साल में सिर्फ 40 दिन पहुंचे स्कूल सांदीपनि विद्यालय के शिक्षक निलंबित

भोपाल। प्रदेश में शिक्षकों की मनमानी और ई-अटेंडेंस से परहेज पर शिक्षा विभाग ने अपना कड़ा रुख साफ कर दिया है। सतना जिले के रैगांव स्थित सांदीपनि विद्यालय में पदस्थ शिक्षक महीप सिंह को शासकीय कार्यों में गंभीर लापरवाही और उदासीनता के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
जन विश्वास अभियान के तहत 14 अगस्त को सांदीपनि स्कूल के आकस्मिक निरीक्षण के दौरान यह बड़ी गड़बड़ी सामने आई। निरीक्षण के दौरान शिक्षक महीप सिंह न केवल ड्यूटी से गायब मिले, बल्कि उन्होंने ई-अटेंडेंस भी दर्ज नहीं कराई थी। विद्यालय के उपस्थिति रजिस्टर की गहन जांच में पाया गया कि शिक्षक के नाम के आगे अक्सर ओडी (ऑफिशियल ड्यूटी), अनुपस्थित या लीव (एल) ही दर्ज रहता था। आंकड़ों के मुताबिक, वह पूरे साल में औसतन हर महीने महज 4 दिन (साल भर में कुल 40 दिन) ही स्कूल पहुंचे।
सिविल सेवा नियमों के तहत कार्रवाई
शिक्षा विभाग द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि शिक्षक का यह रवैया मध्यप्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम 3 के विपरीत गंभीर कदाचार है। इसी आधार पर ’मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966’ के नियम 9(1)(क) के तहत निलंबन की यह कार्रवाई की गई है। निलंबन की अवधि के दौरान शिक्षक महीप सिंह को जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय, सतना से संबद्ध किया गया है। नियमानुसार निलंबन काल में उन्हें जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा।
ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता पर तकरार
राज्य सरकार ने प्रदेश के सभी सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के लिए डिजिटल उपस्थिति यानी ई-अटेंडेंस को अनिवार्य कर दिया है। स्पष्ट निर्देश हैं कि पोर्टल पर उपस्थिति दर्ज न कराने वालों को गैर-हाजिर मानकर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। ई-अटेंडेंस के मामले में राज्य में यह दूसरी बड़ी निलंबन कार्रवाई है। दूसरी ओर, इस व्यवस्था को लेकर शिक्षकों और विभाग के बीच खींचतान जारी है। शिक्षक संघों का तर्क है कि दूर-दराज और ग्रामीण इलाकों में खराब नेटवर्क, सर्वर डाउन रहने और तकनीकी दिक्कतों के कारण ई-अटेंडेंस लगाना बेहद चुनौतीपूर्ण है। हालांकि, सरकार इस डिजिटल व्यवस्था को पूरी सख्ती से लागू करने के मूड में नजर आ रही है।
 


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