दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनेगा प्रदेश, राज्य संचालन समिति का गठन

भोपाल। प्रदेश को दलहन उत्पादन के क्षेत्र में देश का अग्रणी और पूर्णतः आत्मनिर्भर राज्य बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। प्रदेश में संचालित दलहन आत्मनिर्भरता मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन और पारदर्शी निगरानी के लिए 16 सदस्यीय राज्य संचालन समिति का गठन कर दिया गया है। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी यह आधिकारिक आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है, जिससे राज्य में दलहन क्रांति को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है।
गठित समिति की कमान प्रदेश के कृषि उत्पादन आयुक्त को सौंपी गई है, जबकि किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग के संचालक इसमें सदस्य सचिव की भूमिका निभाएंगे। समिति का ढांचा अंतर-विभागीय समन्वय को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है, जिसमें कृषि और संबद्ध क्षेत्रों के शीर्ष विशेषज्ञों को जगह मिली है। समिति में विभागीय प्रतिनिधि के रूप में सहकारिता, उद्यानिकी, वित्त और खाद्य विभाग के वरिष्ठ प्रतिनिधि, जबलपुर व ग्वालियर कृषि विश्वविद्यालयों के कुलपति तथा केंद्रीय मृदा विज्ञान संस्थान के विशेषज्ञ, नाबार्ड का प्रतिनिधित्व और केंद्र सरकार का एक नामित प्रतिनिधि और दलहन उत्पादक एफपीओ तथा सहकारी संस्थाओं के 2 प्रतिनिधि ष्षामिल किए गए हैं।
रणनीतिक रोडमैप और जिम्मेदारियां
यह उच्चस्तरीय समिति राज्य में दलहन का रकबा और उत्पादकता बढ़ाने के लिए बहुआयामी रणनीति पर काम करेगी। मुख्य रूप से समिति समग्र दलहन कार्ययोजना तैयार करना तथा अधिक उत्पादन वाले प्रमुख जिलों और क्लस्टरों को चिह्नित करना, मिशन के प्रमुख प्रदर्शन संकेतकों का नियमित आकलन करना और केंद्र सरकार को अद्यतन प्रगति रिपोर्ट भेजना, दलहन के भंडारण, प्रसंस्करण और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए आवंटित बजट का उचित उपयोग सुनिश्चित करना जैसी जिम्मेदारियों का निर्वहन करेगी।
साल में दो बार होगी बैठक
मिशन के सुचारू संचालन को बनाए रखने के लिए इस संचालन समिति की बैठक वर्ष में अनिवार्य रूप से दो बार आयोजित की जाएगी। सरकार की इस पहल से न केवल राज्य में दालों का उत्पादन बढ़ेगा और आयात पर निर्भरता कम होगी, बल्कि प्रसंस्करण व भंडारण सुविधाओं के मजबूत होने से किसानों को उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा और उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
 


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