दूरसंचार विभाग और मध्य प्रदेश सरकार के बीच ग्वालियर में टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन (TMZ)

स्थापित करने के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर

देश का पहला टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन बनेगा ग्वालियर

पहले चरण के बुनियादी ढांचे के विकास के लिए केंद्र सरकार देगी ₹493 करोड़

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को मिलेगा नया बल

Posted On: 30 JUL 2026 9:58PM by PIB Bhopal

भारत सरकार के दूरसंचार विभाग (DoT) और मध्य प्रदेश सरकार ने आज ग्वालियर में देश का पहला टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन (TMZ) स्थापित करने के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए।

इस अवसर पर केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तथा केंद्रीय संचार एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी उपस्थित रहे।

यह परियोजना भारत में दूरसंचार उपकरणों के घरेलू निर्माण को बढ़ावा देने और प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत, मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया तथा विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

ग्वालियर में लगभग 350 एकड़ क्षेत्र में अत्याधुनिक प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक क्लस्टर विकसित किया जाएगा। यहां दूरसंचार और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण, अनुसंधान एवं विकास (R&D), नवाचार और अन्य संबंधित गतिविधियों के लिए विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इससे ग्वालियर को मध्य भारत के प्रमुख औद्योगिक और तकनीकी केंद्र के रूप में विकसित करने में मदद मिलेगी।

परियोजना के संचालन के लिए एक स्पेशल पर्पज व्हीकल (SPV) बनाया जाएगा, जिसमें 51 प्रतिशत हिस्सेदारी मध्य प्रदेश सरकार और 49 प्रतिशत हिस्सेदारी दूरसंचार विभाग की होगी।

परियोजना के पहले चरण के लिए केंद्र सरकार ₹493 करोड़ की पूरी वित्तीय सहायता प्रदान करेगी। वहीं मध्य प्रदेश सरकार लगभग 170 एकड़ भूमि निःशुल्क उपलब्ध करा रही है, जिसकी अनुमानित कीमत ₹596 करोड़ है। इसके अलावा अतिरिक्त भूमि ₹1 प्रीमियम और ₹1 प्रति वर्गमीटर वार्षिक लीज़ किराए पर 30 वर्षों के लिए उपलब्ध कराई जाएगी।

टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन में उद्योग लगाने वाली इकाइयों को स्टाम्प शुल्क एवं पंजीयन शुल्क में छूट, बिजली शुल्क में रियायत सहित कई वित्तीय प्रोत्साहन दिए जाएंगे।

राज्य सरकार की विशेष औद्योगिक नीति के तहत पात्र इकाइयों को ₹200 करोड़ तक की पूंजीगत सब्सिडी, बड़े निवेश वाले उद्योगों के लिए प्रति कर्मचारी ₹5,000 प्रतिमाह (पांच वर्ष तक) रोजगार सहायता तथा नए कर्मचारियों के कौशल विकास के लिए ₹13,000 तक की सहायता भी मिलेगी।

निर्यात को बढ़ावा देने के लिए तैयार उत्पादों के परिवहन पर पात्र इकाइयों को 50 प्रतिशत तक माल भाड़ा सहायता दी जाएगी। साथ ही अनुसंधान एवं विकास (R&D) इकाइयों तथा पेटेंट, कॉपीराइट और ट्रेडमार्क पंजीकरण पर भी वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

इस परियोजना में पहले चरण में लगभग ₹5,000 करोड़ के निवेश की संभावना है, जबकि भविष्य में कुल निवेश ₹12,000 से ₹15,000 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। इससे लगभग 14,000 प्रत्यक्ष रोजगार और हजारों अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे।

इस ज़ोन से Dixon Technologies, HFCL, Tejas Networks, VVDN और Syrma SGS जैसी प्रमुख दूरसंचार एवं इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियां जुड़ेंगी।

यह टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन मोबाइल फोन, ऑप्टिकल फाइबर, राउटर, एंटीना, सेमीकंडक्टर, 5G और 6G तकनीक सहित पूरी दूरसंचार मूल्य श्रृंखला को एक ही स्थान पर विकसित करेगा। यहां अनुसंधान एवं विकास केंद्र, परीक्षण प्रयोगशालाएं और प्रमाणन सुविधाएं भी स्थापित की जाएंगी।

यह परियोजना इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM), इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS) और टेलीकॉम टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट फंड (TTDF) जैसी राष्ट्रीय योजनाओं के साथ मिलकर देश में दूरसंचार उपकरणों के स्वदेशी निर्माण को बढ़ावा देगी, आयात पर निर्भरता कम करेगी, निर्यात बढ़ाएगी और दूरसंचार सुरक्षा को मजबूत करेगी।

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि ग्वालियर में देश का पहला टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन स्थापित होना एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि अब भारत को केवल दूरसंचार सेवाएं देने वाला देश नहीं, बल्कि दूरसंचार उपकरण बनाने वाला अग्रणी देश बनना होगा और यह परियोजना उसी दिशा में एक बड़ा कदम है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि यह परियोजना श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के निरंतर प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह ज़ोन मध्य प्रदेश को इलेक्ट्रॉनिक्स और दूरसंचार निर्माण का राष्ट्रीय केंद्र बनाएगा तथा राज्य में निवेश, रोजगार और तकनीकी नवाचार को नई गति देगा।

केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी ने कहा कि यह देश की पहली ऐसी परियोजना होगी, जहां अनुसंधान, डिज़ाइन, परीक्षण, कौशल विकास और निर्माण जैसी पूरी प्रक्रिया एक ही परिसर में उपलब्ध होगी। इससे भारत वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी दूरसंचार उत्पाद विकसित कर सकेगा।

एमओयू हस्ताक्षर के बाद आयोजित निवेशक गोलमेज बैठक में देशभर की प्रमुख दूरसंचार कंपनियों और उद्योग प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस दौरान उद्योग जगत ने इस पहल का स्वागत करते हुए इसे दूरसंचार क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक अवसर बताया। बैठक के अंत में उद्योगों ने ₹3,500 करोड़ के निवेश और 14,000 रोजगार सृजित करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।

ग्वालियर में टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन की स्थापना भारत को दूरसंचार निर्माण और नवाचार के क्षेत्र में वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह परियोजना निवेश बढ़ाने, रोजगार सृजित करने, निर्यात को प्रोत्साहित करने, स्वदेशी तकनीक विकसित करने और देश की दूरसंचार आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाएगी।

azadi ka amrit mahotsav

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