
जस्टिस रंजना देसाई की अध्यक्षता में बनी समिति।
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। उत्तराखंड और गुजरात के बाद अब मध्य प्रदेश सरकार भी समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है। सुप्रीम कोर्ट से सेवानिवृत्त जस्टिस रंजना प्रसाद देसाई की अध्यक्षता में समिति का गठन करने के साथ ही विधि एवं विधायी विभाग ने अन्य राज्यों के कानून और तैयारी की विस्तृत जानकारी बुलाई है
कानून का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए 'जनसुनवाई' को आधार बनाया जाएगा। समिति आम लोगों, विशेषज्ञों और विभिन्न समुदायों से उनके सुझाव और आपत्तियां लेगी। बता दें, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पहले भी संकेत दिए हैं कि राज्य में सभी नागरिकों के लिए यूसीसी सामाजिक न्याय की दिशा में एक बड़ा कदम होगा।
सामान्य प्रशासन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि समिति की पहली बैठक में उत्तराखंड और गुजरात में अधिनियम बनाने के लिए जो कदम उठाए गए थे, उन्हें देखा जाएगा। चूंकि, दोनों राज्यों में आदिवासियों को कानून के दायरे से बाहर रखा गया है, इसलिए मध्य प्रदेश में भी ऐसा ही किए जाने की पूरी संभावना है। राज्य सरकार का सोचना है कि आदिवासियों की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान, परंपराओं और प्रथागत कानूनों को संरक्षित रखा जाना चाहिए।
समिति आदिवासियों के हित में काम करने वाले व्यक्तियों और संगठनों से उनके सुझाव लेगी। आम लोगों, विशेषज्ञों और विभिन्न समुदायों से उनके सुझाव और आपत्तियां लेने के लिए जनसुनवाई की जाएगी। इसमें सभी प्रभावित पक्षों को आमंत्रित किया जाएगा। यह प्रक्रिया 60 दिन के भीतर पूरी करके प्रारूप विधेयक और प्रतिवेदन तैयार करके सरकार को प्रस्तुत किया जाएगा। माना जा रहा है कि सब कुछ तय समयसीमा में हुआ तो इसे विधानसभा के अगस्त-सितंबर में प्रस्तावित मानसून सत्र में प्रस्तुत कर दिया जाएगा।
समान नागरिक संहिता के लिए समिति गठित करने पर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि भाजपा सरकार नई बहस खड़ी कर रही है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल अब भी अनुत्तरित है। क्या ये सरकार दलितों और आदिवासियों को न्याय दिला पाएगी? जिनकी अपनी परंपराएं, रीति-रिवाज और सांस्कृतिक पहचान अलग है, क्या उन पर यूसीसी थोपा नहीं जाएगा?