जेन जी असंतोष को साधने और मोदी सरकार के सफर को भुनाने का बनेगा रोडमैप

 प्रदेश कार्यकारिणी बैठक में युवाओं को जोड़ने और 17 सितंबर से अभियानों की तैयारी
भोपाल। देश भर में युवाओं (जेन जी) के उभरते आंदोलनों और मांगों के बीच भाजपा की प्रदेष इकाई की अत्यंत महत्वपूर्ण प्रदेश कार्यकारिणी बैठक 30 और 31 अगस्त को पवित्र नगरी ओरछा में आयोजित होने जा रही है। नवनिर्वाचित प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के कमान संभालने के बाद यह पहली कार्यकारिणी बैठक है। इस उच्चस्तरीय मंथन में पार्टी वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों के अनुकूल नए रणनीतिक एजेंडे को अंतिम रूप देगी।
दिल्ली के जंतर-मंतर से लेकर विभिन्न राज्यों तक फैले जेन जी के विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए भाजपा शीर्ष नेतृत्व बेहद गंभीर है। राष्ट्रीय स्तर पर गठित विशेष समिति की तर्ज पर ओरछा बैठक में जेन जी और जेन अल्फा को साधने के लिए ठोस राज्यस्तरीय योजना तैयार की जाएगी। पार्टी स्कूल और कॉलेज स्तर के छात्रों तक सीधी पहुंच बनाने के लिए नए आउटरीच कार्यक्रमों और बड़े युवा अभियानों की घोषणा कर सकती है, जिससे युवा असंतोष को सकारात्मक दिशा दी जा सके।
मोदी के 25 वर्षों का जश्न
इस बैठक में दूरगामी अभियानों की रूपरेखा भी खींची जाएगी। आगामी 17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन है, वहीं 7 अक्टूबर को उनके जनप्रतिनिधि (मुख्यमंत्री व प्रधानमंत्री) के रूप में 25 वर्ष पूरे हो रहे हैं। इस ऐतिहासिक अवसर को यादगार बनाने के लिए भाजपा कार्यकारिणी 17 सितंबर से 7 अक्टूबर तक जनसेवा और विकास केंद्रित बड़े कार्यक्रमों के आयोजन की विस्तृत योजना की घोषणा करेगी।
2028 चुनाव की रणनीति पर मंथन
बैठक में 2028 में होने वाले मध्य प्रदेश विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए एक लंबी अवधि की चुनावी रणनीति भी तैयार की जाएगी। एक और अहम एजेंडा दतिया में पार्टी की हार की समीक्षा करना है।  नेतृत्व वहां के राजनीतिक हालात और हार के संभावित कारणों पर गहराई से विचार करेगा ताकि भविष्य में ऐसी गलतियों से बचा जा सके। ओरछा में इकट्ठा होने वाले पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी इस मंच का इस्तेमाल संगठन को और मजबूत और सक्रिय बनाने की दिशा में नई रणनीति बनाने के लिए करेंगे।
संगठन को मजबूती देने पर रहेगा फोकस
बैठक में मुख्य फोकस संगठन को जमीनी स्तर पर और मजबूत करने पर है। पार्टी नेताओं के मुताबिक, संगठन को अधिक सक्रिय बनाने के लिए कार्यसमिति के सभी 106 सदस्यों को अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है, इसके जरिए हर विधानसभा क्षेत्र में बूथ स्तर तक संगठन की पकड़ मजबूत करने और कार्यकर्ताओं को ज्यादा सक्रिय करने की योजना है। हर बूथ, सबसे मजबूत अभियान के तहत पार्टी जमीनी कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने के साथ ही उन क्षेत्रों में अपना प्रभाव बढ़ाने की रणनीति पर भी काम कर रही है, जिन्हें अब तक विपक्षी दलों का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है।
 


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