MP Politics: मोहन सरकार की नियुक्तियों में ‘सियासी संतुलन’ का फॉर्मूला,सिंधिया-तोमर-संघ और संगठन सभी को साधा

Anand Pawar    Updated Sun, 26 Apr 2026 09:52 PM IST

ग्वालियर-चंबल क्षेत्र की रानीतिक नियुक्तियों को देखकर माना जा रहा है कि मोहन सरकार ने अलग-अलग शक्ति केंद्रों के बीच संतुलन साधने की कोशिश की है।

MP Politics: Mohan govt appointments seek political balance, aligning Scindia, Tomar, the Sangh, organisation

भाजपा का झंडा - फोटो : ANI

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मध्यप्रदेश में लंबे समय से लंबित निगम-मंडल, आयोग और प्राधिकरणों में नियुक्तियों का दौर अब तेज हो गया है। हालिया आदेशों को देखें तो साफ संकेत मिल रहे हैं कि मोहन सरकार सिर्फ रिक्त पद भरने तक सीमित नहीं है, बल्कि इन नियुक्तियों के जरिए क्षेत्रीय और संगठनात्मक समीकरण भी साध रही है। खासतौर पर ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में यह रणनीति स्पष्ट दिखाई दे रही है। सबसे ज्यादा चर्चा केपी यादव की नियुक्ति को लेकर है। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने तत्कालीन कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया को हराया था। बाद में सिंधिया के भाजपा में आने के बाद भी यादव उनके खिलाफ कई मुद्दों पर मुखर रहे, हालांकि समय-समय पर दोनों नेताओं को साथ भी देखा गया। 2024 लोकसभा चुनाव में भाजपा ने केपी यादव का टिकट काटकर सिंधिया को उम्मीदवार बनाया था। इसके बावजूद केपी यादव ने बगावती तेवर नहीं अपनाए। उस दौरान केंद्रीय नेता अमित शाह ने उन्हें भविष्य में बड़ी जिम्मेदारी देने का संकेत दिया था। अब उन्हें सिविल सप्लाईज कॉर्पोरेशन का अध्यक्ष बनाकर पार्टी ने बड़ा संदेश दिया है। 
गुप्ता सिंधिया समर्थक, अशोक जादौन तोमर खेमे से 
वहीं, ग्वालियर विकास प्राधिकरण की कमान मधुसूदन भदौरिया को सौंपी गई है, जिन्हें संघ पृष्ठभूमि का नेता माना जाता है। वे भाजपा संगठन में महामंत्री भी रह चुके हैं। इसे संघ और संगठन के प्रतिनिधित्व के तौर पर देखा जा रहा है। इसके उपाध्यक्ष सुधीर गुप्ता को सिंधिया समर्थक, जबकि वेद प्रकाश शिवहरे को नरेंद्र सिंह तोमर खेमे से जुड़ा माना जाता है। इसके अलावा अशोक जादौन को ग्वालियर मेला प्राधिकरण का अध्यक्ष और उदयवीर सिंह गुर्जर को उपाध्यक्ष बनाया गया है। अशोक जादौन को विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर का करीबी माना जाता है।
सभी को साथ लेकर बढ़ने की रणनीति 
वहीं, अशोक शर्मा को ग्वालियर विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण का अध्यक्ष बनाया गया है। वे पहले कांग्रेस में रहे हैं और बाद में भाजपा में शामिल हुए। उन्हें सिंधिया खेमे से जोड़कर देखा जाता है। पूर्व विधायक रामनिवास रावत की नियुक्ति भी चर्चा में है। लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा में आए रावत को पहले वन मंत्री बनाया गया था, लेकिन उपचुनाव हारने के बाद उन्हें पद छोड़ना पड़ा। अब उन्हें वन विकास निगम लिमिटेड का अध्यक्ष बनाया गया है। उन्हें मुख्यमंत्री मोहन यादव के करीबी नेताओं में गिना जाता है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इन नियुक्तियों के जरिए भाजपा ने साफ संकेत दिया है कि संगठन, संघ, सिंधिया समर्थक और नए सहयोगियों सभी को साथ लेकर आगे बढ़ने की रणनीति पर काम किया जा रहा है।

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