एमपी के लाखों कर्मचारियों के लिए खुशखबरी! अब हर साल होगा प्रमोशन, ग्राम सेवकों का नाम भी बदला

सरकार ने साफ कर दिया था कि जो मर्जी आए करना पड़े, लेकिन पदोन्नति तो करनी पड़ेगी। अब सभी विभागों में पदोन्नति के लिए डीपीसी हर साल कराई जाएगी।

Publish Date: Mon, 05 Oct 2026 09:20:31 PM (IST)Updated Date: Mon, 05 Oct 2026 09:20:31 PM (IST)
  1. एमपी में 10 साल बाद पदोन्नति शुरू, हर साल होगी DPC बैठक
  2. अगले साल प्रदेश में 1 लाख पदों पर की जाएगी नई भर्ती
  3. ग्राम सेवक के पद का नाम बदलकर कृषि विस्तार अधिकारी हुआ

राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। प्रदेश में दस साल से पदोन्नतियां बंद थीं। अधिकारी विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की बैठक करना ही भूल गए थे। रिकॉर्ड न मिलने के कारण प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही थी। सरकार ने साफ कर दिया था कि जो मर्जी आए करना पड़े, लेकिन पदोन्नति तो करनी पड़ेगी। अब सभी विभागों में पदोन्नति के लिए डीपीसी हर साल कराई जाएगी।

पदोन्नति से रिक्त होने वाले पदों को समय पर भरने के लिए भर्ती प्रक्रिया भी लगातार जारी रहेगी। अगले साल एक लाख सरकारी रिक्त पदों पर भर्तियां कराई जाएंगी। यह बात मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को रवींद्र भवन में कृषि विभाग के पदोन्नत कर्मचारियों द्वारा आयोजित अभिनंदन समारोह में कही।

विभाग के 3,357 कर्मचारी पदोन्नत हुए हैं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने 44 दिवंगत कर्मचारियों के स्वजन को अनुकंपा नियुक्ति पत्र भी सौंपे। कृषि विभाग के जिन 3,357 कर्मचारियों को पदोन्नत किया गया है। उसमें कृषि विकास विभाग के 1,725, मंडी बोर्ड के 1,439, कृषि अभियांत्रिकी के 149, बीज प्रमाणीकरण के 36 और बीज निगम के आठ कर्मचारी शामिल हैं। विभाग के 44 दिवंगत कर्मचारियों के स्वजन को सहायक वर्ग-तीन के पद पर अनुकंपा नियुक्ति दी गई है।

85 हजार से अधिक रिक्त पदों पर युवाओं को रोजगार

मुख्यमंत्री ने कहा कि भविष्य में अनुकंपा नियुक्ति के मामले लंबित न रहें, इसका प्रयास रहेगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि अब तक 85 हजार से अधिक रिक्त पदों पर सरकार युवाओं को रोजगार दे चुकी है। अगले वर्ष एक लाख से अधिक पदों पर नई भर्ती करने का लक्ष्य रखा गया है। कृषि विभाग के अंतर्गत मंडी बोर्ड में 600 मंडी निरीक्षक, 50 उपयंत्री, 30 सचिव और 100 डाटा एंट्री आपरेटर सहित 1,500 से अधिक पदों पर भर्ती प्रक्रिया इसी वर्ष पूरी करने का लक्ष्य है।

गेहूं उपार्जन में देश में नंबर-1: फूड बास्केट बना मध्य प्रदेश

मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की मेहनत, निष्ठा और समर्पण का परिणाम है कि आज मध्य प्रदेश देश का फूड बास्केट बन चुका है। कृषि विभाग सिर्फ विभाग का नाम नहीं बल्कि यह विकास का भी नाम है। कृषि में ही प्रदेश का विकास छुपा है, इस दृष्टि से मध्य प्रदेश की सुख-समृद्धि का रास्ता कृषि विभाग से होकर जाता है। प्रदेश के माथे से बीमारू राज्य का कलंक हटाने में बड़ी भूमिका इस विभाग की रही है। इस वर्ष प्रदेश में करीब 14 लाख किसानों से 104 लाख टन गेहूं का उपार्जन किया गया है। गेहूं उपार्जन के मामले में मध्य प्रदेश देश में प्रथम स्थान पर रहा है।

जीएडी की कार्यप्रणाली पर कसा तंज: अब बंद होगी 'जलेबी की दुकान'

उन्होंने कार्यक्रम में सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) की कार्यप्रणाली पर तंज कसते हुए कहा कि भगवान के बाद अगर कर्मचारियों को किसी विभाग से डर लगता था, तो वह सामान्य प्रशासन विभाग था। वहां न जाने कौन-सी जलेबी बनती थी। हमने तय किया है कि यह जलेबी की दुकान ही बंद कराएंगे। प्रक्रियाओं को सरल बनाना जरूरी है, ताकि कर्मचारियों को बेवजह न भटकना पड़े।

ग्राम सेवकों का नाम बदला: अब कहलाएंगे 'कृषि विस्तार अधिकारी'

उधर, कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना ने कर्मचारियों की वर्षों पुरानी मांग को पूरा करते हुए ग्राम सेवक के पदनाम को बदलकर अब कृषि विस्तार अधिकारी कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके लिए विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों से योजनाओं को शत-प्रतिशत जमीन पर उतारना है।

 

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