पदोन्नति रोकने की सपाक्स की याचिका के बीच कैविएट दाखिल, एकतरफा फैसले से बचने के लिए एमपी सरकार का मास्टरस्ट्रोक

सामान्य प्रशासन विभाग ने नए नियम के आधार पर पदोन्नति करने से किसी प्रकार की रोक न होने के आधार पर सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि वे पदोन्नतियां करे...और पढ़ें

Publish Date: Thu, 02 Jul 2026 09:32:54 PM (IST)Updated Date: Thu, 02 Jul 2026 09:35:06 PM (
पदोन्नति रोकने की सपाक्स की याचिका के बीच कैविएट दाखिल, एकतरफा फैसले से बचने के लिए एमपी सरकार का मास्टरस्ट्रोक

पदोन्नति को चुनौती देने वाली याचिका पर सरकार का पक्ष सुने बिना नहीं होगा निर्णय (AI से जनरेट इमेज)

HighLights

  1. पदोन्नति को चुनौती देने वाली याचिका पर सरकार का पक्ष सुने बिना नहीं होगा निर्णय
  2. सपाक्स की याचिका पर 7 जुलाई को जबलपुर हाई कोर्ट में बड़ी सुनवाई
  3. एक सप्ताह में सामान्य प्रशासन, तकनीकी शिक्षा सहित कई विभाग करेंगे पदोन्नति आदेश जारी

राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। प्रदेश में भले ही 2025 के पदोन्नति नियम से पदोन्नति देने का सिलसिला प्रारंभ हो गया है, लेकिन कानूनी मामला अभी भी अटका हुआ है। हाई कोर्ट जबलपुर में याचिका पर नए सिरे से सुनवाई होगी। वहीं, नए नियम से पदोन्नति रोकने के लिए सामान्य पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक अधिकारी-कर्मचारी संस्था सपाक्स ने याचिका दायर कर दी है। इस पर सात जुलाई को सुनवाई है। इसमें एकतरफा कोई निर्देश न दे दिए जाएं, इसलिए सरकार ने कैविएट दायर कर दी है।

सरकार का पक्ष सुनने के बाद ही मामले में होगा कोई निर्णय

अब सरकार का पक्ष सुनने के बाद ही इस मामले में कोई निर्णय होगा। सामान्य प्रशासन विभाग ने नए नियम के आधार पर पदोन्नति करने से किसी प्रकार की रोक न होने के आधार पर सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि वे पदोन्नतियां करें। विधानसभा सचिवालय ने इसकी शुरुआत भी कर दी और सामान्य प्रशासन, तकनीकी शिक्षा सहित कई विभाग एक सप्ताह में पदोन्नति आदेश जारी करेंगे।

विभागीय अधिकारियों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट पदोन्नति करने के लिए कह चुका है। ये सभी पदोन्नतियां सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट में लंबित याचिकाओं के अंतिम निर्णय के अधीन रहेंगी। हालांकि, सपाक्स इसे सुप्रीम कोर्ट के यथास्थिति बनाए रखने संबंधी निर्देश का उल्लंघन मान रहा है।

संगठन की ओर से हाई कोर्ट में त्वरित सुनवाई के लिए जो याचिका लगाई गई है, उसमें प्रकरण के शीघ्र निराकरण और पदोन्नतियां रोकने की मांग की गई है। उधर, सरकार भी सतर्क है और कैविएट दायर कर दी गई है ताकि कोई भी निर्णय या निर्देश बिना उसका पक्ष सुने न सुनाया जाए। अब सबकी नजर सात जुलाई को होने वाली सुनवाई पर है।


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