदौसी का शाहनामा भी मिला है। इसमें ईरान के प्राचीन राजाओं की कहानियां और पौराणिक इतिहास दर्ज हैं।
अब इन्हें डिजिटाइज किया जा रहा है। साथ ही पुरातत्व संचालनालय द्वारा अपना एआइ विक्रमादित्य एप बनाया जाएगा, जिसके माध्यम से लोग पांडुलिपियों के बारे में जान सकेंगे। दो सेंटर आफ एक्सीलेंस बनाए जा रहे हैं। इसमें एक इंदौर में देवी अहिल्या के नाम से और दूसरा स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ा सेंटर भोपाल में बनाया जाएगा। ये सेंटर दस्तावेज को डिजिटाइज, पाठ्यपुस्तकों में शामिल कराने और आम लोगों को सहजता से उपलब्ध कराने के लिए काम करेंगे।
हर धर्म और कालखंड से जुड़े दस्तावेज मिले हैं। मध्य प्रदेश के संबंध में बड़ी विरासत उपलब्ध है, गोंडवाना लैंड से आज तक के सभ्यता के विकास की। स्कैन कर एप में अपलोड करने का भी बहुत कुछ काम हो चुका है। अब आगे यह सामग्री आम लोगों को पढ़ने-देखने को मिलेगी। पाठ्यक्रम का हिस्सा बनेगी। - मदन कुमार नागरगोजे, आयुक्त, पुरातत्व संचालनालय एवं अभिलेखागार