कॉकरोच जनता पार्टी ने छात्रों के साथ पुलिस द्वारा कथित उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए सरकार को चेतावनी दी है। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा कि यदि छात्रों के साथ पुलिस का कथित दुर्व्यवहार और उत्पीड़न जारी रहा तो वह जल्द ही बड़े स्तर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करेगी। पार्टी ने अपने बयान में कहा कि छात्रों के खिलाफ कार्रवाई बंद की जानी चाहिए और उन्हें निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए।
पार्टी ने सरकार से छात्रों को कथित रूप से निशाना बनाने और उनके खिलाफ 'विच हंट' यानी चुन-चुनकर कार्रवाई करने का सिलसिला रोकने की मांग की। पार्टी का कहना है कि छात्रों के साथ होने वाले कथित व्यवहार को लेकर वह शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठाएगी। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रवक्ता सौरव दास ने भी कहा कि उन्हें प्रदर्शनकारियों पर दर्ज एफआईआर वापस लेने और हिरासत में लिए गए या गिरफ्तार लोगों की रिहाई को लेकर आज लिखित गारंटी मिलने की उम्मीद है।
सीजेपी प्रवक्ता ने भी केंद्र सरकार को दी चेतावनी?
- इसके साथ ही उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, ''हमारी मांग थी कि सभी प्रदर्शनकारियों को छोड़ा जाएगा। केंद्र सरकार की ओर से इस पर प्रेस कॉन्फ्रेंस में सहमति भी जताई गई थी। अगर सुप्रीम कोर्ट कह रहा है कि जिनके ऊपर पहले से एफआईआर हैं, उन्हें मत छोड़िए तो ये हमें मंजूर नहीं है।'' सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को निर्देश दिया था कि नीट-यूजी 2026 पेपर लीक के विरोध में देशव्यापी प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार या हिरासत में लिए गए 18 वर्ष से कम आयु के छात्रों को रिहा किया जाए, बशर्ते उनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड न हो।
- सीजेपी प्रवक्ता ने कहा, "अगर सुप्रीम कोर्ट युवाओं के हित में काम कर रहा है तो हम ऐसे आदेशों या फैसलों का स्वागत करते हैं। दूसरी ओर, हम लंबे समय से जमीनी स्तर पर सक्रिय हैं और हमारी कुछ मांगें हैं, जिन्हें पूरा किया जाना सबसे महत्वपूर्ण है। हमारी प्रमुख मांगों में से एक यह थी कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर वापस ली जाएं और सरकार भविष्य में किसी भी प्रदर्शनकारी के खिलाफ कोई प्रतिशोधात्मक कार्रवाई न करे। हमें उम्मीद थी कि आज (मंगलवार) तक इस संबंध में लिखित गारंटी जारी कर दी जाएगी और हिरासत में लिए गए या गिरफ्तार सभी लोगों को रिहा कर दिया जाएगा।"
सुप्रीम कोर्ट ने दिए थे क्या निर्देश?
सीजेपी ने जंतर-मंतर पर 37 दिनों तक प्रदर्शन करने के बाद सरकार ने उनकी मांगें मान ली थीं। इसके बाद धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। सरकार ने आत्महत्या करने वाले अभ्यर्थियों के परिजनों को उचित मुआवजा देने और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने पर भी सहमति जताई थी। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि फिलहाल छात्रों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई न की जाए। अदालत ने प्रदर्शन से जुड़े सभी इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने का आदेश दिया और कहा कि उसके सामने रखे गए आरोप प्रथम दृष्टया स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग करते हैं।