राज्य के खजाने पर बढ़ता दबाव, वित्त विभाग का बड़ा फैसला
भोपाल। राज्य के खजाने पर बढ़ते वित्तीय दबाव को नियंत्रित करने के लिए वित्त विभाग ने एक बड़ा नीतिगत फैसला लेते हुए सख्त रुख अपनाया है। नए आदेश के तहत अब केंद्र प्रायोजित (सीएसएस) और केंद्रीय क्षेत्र (सीएस) की योजनाओं में जब तक केंद्र सरकार से उसके हिस्से की राशि प्राप्त नहीं हो जाती, तब तक राज्य सरकार अपना राज्यांश जारी नहीं करेगी।
वित्त विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, केंद्रीय राशि आने से पहले राज्य के कोष से दिए जाने वाले अग्रिम भुगतान पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। केंद्र से फंड स्वीकृत कराए बिना मनमाने ढंग से बजट खर्च करने वाले विभागों पर अब शिकंजा कसा जाएगा। विभाग ने सभी विभागाध्यक्षों को इस नई व्यवस्था को सर्वाेच्च प्राथमिकता के साथ लागू करने के सख्त निर्देश दिए हैं। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि केंद्रांश लाने में देरी या लापरवाही बरतने पर संबंधित बजट नियंत्रण अधिकारी को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया जाएगा।
100 फीसदी केंद्रांश वसूली और पारदर्शिता पर जोर
वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए वित्त विभाग ने प्रमुख दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत केंद्र का पैसा आने से पहले राज्य के फंड से किए गए पूर्व भुगतानों की पूरी सूची तैयार की जाएगी। संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों से 100 फीसदी केंद्रांश की राशि जल्द से जल्द प्राप्त करने के लिए तत्काल प्रस्ताव भेजे जाएंगे। केंद्रीय नोडल एजेंसी (सीएनए) से सीधे बैंक खातों में आने वाली राशि को अब अनिवार्य रूप से राज्य ट्रेजरी में जमा कराना होगा। वेतन व अन्य योजनाओं से जुड़े सिंगल नोडल एजेंसी (एसएनए) रिफंड को पूर्व-निर्धारित बजट हेड (शीर्ष) में ही जमा किया जाएगा।
खजाने पर दबाव कम करने की कवायद
सरकार की इस पहले केंद्र का पैसा, फिर राज्य का पैसा नीति का मुख्य उद्देश्य राज्य के खजाने पर पड़ रहे अतिरिक्त वित्तीय बोझ को कम करना है। अक्सर केंद्र से राशि मिलने में देरी के बावजूद राज्य सरकार अपने कोष से एडवांस पेमेंट कर देती थी, जिससे राज्य की वित्तीय तरलता प्रभावित होती थी।