राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र, शिक्षक भर्ती बढ़ाने की मांग
भोपाल। मध्यप्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के एक लाख से अधिक पद खाली होने का दावा करते हुए लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से शिक्षक भर्ती-2025 में पदों की संख्या बढ़ाने की मांग की है। पत्र में राहुल गांधी ने वर्ग-2 और वर्ग-3 के मौजूदा भर्ती पदों को अपर्याप्त बताते हुए कहा कि बड़ी संख्या में योग्य अभ्यर्थी परीक्षा में अच्छे अंक हासिल करने के बावजूद नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने आंदोलन कर रहे शिक्षक अभ्यर्थियों को भेजे गए नोटिस वापस लेने और उनकी समस्याएं सुनने की मांग भी की है।
राहुल गांधी ने पत्र में कहा कि शिक्षक भर्ती-2025 में वर्ग-3 के ’’13,089’’ और वर्ग-2 के ’’10,800 पद’’ घोषित किए गए हैं। उनके मुताबिक, प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की बड़ी संख्या में रिक्तियां हैं, ऐसे में भर्ती के पद बढ़ाने की जरूरत है। उनका कहना है कि इससे स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर करने के साथ योग्य युवाओं को स्थायी रोजगार का अवसर मिल सकेगा। राहुल गांधी ने कहा कि इंदौर में उनके सामने शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों ने पद बढ़ाने की मांग रखी थी। पत्र में उन्होंने दावा किया कि कई अभ्यर्थियों ने भर्ती परीक्षा में अच्छे अंक हासिल किए हैं और कुछ लंबे समय से अतिथि शिक्षक के रूप में काम भी कर रहे हैं। इसके बावजूद सीमित पदों के कारण उन्हें स्थायी नियुक्ति नहीं मिल सकी।
उम्र निकलने का भी उठाया मुद्दा
पत्र में उन अभ्यर्थियों की चिंता भी सामने रखी गई है, जो भर्ती के अवसर का इंतजार करते-करते आयु सीमा पार करने की स्थिति में पहुंच गए हैं। राहुल गांधी ने कहा कि ऐसे उम्मीदवारों के लिए भर्ती के अवसर बढ़ाना जरूरी है।
आंदोलनकारियों के नोटिस पर भी सवाल
शिक्षक भर्ती को लेकर प्रदर्शन और भूख हड़ताल कर रहे अभ्यर्थियों के मुद्दे पर भी राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री से कार्रवाई की मांग की है। पत्र में आरोप लगाया गया है कि मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे कुछ अभ्यर्थियों को नोटिस भेजे जा रहे हैं। राहुल गांधी ने इन नोटिसों को वापस लेने और आंदोलनकारी अभ्यर्थियों की शिकायतें सुनने की मांग की है।
सरकार के सामने रखी दो मांगें
राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री से शिक्षक भर्ती-2025 में वर्ग-2 और वर्ग-3 के पद बढ़ाने के साथ प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों की समस्याओं का समाधान करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों के रिक्त पद भरने से सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को भी इसका लाभ मिलेगा।
विद्यार्थियों के प्रदर्शन के बाद एक्शन, आरोपी शिक्षिका हटाया
भोपाल। राजधानी के मिसरोद स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में शिक्षिका पर गंभीर आरोप और छात्रों के भारी विरोध के बाद आखिरकार प्रशासन को झुकना ही पड़ा। विद्यार्थियों के मुद्दे पर संज्ञान लेते हुए जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) ने त्वरित प्रशासनिक कार्रवाई की है। विवादों में घिरीं फिजिक्स टीचर बबीता कुशवाहा को स्कूल से तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है।
गौरतलब है कि मिसरोद शासकीय स्कूल के छात्र-छात्राएं शिक्षिका के खिलाफ सड़क पर उतर आए थे और जमकर प्रदर्शन किया था। प्रदर्शनकारी छात्रों ने शिक्षिका पर घर के निजी काम कराने, लोहे की रॉड से मारपीट करने, परीक्षा में पास करने के नाम पर पैसों की मांग करने और छात्राओं पर आपत्तिजनक टिप्पणियां करने जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। बच्चों के आक्रोश को देखते हुए हरकत में आए डीईओ कार्यालय ने आदेश जारी कर बबीता कुशवाहा को मिसरोद स्कूल से हटाकर राज्य स्तरीय सेवा संकल्प अभियान की जिम्मेदारी सौंपी है।
वैकल्पिक इंतजाम भी किए
मिसरोद स्कूल में पठन-पाठन की व्यवस्था प्रभावित न हो, इसके लिए वैकल्पिक इंतजाम किए गए हैं। शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बरखेड़ा में पदस्थ शिक्षिका रेणुका श्रीवास्तव को अब मिसरोद स्कूल में शैक्षणिक कार्य की कमान सौंपी गई है। डीईओ द्वारा जारी दोनों आदेश आज 5 अक्टूबर से तत्काल प्रभाव से लागू कर दिए गए हैं। इस कार्रवाई के बाद छात्रों और अभिभावकों ने संतोष जताते हुए राहत की सांस ली है।
कूनो में फिर गूंजी किलकारी, भारत में जन्मी चीता केजेपी-21 ने दिया 5 शावकों को जन्म
देश में कुनबा बढ़कर हुआ 60, भारतीय धरती पर बोत्सवाना वंशावली की हुई ऐतिहासिक शुरुआत
भोपाल। मध्यप्रदेश के श्योपुर स्थित कूनो राष्ट्रीय उद्यान में सोमवार 5 अक्टूबर को ‘प्रोजेक्ट चीता’ के तहत एक नया इतिहास रचा गया। भारत की धरती पर ही जन्मी 32 माह की मादा चीता केजेपी-21 ने 5 स्वस्थ शावकों को जन्म दिया है। इस नई खुशखबरी के साथ ही देश में चीतों की कुल संख्या बढ़कर अब 60 हो गई है, जिनमें से 41 चीतों का जन्म भारत में ही हुआ है।
केजेपी-12 और मुखी के बाद केजेपी-21 तीसरी ऐसी भारतीय मूल की मादा चीता बन गई है, जिसने कूनो के जंगलों में नई पीढ़ी को जन्म दिया है। यह उपलब्धि भारत में चीता संरक्षण, वैज्ञानिक प्रबंधन और पुनर्स्थापना के प्रयासों की बड़ी सफलता मानी जा रही है। इन 5 नन्हे मेहमानों का जन्म एक और लिहाज से बेहद खास है। इन शावकों का पिता बोत्सवाना से लाया गया नर चीता है। इसके साथ ही भारत में पहली बार बोत्सवाना वंशावली की शुरुआत हुई है, जिससे देश में चीतों की आबादी में एक नया और मजबूत जेनेटिक (अनुवांशिक) विविधता का समावेश होगा।
मुख्यमंत्री ने जताई खुशी, टीम को दी बधाई
इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रोजेक्ट चीता से जुड़े वन्य अधिकारियों, पशु चिकित्सकों, मैदानी कर्मचारियों और प्रबंधन टीम को बधाई दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि वन्यजीव दल के समर्पण, प्रतिबद्धता और अथक प्रयासों का ही परिणाम है कि भारत में चीता पुनर्स्थापना की यह यात्रा नए आयाम छू रही है। इन नन्हें मेहमानों के आगमन ने कूनो की धरती पर वन्यजीव संरक्षण की उम्मीदों को नई उड़ान दी है।
उप मुख्यमंत्री देवड़ा, मंत्री टेटवाल ने सुनी समस्याएं
भोपाल। उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा एवं मंत्री गौतम टेटवाल ने सोमवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए पार्टी कार्यकर्ताओं से मुलाकात कर उनकी जनसमस्याओं एवं सुझावों को सुनकर संबंधित अधिकारियों को निराकरण के निर्देश दिए। जिन प्रकरणों में विभाग की कार्रवाई आवश्यक है, उन्हें शीघ्र निराकरण के लिए संबंधित विभागों को भेजा गया। उप मुख्यमंत्री देवड़ा एवं मंत्री टेटवाल ने कहा कि कार्यकर्ताओं के माध्यम से प्राप्त जनसमस्याओं का गंभीरतापूर्वक परीक्षण कर प्राथमिकता के आधार पर उसके समाधान का प्रयास किया जाएगा। आमजन की जनसमस्याओं का समाधान और उन्हें शासन की योजनाओं एवं सुविधाओं का लाभ सुनिश्चित करना मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार एवं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खण्डेलवाल के नेतृत्व में संगठन की सर्वाेच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।
85 हजार युवाओं को सरकारी नौकरी, अगले साल एक लाख से ज्यादा होगी भर्ती
कृषि विभाग के 3,357 कर्मचारियों को पदोन्नति, 44 युवाओं को अनुकंपा नियुक्ति, हर साल होगी डीपीसी
भोपाल। राज्य सरकार ने अगले वर्ष एक लाख से अधिक शासकीय पदों पर भर्ती का लक्ष्य तय किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सरकार अब तक 85 हजार से अधिक युवाओं को शासकीय सेवाओं में नियुक्ति दे चुकी है और भर्ती प्रक्रिया लगातार जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि सभी विभागों में पदोन्नति के लिए हर साल विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) कराई जाएगी, ताकि कर्मचारियों को समय पर पदोन्नति का लाभ मिल सके और इससे रिक्त होने वाले पदों को नई भर्ती के माध्यम से भरा जा सके।
मुख्यमंत्री सोमवार को रवींद्र भवन में किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग के पदोन्नत शासकीय सेवकों के अभिनंदन एवं आभार कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कृषि विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों और कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री को प्रतीक स्वरूप हल भेंट कर स्वागत किया। डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने एक साथ 3,357 शासकीय सेवकों को पदोन्नति का लाभ दिया है। इनमें किसान कल्याण एवं कृषि विभाग के 1,725, मध्यप्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड के 1,439, कृषि अभियांत्रिकी के 149, बीज प्रमाणीकरण के 36 और बीज निगम के आठ कर्मचारी शामिल हैं। इसके साथ ही 44 युवाओं को सहायक वर्ग-3 के पद पर अनुकंपा नियुक्ति के पत्र भी प्रदान किए गए।
अनुकंपा नियुक्ति, कोई पेंडेंसी नहीं रहेगी
मुख्यमंत्री ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति के मामलों में भी जल्द कोई पेंडेंसी नहीं रहेगी। सरकार का प्रयास है कि पात्र आश्रितों को समय पर नियुक्ति मिल सके। उन्होंने कहा कि पदोन्नति के लिए करीब एक दशक तक इंतजार करने के बावजूद कृषि विभाग के कर्मचारियों ने अपने दायित्वों के प्रति समर्पण बनाए रखा। पदोन्नति मिलने से उन्हें विशेष संतोष है।
मंडी बोर्ड में 1,500 से अधिक पदों पर भर्ती
मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2026 में कृषि विभाग के अंतर्गत मंडी बोर्ड में 600 मंडी निरीक्षक, 50 उपयंत्री, 30 सचिव और 100 डाटा एंट्री ऑपरेटर समेत 1,500 से अधिक पदों पर भर्ती पूरी की जाएगी। उन्होंने कहा कि पदोन्नति से रिक्त होने वाले पदों को भी समय पर भरने के लिए भर्ती प्रक्रिया जारी रहेगी।
कृषि को बताया प्रदेश के विकास का आधार
डॉ. यादव ने कहा कि कृषि विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की मेहनत का परिणाम है कि मध्यप्रदेश देश की फूड बास्केट के रूप में अपनी पहचान बना रहा है। परंपरागत खेती से लेकर तकनीकी नवाचार और कृषि आधारित उद्योगों तक विभाग किसानों के साथ काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश का विकास और सुख-समृद्धि कृषि से गहराई से जुड़ी है तथा कृषि विभाग सरकार की योजनाओं और नीतियों को फाइलों से निकालकर खेत की मेड़ों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
युवाओं से आज करेगे संवाद
सीएम यूथ कॉन्क्लेव-2026 को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि 6 अक्टूबर को भोपाल के लाल परेड ग्राउंड में यूथ कॉनक्लेव आयोजित हो रहा है। इसमें हजारों युवाओं से हम संवाद करेंगे। युवा भारत में सबसे युवा प्रदेश हमारा मध्यप्रदेश है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार युवाओं के हित में कई अभूतपूर्व कदम उठा रही है। युवाओं की बेहतर शिक्षा और रोज़गार के अवसर उपलब्ध करा रही है, विशेषकर शासकीय सेवाओं में नई भर्तियां और लंबे समय से अटकी पदोन्नति हमारी सरकार ने की है। कॉन्क्लेव में मध्यप्रदेश स्टार्टअप सेंटर द्वारा भी स्टॉल लगाए जाएंगे। यहां विभिन्न स्टार्टअप अपने नवाचार और उत्पादों को प्रदर्शित करेंगे। स्टार्टअप सेंटर के प्रस्तावित स्टॉल में स्टील्थविंग टेक्नोलॉजी, अनंतश्री व्हीकल्स, ईफ्यूल प्रोडक्ट्स, बायसो ऑर्गेनिक्स, फिक्सपॉइंट टेक्नोलॉजी जैसे स्टार्टअप शामिल है।
त्योहारों में वेंडरों को बेवजह न हटाएं, एनएचआरसी के निर्देश
भोपाल। नवरात्रि, दीपावली और छठ पूजा के दौरान स्थानीय वेंडरों, फेरीवालों, कुम्हारों और छोटे कारोबारियों की आजीविका और मानवाधिकारों की रक्षा को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश जारी किए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि त्योहारों के दौरान वेंडरों को अनावश्यक रूप से हटाने, उनका सामान जब्त करने या परेशान करने की कार्रवाई नहीं की जाए।
एनएचआरसी ने कहा कि यदि अग्नि सुरक्षा या सार्वजनिक सुरक्षा के कारण किसी स्थान को खाली कराना जरूरी हो, तो संबंधित वेंडरों को कारोबार के लिए उपयुक्त वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराया जाए। आयोग ने सामान की मनमानी जब्ती और अनावश्यक जुर्माने जैसी कार्रवाई से भी बचने को कहा है। वेंडरों के उत्पीड़न, जबरन वसूली या बेवजह हस्तक्षेप की शिकायत मिलने पर कानून के तहत कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
दरअसल, पिछले वर्ष त्योहारों के दौरान अलग-अलग शहरों से स्थानीय वेंडरों और फेरीवालों को हटाने, सामान जब्त करने और परेशान करने की शिकायतें सामने आई थीं। सदस्य प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली एनएचआरसी की पीठ ने मामले का संज्ञान लेते हुए मध्य प्रदेश सहित संबंधित राज्यों और स्थानीय अधिकारियों को शिकायतों की जांच कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए थे। आयोग ने स्थानीय प्रशासन से ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना के तहत स्थानीय वेंडरों, पारंपरिक व्यवसायों और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने को कहा है। मुख्य सचिवों को निर्देश दिए गए हैं कि वे आदेशों की जानकारी जिला प्रशासन, नगर निकायों, पुलिस और अन्य संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाएं। लंबित मामलों में की गई कार्रवाई की रिपोर्ट 18 अक्टूबर तक आयोग को सौंपनी होगी।
दिव्यांग यात्रियों के लिए यात्री बसों में आधा किराया नियम लागू
अवहेलना पर सीधे राज्य आयुक्त कार्यालय में होगी शिकायत
भोपाल। दिव्यांग यात्रियों के लिए सार्वजनिक परिवहन को सुगम और सुलभ बनाने के उद्देश्य से यात्री बसों के किराए में 50 प्रतिशत छूट का नियम प्रभावी रूप से लागू है। इसके बावजूद यदि कोई बस ऑपरेटर या कंडक्टर दिव्यांग यात्री से पूरा किराया वसूलता है, तो पीड़ित यात्री इसकी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। राज्य आयुक्त दिव्यांगजन का कार्यालय ऐसे मामलों की जांच और नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई के लिए अधिकृत है।
अधिकारियों के अनुसार, रियायती दर पर यात्रा का लाभ उठाने के लिए दिव्यांग यात्रियों को बस सफर के दौरान अपना दिव्यांगता प्रमाण पत्र या दिव्यांग कार्ड प्रस्तुत करना होगा। प्रमाण पत्र देखने के बाद बस अमले द्वारा निर्धारित किराए की केवल 50 प्रतिशत राशि ही ली जानी चाहिए। ट्रांसपोर्ट कमिश्नर उमेश जोगा ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश के सभी बस ऑपरेटरों को नियमानुसार निर्धारित छूट के तहत ही किराया वसूलना चाहिए। नियमों का उल्लंघन करने पर दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया
विभाग की ओर से दिव्यांगजनों से अपील की गई है कि वे राज्य आयुक्त कार्यालय द्वारा जारी आदेश की प्रति अपने जिले के जिला परिवहन अधिकारी कार्यालय में प्रस्तुत कर नियम पालन का आग्रह कर सकते हैं। यदि कोई कंडक्टर या बस संचालक नियमों का उल्लंघन कर पूरा किराया मांगता है, तो यात्री संबंधित परिवहन कार्यालय या राज्य आयुक्त दिव्यांगजन कार्यालय में शिकायत दर्ज करा सकते हैं। आयुक्त कार्यालय को शिकायतों की जांच करने तथा दोषी ऑपरेटरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हेतु सिफारिश या निर्देश जारी करने के पूर्ण अधिकार प्राप्त हैं।