दिल्ली पीजी हादसे के बाद बड़ा खुलासा: हॉस्टल के एग्रीमेंट में लिखा था, हादसा हुआ तो छात्र खुद जिम्मेदार

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विकास कुमार Updated Mon, 07 Sep 2026 10:05 PM IST

पीजी संचालक रेंट एग्रीमेंट में ऐसी बारीक शर्तें थोप देते हैं, जिससे किसी हादसे या घटना होने पर उनकी गर्दन बची रहे। कुछ ऐसा ही एग्रीमेंट 'हास्टल डेज' में रहने वाले छात्रों ने भी किया था। इंटरनेट मीडिया पर भी ऐसा ही एक रेंट एग्रीमेंट सोमवार को तेजी से प्रसारित होता रहा है।

satya niketan PG incident hostel agreement stated students held personally responsible of accident

सत्य निकेतन पीजी हादसा - फोटो : अमर उजाला

दिल्ली के सत्य निकेतन में रविवार को पांच मंजिला इमारत गिरने से छह लोगों की मौत के बाद अब इस हादसे की वजह और जिम्मेदारी को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। शुरुआती जांच में इमारत के निर्माण, उसमें हुए बदलाव और सुरक्षा इंतजामों को लेकर भी सवाल सामने आए हैं। स्थानीय लोगों ने भी इलाके में इमारतों की हालत और निर्माण गतिविधियों को लेकर सवाल उठाए हैं। वहीं, एमसीडी और पुलिस की जांच में भी कुछ गंभीर बातें सामने आई हैं।

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Delhi building collapse - फोटो : अमर उजाला

रेंट एग्रीमेंट की ऐसी शर्तें, स्वयं के साथ हादसे के लिए छात्र ही जिम्मेदार
पीजी संचालक रेंट एग्रीमेंट में ऐसी बारीक शर्तें थोप देते हैं, जिससे किसी हादसे या घटना होने पर उनकी गर्दन बची रहे। कुछ ऐसा ही एग्रीमेंट 'हॉस्टल डेज' में रहने वाले छात्रों ने भी किया था। इंटरनेट मीडिया पर भी ऐसा ही एक रेंट एग्रीमेंट सोमवार को तेजी से प्रसारित होता रहा है। दरअसल, परेशानियों के बीच रहने की विवशता के चलते ज्यादातर जगहों पर छात्र इसी तरह के एकतरफा एग्रीमेंट के जाल में फंसते हैं। 

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Delhi building collapse - फोटो : अमर उजाला

रेंट एग्रीमेंट में चेतावनी भी
प्रसारित रेंट एग्रीमेंट में किराएदार की जिम्मेदारियों को विस्तार से बताया गया है। इसमें तीन महीने की सिक्योरिटी और एक महीने का एडवांस किराया देने की बात है। साथ ही, यह भी कहा गया है कि एग्रीमेंट की अवधि खत्म होने से पहले किसी भी हालत में सिक्योरिटी डिपॉजिट वापस नहीं किया जाएगा और चेतावनी दी गई है कि फर्नीचर या फिक्स्चर को हुए किसी भी नुकसान की भरपाई इसी डिपाजिट से की जाएगी। 

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Delhi building collapse - फोटो : अमर उजाला

कोई भी हादसा हुआ तो छात्र खुद उसका जिम्मेदार
एग्रीमेंट की बारीक शर्तों में यह भी लिखा है कि 'पीजी प्रशासन मेरे (छात्र के) साथ होने वाली किसी भी दुर्घटना या जोखिम के लिए जिम्मेदार नहीं है। एग्रीमेंट छात्रों को दीवारों पर पोस्टर या स्टिकर चिपकाने से भी रोकता है। कोई छात्र तय समय से पहले किसी भी कारण से चला भी जाता है, तो हास्टल फीस या सिक्योरिटी मनी का कोई रिफंड नहीं होगा।

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Delhi building collapse - फोटो : अमर उजाला

मंदिर में इधर-उधर घूम रहा था मालिक
इमारत मालिक हरीराम गुप्ता भिवाड़ी में मंदिर में इधर-उधर घूमता रहा। वह दिल्ली से पत्नी व बेटे के साथ फरार हुए। उनकी पत्नी व बेटे गुरुग्राम में ही रहे, जबकि वह भिवाड़ी चले गए। आरोपी ने पूछताछ में बताया कि वह वकील की तलाश में घूम रहे थे। उन्होंने पूछताछ में अपनी गलतियां स्वीकार की हैं।

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इमारत में दरार, सीलन और पानी जमा होने जैसी समस्याएं थीं
स्थानीय लोगों ने बताया कि बेसमेंट में पानी जमा होता था और वहां काम चल रहा था। इलाके में पानी भरने और इमारतों की नियमित जांच न होने को लेकर पहले से शिकायतें थीं। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि मरम्मत शुरू करने से पहले इमारत की संरचनात्मक स्थिति की जांच की गई थी या नहीं। यह भी देखा जा रहा है कि मरम्मत के दौरान किसी भार उठाने वाले हिस्से में बदलाव तो नहीं किया गया। यानी सवाल है कि अगर इमारत में दरार, सीलन और पानी जमा होने जैसी समस्याएं थीं, तो मरम्मत शुरू करने से पहले क्या किसी काबिल इंजीनियर से उसकी स्ट्रक्चरल जांच कराई गई थी?

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बेसमेंट में किया गया निर्माण अनधिकृत था
घटना की चश्मदीद स्वाति ने बताया कि जो इमारत गिरी उसके बेसमेंट में काम चल रहा था। एक वरिष्ठ एमसीडी अधिकारी ने बताया कि इस इमारत का कोई मंजूर बिल्डिंग प्लान रिकॉर्ड में नहीं मिला है। एमसीडी के मुताबिक, करीब 55 वर्ग गज के प्लॉट पर बनी इस इमारत में बेसमेंट और ग्राउंड फ्लोर के ऊपर चार मंजिलें थीं। बेसमेंट में किया गया निर्माण अनधिकृत था। स्थानीय लोगों ने दावा किया कि इमारत में करीब दो साल पहले दो अतिरिक्त मंजिलें बनाई गई थीं। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि ये मंजिलें कब और कैसे बनीं और क्या इनके लिए अनुमति ली गई थी। तो सवाल है क्या निर्माण या बाद में किए गए बदलाव मंजूर थे, या नहीं थे?

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पिछले साल एक संस्था को लीज पर दी गई थी 
हादसे वाली इमारत 55 वर्ग गज के प्लॉट पर बनी थी और बाद में इसे पीजी में बदल दिया गया। यह इमारत पिछले साल एक संस्था को लीज पर दी गई थी और छात्रों के रहने के लिए इस्तेमाल हो रही थी। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि पीजी चलाने के लिए जरूरी अनुमति थी या नहीं और इमारत सुरक्षा मानकों पर खरी उतरती थी या नहीं। सवाल है कि क्या इस इमारत को बड़ी संख्या में छात्रों के रहने वाले पीजी के तौर पर इस्तेमाल करने की अनुमति थी? क्या इमारत में रहने वालों की संख्या के हिसाब से सीढ़ियां, निकासी के रास्ते और दूसरी जरूरी सुविधाएं पर्याप्त थीं?

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इमारत के पास फायर एनओसी नहीं थी
क्या इमारत में आपात स्थिति से बचने के पर्याप्त इंतजाम थे? स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं कि रिहायशी इलाकों में इमारतों को पीजी के तौर पर चलाने की अनुमति क्यों दी गई? हादसे के बाद इमारत के आपात निकास को लेकर भी सवाल उठे हैं। इमारत में दूसरा निकास नहीं था, जिससे किसी आपात स्थिति में लोगों को बाहर निकलने में दिक्कत हो सकती थी। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि पीजी चलाने के लिए जरूरी सुरक्षा मानकों का पालन हुआ था या नहीं। एक वरिष्ठ एमसीडी अधिकारी के हवाले से बताया कि इमारत के पास फायर एनओसी नहीं थी। ऐसे में सवाल है कि अगर इतनी बड़ी संख्या में छात्र वहां रह रहे थे, तो क्या आग या किसी दूसरी आपात स्थिति में सभी को सुरक्षित बाहर निकालने के पर्याप्त इंतजाम थे

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इलाके में पहले भी बिल्डिंग गिरने की घटनाएं हो चुकीं
अगर इलाके में पहले से ऐसी समस्याएं थीं, तो एमसीडी को पता क्यों नहीं चला? यह सवाल हादसे के बाद सबसे गंभीर सवालों में से एक बन गया है। कई वीडियोज में वहां रहने वाले स्थानीय लोग दावा कर रहे हैं इस इलाके में पहले भी बिल्डिंग गिरने की घटनाएं हो चुकी हैं। स्थानीय लोग इमारतों की हालत को लेकर सवाल उठा रहे थे, तो क्या एमसीडी ने ऐसे इलाकों की इमारतों का व्यवस्थित सुरक्षा सर्वे किया था? अगर निर्माण नियमों का उल्लंघन हो रहा था, तो उसे समय रहते क्यों नहीं रोका गया?

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