दतिया विधानसभा उपचुनाव 2026 में गुरुवार को 71.44 प्रतिशत मतदान हुआ। यह 2023 के मुकाबले करीब नौ फीसदी कम है। इससे सत्तारूढ़ दल भाजपा और विपक्षी कांग्रेस नेता चौंक गए हैं। अब तीन अगस्त को होने वाली मतगणना का सभी को इंतजार है। नतीजे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी की राजनीतिक साख पर भी असर डालेंगे।
दतिया उपचुनाव सिर्फ एक विधानसभा सीट का चुनाव नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश की राजनीति में भाजपा और कांग्रेस की ताकत आजमाने का बड़ा पैमाना माना जा रहा है। इसका परिणाम प्रदेश की राजनीति को कई संदेश देगा। नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने के बाद दतिया जिला भाजपा संगठन ने एक साथ इस्तीफा दे दिया था। इसलिए इसे भाजपा के लिए बड़ा उपचुनाव माना जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में भाजपा के लिए इस सीट को जीतना प्रतिष्ठा का विषय बन गया है। यदि भाजपा सीट कांग्रेस से छीनने में सफल रहती है तो इसे सरकार के कामकाज, संगठन की रणनीति और मुख्यमंत्री के नेतृत्व पर जनता की मुहर के रूप में देखा जाएगा। वहीं, भाजपा की फिर हार की स्थिति में विपक्ष को सरकार पर सवाल उठाने का मौका मिलेगा।
पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा के लिए भी यह चुनाव बेहद अहम माना जा रहा है। दतिया उनकी राजनीतिक कर्मभूमि रही है और वर्षों तक उन्होंने इस क्षेत्र में मजबूत संगठन खड़ा किया। माना जा रहा था कि उपचुनाव में भाजपा उन्हें ही उम्मीदवार बनाएगी। उन्होंने चुनावी तैयारियां भी शुरू कर दी थीं, लेकिन अंतिम समय में पार्टी ने आशुतोष तिवारी को टिकट दे दिया। टिकट बदलने के फैसले के बाद कार्यकर्ताओं में नाराजगी भी सामने आई और विरोध प्रदर्शन भी हुए। बाद में नरोत्तम मिश्रा स्वयं तिवारी के समर्थन में प्रचार में उतरे और घर-घर जाकर भाजपा प्रत्याशी के समर्थन में मतदान की अपील की। ऐसे में यदि भाजपा जीतती है तो इसे क्षेत्र में उनकी संगठनात्मक पकड़ और प्रभाव कायम रहने के संकेत के रूप में देखा जाएगा। वहीं, हार की स्थिति में टिकट चयन और स्थानीय असंतोष को लेकर सवाल उठ सकते हैं।
पटवारी के लिए अग्नि परीक्षा
दूसरी ओर, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के लिए भी यह उपचुनाव किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है। लोकसभा चुनाव के बाद कांग्रेस लगातार संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भरने की कोशिश कर रही है। यदि कांग्रेस यह सीट बचाने में सफल रहती है तो इसे पटवारी की रणनीति और विपक्ष की सक्रियता की बड़ी सफलता माना जाएगा। वहीं हार कांग्रेस संगठन के लिए बड़ा झटका मानी जाएगी।
यह उपचुनाव कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त होने के बाद हो रहे हैं। एक आपराधिक मामले में अदालत द्वारा उन्हें तीन वर्ष की सजा सुनाए जाने के बाद जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के प्रावधानों के तहत उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त हो गई थी। कांग्रेस ने इस बार दतिया राजघराने से जुड़े घनश्याम सिंह को उम्मीदवार बनाया है, जबकि भाजपा ने आशुतोष तिवारी पर दांव लगाया है।