लोकसभा में मंगलवार को लोक परीक्षा संशोधन विधेयक 2026 पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी के नए शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी पर दिए गए बयान को लेकर काफी हंगामा हुआ। एनडीए सरकार के सांसदों की ओर से इस बयान पर विरोध जताया गया। संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने बयान को चरित्र हनन करार देते हुए इसे लोकसभा की कार्यवाही से हटाने की मांग की।
इस बीच केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी, किरेन रिजिजू और पीयूष गोयल ने संसद में गृह मंत्री अमित शाह के साथ मुलाकात की। इसके बाद इन सभी मंत्रियों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से भी मुलाकात की। इन मुलाकातों के बाद प्रियंका गांधी का बयान लोकसभा की कार्यवाही से हटा दिया गया। माना जा रहा है कि एनडीए सांसद इसे बयान को लेकर कांग्रेस को घेरने की योजना बना सकती है।
प्रियंका गांधी के किस बयान पर हुआ हंगामा?
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने कहा, ''प्रधानमंत्री ने नया शिक्षा मंत्री चुना, एक ऐसे व्यक्ति को चुना, जिसने एक गर्भवती रेप पीड़िता के दोषियों की रिहाई पर सहमति व्यक्त की।'' इस पर स्पीकर ने उनको टोका और सत्तापक्ष के सदस्यों ने जोरदार हंगामा किया। संसदीय कार्य मंत्री रिजिजू ने इस पर आपत्ति करते हुए कहा, ''प्रियंका गांधी ने जो कहा, हमारे नए शिक्षा मंत्री पर जो टिप्पणी की, वह चरित्र हनन है एक तरीके से। हम उम्मीद नहीं करते ऐसी बातों की। इसे रिकॉर्ड से हटाया जाए। इस तरह की भाषा का इस्तेमाल कर संसद में डिबेट के स्तर को ना गिराएं। जिम्मेदारी के साथ बोलना चाहिए। अगर आप ऑथेंटिकेट नहीं कर सकती हैं तो माफी मांगनी चाहिए।'' हालांकि इस पर प्रियंका गांधी ने कहा कि वो इसका प्रमाण उपलब्ध कर देंगी।
राहुल गांधी ने दिया था क्या बयान?
दरअसल, लोकसभा में नेता विपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने भी नए शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी को लेकर ऐसा ही बयान दिया था। राहुल गांधी ने नए शिक्षा मंत्री को लेकर प्रधानमंत्री के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि मंत्रिमंडल में कई लोग थे, लेकिन पीएम ने ऐसे व्यक्ति को चुना, जो दुष्कर्म के आरोपियों का बचाव करने वाला है। राहुल गांधी ने कहा कि शिक्षा मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पद पर ऐसे व्यक्ति की नियुक्ति गलत संदेश देती है।
भरोसा दोबारा बनाने के लिए उसी सिस्टम से जवाब नहीं ढूंढा जा सकता- प्रियंका
संसद में प्रियंका गांधी ने कहा, "इस सरकार ने रोजगार पैदा करने वाले सभी सेक्टरों को लगातार कमजोर किया है। पेपर लीक से करोड़ों छात्र प्रभावित हुए, लेकिन एक भी दोषी को सजा नहीं मिली। शिक्षण संस्थानों में संघ के प्रचारकों को भर-भरकर नियुक्त किया गया और संस्थाओं को खोखला बना दिया गया। एनटीए बनाकर परीक्षा प्रणाली का केंद्रीकरण कर दिया गया। हर साल शिक्षा बजट की हिस्सेदारी घटती चली गई। शिक्षा बजट उससे भी कम है, जितना पूंजीपतियों के लोन माफ किए गए हैं। सोचिए, सरकार की प्राथमिकता क्या है। उन्होंने आगे कहा, देश के युवाओं का भरोसा इस सिस्टम से टूट चुका है। भरोसा दोबारा बनाने के लिए उसी सिस्टम से जवाब नहीं ढूंढा जा सकता। इसके लिए सिस्टम के दायरे से बाहर निकलकर ठोस प्रयास करने पड़ते हैं।
धर्मेंद्र प्रधान पर भी साधा निशाना
उन्होंने कहा, ''प्रधानमंत्री और उनके साथी क्या सोच रहे हैं। शिक्षा मंत्री ने शर्मनाक परिस्थितियों में इस्तीफा दिया और संसद में उनका ऐसा स्वागत किया गया, जैसे कोई सुपरस्टार आया हो। कल जब उन्हें मुकुट पहनाया जा रहा था, उसी समय महाराष्ट्र का एक परिवार अपनी बेटी की आत्महत्या का मातम मना रहा था। जहां शर्म होनी चाहिए, वहां बेशर्मी से स्वागत किया जा रहा है। ऐसे में कोई आप पर कैसे यकीन करे।''