हमीदिया अस्पताल के इंटर्न डॉक्टरों के स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर किए गए प्रदर्शन का असर सोमवार शाम भोपाल के बड़े हिस्से के यातायात पर पड़ा। मुख्यमंत्री निवास की ओर मार्च के दौरान पुलिस द्वारा रोके जाने और इसके बाद हुए घटनाक्रम के चलते कमला पार्क से शाहजहानाबाद तक कई प्रमुख मार्गों पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। करीब 4 से 5 किलोमीटर तक जाम की स्थिति बनी रही। प्रदर्शनकारियों को मोती मस्जिद, फतेहगढ़ और मुख्यमंत्री निवास से करीब 200 मीटर पहले रोकने के दौरान पुलिस और इंटर्न डॉक्टरों के बीच झड़प हुई। पुलिस ने वाटर कैनन चलाया। डॉक्टरों ने बल प्रयोग और लाठीचार्ज का आरोप लगाया। इसके बाद बड़ी संख्या में डॉक्टर सड़क पर बैठ गए, जिससे यातायात प्रभावित हुआ।
इन इलाकों में सबसे ज्यादा असर
कमला पार्क, लालघाटी, रॉयल मार्केट, पीरगेट, फिजा, जहांगीराबाद, भोपालपुरा, जिंसी, रायसेन रोड, हमीदिया रोड, पॉलिटेक्निक चौराहा, रेतघाट, मोती मस्जिद, फतेहगढ़ और शाहजहानाबाद तक वाहनों की आवाजाही प्रभावित रही। जाम में बसों, ऑटो और निजी वाहनों के साथ एंबुलेंस भी फंसने की जानकारी सामने आई। कई लोग एक से तीन घंटे तक जाम में फंसे रहे। परीक्षा देने जा रहे बाइक-स्कूटी सवारों और अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों के परिजनों को भी परेशानी हुई। जाम के कारण ऑटो और वाहन चालकों को सवारियां छोड़नी पड़ीं और कई लोगों की रोजाना की कमाई प्रभावित हुई।
पुलिस-डॉक्टरों की बातचीत के बाद कुछ रास्ता खुला
कलेक्टर प्रियंक मिश्रा मौके पर पहुंचे और इंटर्न डॉक्टरों से बातचीत की। बातचीत के बाद डॉक्टरों ने सड़क का एक हिस्सा खाली किया, जिससे यातायात धीरे-धीरे सामान्य हुआ। हालांकि, डॉक्टरों का कहना है कि लिखित आश्वासन मिलने तक आंदोलन जारी रहेगा
समर्थन में जेडीए और मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन
पुलिस कार्रवाई के विरोध में जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन ने इंटर्न डॉक्टरों के समर्थन का ऐलान किया है। संगठन ने नियमित ओपीडी और वैकल्पिक ऑपरेशन सेवाएं अगले आदेश तक बंद रखने की घोषणा की है। हालांकि, आपातकालीन और गंभीर मरीजों की सेवाएं जारी रखने की बात कही गई है। वहीं मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन मध्यप्रदेश ने भी इंटर्न डॉक्टरों के समर्थन में मोर्चा खोल दिया है। प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राकेश मालवीय ने कहा कि डॉक्टरों के साथ दमन हुआ तो इंटर्न, जूनियर डॉक्टर और मेडिकल शिक्षक एकजुट होकर आंदोलन करेंगे। इंटर्न डॉक्टर फिलहाल 14,337 प्रतिमाह स्टाइपेंड मिलने की बात कहते हुए इसे बढ़ाकर ₹30 हजार करने की मांग कर रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि उन्हें मौखिक आश्वासन नहीं, बल्कि स्टाइपेंड बढ़ाने का लिखित आदेश चाहिए।