पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया उबाल आ गया है। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (एनसीएससी) ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने एक बंगाली समाचार चैनल पर प्रसारित वीडियो क्लिप का स्वतः संज्ञान लिया है। इस वीडियो में मुख्यमंत्री कथित तौर पर अनुसूचित जाति (एससी) समुदाय के प्रति अपमानजनक भाषा का प्रयोग कर रही हैं। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब राज्य में विधानसभा चुनाव की सरगर्मी चरम पर है
संवैधानिक शक्तियों का प्रयोग
एनसीएससी की निदेशक सोनाली दत्ता ने रविवार को राज्य के मुख्य सचिव दुष्यंत नारियाला और पुलिस महानिदेशक सिद्ध नाथ गुप्ता को आधिकारिक पत्र भेजा है। आयोग ने स्पष्ट किया कि वह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 338 के तहत प्राप्त शक्तियों का उपयोग कर रहा है। इस अनुच्छेद के अंतर्गत आयोग को अनुसूचित जाति के हितों की रक्षा के लिए जांच और पड़ताल करने का पूरा अधिकार है। आयोग ने इस पूरी घटना को बेहद गंभीरता से लिया है
प्रशासन को अल्टीमेटम
आयोग ने राज्य प्रशासन को कार्रवाई के लिए बहुत कम समय दिया है। पत्र के माध्यम से मुख्य सचिव और डीजीपी को निर्देश दिया गया है कि वे तीन दिनों के भीतर एक्शन टेकन रिपोर्ट जमा करें। आयोग जानना चाहता है कि अब तक इस मामले में क्या शुरुआती जांच की गई है। साथ ही, वीडियो में कही गई आपत्तिजनक बातों पर प्रशासन ने क्या कदम उठाए हैं, इसका ब्योरा भी मांगा गया है। समन और सिविल कोर्ट की चेतावनी
आयोग ने कहा है कि यदि निर्धारित तीन दिनों में जवाब नहीं मिला, तो वह सख्त कानूनी कदम उठाएगा। एनसीएससी के पास संविधान के अनुच्छेद 338 के तहत सिविल कोर्ट की शक्तियां होती हैं। यदि प्रशासन सहयोग नहीं करता है, तो आयोग मुख्य सचिव और डीजीपी को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए समन जारी कर सकता है। उन्हें आयोग के सामने हाजिर होकर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी।
चुनाव पर असर की संभावना
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को होना है। इस चरण में कोलकाता सहित छह जिलों की 142 सीटों पर वोट डाले जाएंगे। राज्य में एससी समुदाय की आबादी और उनका वोट बैंक हार-जीत में बड़ी भूमिका निभाता है। ऐसे में मतदान से ठीक तीन दिन पहले आयोग का यह नोटिस ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है।