लोकसभा में सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और अन्य गड़बड़ियों को रोकने के लिए लाए गए विधेयक पर चर्चा के दौरान केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि संसद देर रात तक चल रही है ताकि छात्रों के भविष्य से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हो सके, लेकिन विपक्ष ने विधेयक के प्रावधानों पर बात करने के बजाय केवल राजनीतिक बयानबाजी की। उन्होंने कहा कि ऐसे महत्वपूर्ण विधेयक पर रचनात्मक सुझाव और सार्थक बहस होनी चाहिए।
रिजिजू ने कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के बयान का जिक्र करते हुए कहा कि अगर उन्होंने विधेयक पर बात की होती तो उन्हें इसकी अहमियत समझ में आती। उन्होंने कहा कि जब विपक्ष विधेयक पर चर्चा ही नहीं कर रहा है तो सरकार किस बात का जवाब दे। रिजिजू ने कहा कि संसद का देर रात तक चलना तभी सार्थक होगा, जब उसमें छात्रों के हित से जुड़े कानूनों पर गंभीर चर्चा हो और कमियों की ओर ध्यान दिलाने के साथ समाधान भी सुझाए जाएं।
क्या विपक्ष ने विधेयक के प्रावधानों पर चर्चा की?
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उन्हें इस बात का दुख है कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के किसी भी नेता ने विधेयक के वास्तविक प्रावधानों पर चर्चा नहीं की। उनके मुताबिक, किसी ने यह नहीं बताया कि बिल में क्या कमी है और न ही छात्रों के हित में शामिल अच्छे प्रावधानों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यदि विधेयक में कोई कमी है तो उसे सामने लाया जाना चाहिए, ताकि उस पर विचार किया जा सके।
छात्रों के हित में सरकार ने क्या तर्क दिया?
रिजिजू ने कहा कि सरकार परीक्षा में होने वाली गड़बड़ियों और पेपर लीक जैसी गंभीर समस्याओं पर सख्त कानून लाने के उद्देश्य से यह विधेयक लेकर आई है। उन्होंने कहा कि इस कानून का मकसद छात्रों के भविष्य की रक्षा करना और परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाना है। उनके अनुसार, ऐसे विषय पर राजनीति करने के बजाय कानून की उपयोगिता और उसके प्रावधानों पर चर्चा होनी चाहिए।
संसद देर रात तक चलने पर क्या बोले रिजिजू?
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि लंबे अंतराल के बाद संसद की कार्यवाही शुरू हुई है और देर रात तक चल रही है। उन्होंने कहा कि यह खुशी की बात है कि सांसद छात्रों के भविष्य जैसे महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा के लिए मौजूद हैं। हालांकि, उन्होंने अफसोस जताया कि विपक्ष ने इस अवसर का उपयोग विधेयक पर सार्थक चर्चा करने के बजाय राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में किया। उनके अनुसार, संसद में होने वाली बहस का उद्देश्य कानून को बेहतर बनाना होना चाहिए।