अदालत में पेश होगा प्रमाणित विवरण
भोपाल। कानून की गिरफ्त से बचने के लिए लगातार फरार चल रहे अपराधियों पर नकेल कसने के लिए प्रदेश पुलिस ने अपनी रणनीति बदल ली है। अब केवल आरोपियों की धरपकड़ ही नहीं, बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से कमजोर करने के लिए उनकी चल और अचल संपत्ति की पहचान कर उसे जब्त (कुर्की) करने की कार्रवाई को अधिक व्यवस्थित और असरदार बनाया जा रहा है। इसी कड़ी में पुलिस मुख्यालय ने पत्र जारी कर पांच प्रमुख विभागों से हाथ मिलाया है।
पुलिस अब अपराधियों की पाई-पाई की संपत्ति का ब्योरा जुटाने के लिए राजस्व, नगरीय निकाय, बैंक, आयकर और परिवहन विभाग का सहयोग लेगी। इस साझा अभियान का मुख्य उद्देश्य अदालत के समक्ष आरोपी की संपत्ति का पूरी तरह से प्रमाणित विवरण प्रस्तुत करना है, ताकि कुर्की की कानूनी कार्रवाई में कोई बाधा न आए। नए कानून भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत पुलिस अधिकारियों को विभिन्न विभागों के साथ समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं। निर्देश के अनुसार आरोपी के नाम दर्ज जमीन, मकान, कृषि भूमि या किसी भी अचल संपत्ति की जानकारी राजस्व विभाग, उप-पंजीयक कार्यालय, नगर निगम और ग्राम पंचायत सचिव के माध्यम से जुटाई जाएगी। आरोपी के बैंक खातों, जमा राशि और उसके पैन कार्ड से जुड़े शेयर, बॉन्ड, डिबेंचर तथा अन्य वित्तीय निवेशों की पहचान बैंक और वित्तीय संस्थानों से की जाएगी। आरोपी द्वारा दाखिल की गई आईटीआर से उसकी वास्तविक और घोषित आय का ब्योरा लिया जाएगा। अपराधी और उसके व्यवसाय से पंजीकृत वाहनों, लक्जरी गाड़ियों तथा अन्य परिवहन साधनों का विवरण निकाला जाएगा।
अदालत में मजबूत होगा पुलिस का पक्ष
अब तक कई मामलों में अन्य विभागों से समय पर जानकारी न मिल पाने के कारण पुलिस को अदालत में आरोपी की संपत्ति का सटीक ब्योरा पेश करने में कठिनाई होती थी। हालांकि, बीएनएसएस की नई धाराओं के लागू होने के बाद अब इन विभागों के लिए भी पुलिस के साथ प्रमाणित डेटा साझा करना अनिवार्य हो गया है। विभागों से प्राप्त होने वाली यह प्रामाणिक जानकारी पुलिस को अदालत के समक्ष एक मजबूत और त्रुटिहीन रिपोर्ट पेश करने में मदद करेगी। इससे न केवल फरार अपराधियों की संपत्ति की जब्ती प्रक्रिया में तेजी आएगी, बल्कि अपराधियों में कानून का खौफ भी कायम होगा।
भाजपा ने बदला संगठनात्मक प्रभार, बिप्लब कुमार देव बने प्रदेश प्रभारी
रेखा वर्मा को सह प्रभारी की जिम्मेदारी, बृजगोपाल लोया होंगे प्रदेष मीडिया प्रभारी
भोपाल। प्रदेश में भाजपा के प्रदेश प्रभारी के बदलाव को लेकर लंबे समय से चल रही अटकलों पर पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने विराम लगा दिया है। भाजपा ने त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री और मौजूदा राष्ट्रीय महामंत्री बिप्लब कुमार देव को मध्य प्रदेश का प्रदेश प्रभारी नियुक्त किया है। वहीं, उत्तर प्रदेश की नेता और पूर्व सांसद रेखा वर्मा को सह प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पार्टी के नए संगठनात्मक फेरबदल में दोनों नेताओं को मध्य प्रदेश का दायित्व दिया गया है। वहीं प्रदेष भाजपा ने प्रदेष मीडिया प्रभारी पद पर बृजगोपाल लोया की नियुक्ति की है।
अब तक डॉ. महेंद्र सिंह मध्य प्रदेश के प्रदेश प्रभारी की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। संगठनात्मक कार्यक्रमों में उनकी सक्रियता हाल तक बनी हुई थी। हालांकि, उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए पार्टी ने उन्हें उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी सौंपी है। महेंद्र सिंह उत्तर प्रदेश से आते हैं। ऐसे में उनके यूपी में संगठनात्मक रूप से अधिक सक्रिय होने के बीच मध्य प्रदेश में नए प्रभारी की नियुक्ति को लेकर चर्चाएं तेज हो गई थीं।
सह प्रभारी पद पर भी बदलाव
प्रदेश भाजपा के सह प्रभारी रहे सतीश कुमार उपाध्याय दिल्ली से विधायक हैं और उन्हें दिल्ली जल बोर्ड के उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी भी मिली हुई है। उनकी अन्य संगठनात्मक और राजनीतिक व्यस्तताओं के चलते मध्य प्रदेश में सह प्रभारी बदले जाने की चर्चा थी। भाजपा ने अब रेखा वर्मा को यह जिम्मेदारी देकर इन चर्चाओं पर भी विराम लगा दिया है।
बिप्लब ने त्रिपुरा में भाजपा को सत्ता तक पहुंचाने में निभाई भूमिका
बिप्लब कुमार देव त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री हैं। वे वर्ष 2018 से 2022 तक राज्य के मुख्यमंत्री रहे। उनके नेतृत्व में भाजपा ने 2018 के विधानसभा चुनाव में त्रिपुरा में सरकार बनाई थी। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में वे त्रिपुरा पश्चिम लोकसभा सीट से सांसद निर्वाचित हुए। भाजपा की मौजूदा राष्ट्रीय टीम में देव राष्ट्रीय महामंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। मध्य प्रदेश की नई जिम्मेदारी के साथ अब उनकी भूमिका राज्य के संगठनात्मक कामकाज में भी महत्वपूर्ण होगी।
रेखा वर्मा को भी अहम जिम्मेदारी
रेखा वर्मा उत्तर प्रदेश की प्रमुख भाजपा नेताओं में शामिल हैं। वे धौरहरा लोकसभा सीट से दो बार सांसद रह चुकी हैं। भाजपा की नई राष्ट्रीय टीम में उन्हें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है। अब पार्टी ने उन्हें मध्य प्रदेश का सह प्रभारी नियुक्त किया है।
प्रदेष के चार नेताओं को मिली जिम्मेदारी
प्रदेष के चार नेताओं को भी केन्द्रीय नेतृत्व में दूसरे राज्यों में भाजपा के प्रभारी और सहप्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी है। इन नेताओें में पूर्व विधायक अरविंद भदौरिया को आंध्र प्रदेश का प्रभारी बनाया गया है। उनके अलावा गजेन्द्र पटेल को झारखंड का प्रभारी, कविता पाटीदार को राजस्थान का सह प्रभारी और लाल सिंह आर्य को पश्चिम बंगाल का सहप्रभारी बनाया गया है।
आशीष अग्रवाल का भी प्रमोशन
प्रदेष भाजपा के पूर्व मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल, जो अब तक मध्यप्रदेश भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी और राष्ट्रीय सह-मीडिया संयोजक थे, उन्हें अब भाजपा का राष्ट्रीय मीडिया संयोजक बनाया गया है।
ब्रजगोपाल लोया बने प्रदेष मीडिया प्रभारी
भाजपा ने बृजगोपाल लोया को पार्टी का नया प्रदेश मीडिया प्रभारी बनाया है। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने उनकी नियुक्ति की है। यह जिम्मेदारी तत्काल प्रभाव से लागू होगी। लोया अब तक भाजपा संगठन में सक्रिय रहे हैं। प्रदेश मीडिया प्रभारी के तौर पर वह आशीष अग्रवाल की जगह काम करेंगे। आशीष अग्रवाल को 2023 के विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश मीडिया प्रभारी बनाया गया था। अगस्त 2026 में उन्हें भाजपा की राष्ट्रीय मीडिया टीम में सह मीडिया प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई थी। इसके बाद से प्रदेश मीडिया विभाग में नए चेहरे की चर्चा थी।
भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी स्वास्थ्य व्यवस्था, कांग्रेस ने प्रस्तुत किया मौतों का रिपोर्ट कार्ड
भोपाल। कांग्रेस के प्रवक्ता अभय दुबे ने प्रदेश की जर्जर स्वास्थ्य व्यवस्था और लगातार हो रही मौतों को लेकर सत्तारूढ़ भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार की वेदी पर आम नागरिकों और मासूम बच्चों की बलि दी जा रही है।
कांग्रेस प्रवक्ता ने मीडिया से चर्चा करते हुए राज्य में हुई हालिया त्रासदियों के आंकड़े प्रस्तुत करते हुए सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि इंदौर एमवाय अस्पताल हादसा (अगस्त 2025) में नवजात बच्चों की चूहों के कुतरने से दर्दनाक मौत, कफ सिरप कांड में छिंदवाड़ा, पांढुर्णा और बैतूल में जहरीले सिरप से किडनी फेल होने के कारण करीब 25 बच्चों की जान गई। इसके अलावा भागीरथपुरा दूषित पानी कांड (दिसंबर 2025 - जनवरी 2026) में इंदौर में पाइपलाइन लीकेज से दूषित पानी पीने के कारण 36 से अधिक मौतें हुईं। वहीं बालाघाट स्वास्थ्य संकट (जून - अगस्त 2026) जिले में दूषित पानी, डेंगू, मलेरिया और कुपोषण से 30 से अधिक आदिवासी बच्चों की मौत; सर्वे में 7,711 बच्चे अति-कुपोषित पाए गए। सागर जहरीली शराब कांड (सितंबर 2026) में 30 से अधिक लोगों की मौत और 100 से अधिक अस्पताल में भर्ती हुए।
इसके अतिरिक्त, दुबे ने इंदौर पैथोलॉजी में 943 करोड़ रुपये के फर्जी टेस्ट घोटाले और मानव अंगों की अवैध बिक्री से जुड़े किडनी रैकेट का पर्दाफाश किया। उन्होंने कहा कि सरकारी धन से निर्मित 9 मेडिकल कॉलेजों और 18 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को निजी हाथों में सौंपने का फैसला राज्य सरकार की विफलताओं पर पर्दा डालने का प्रयास है।
यूपीआई भुगतान के विरोध में व्यापारियों का ‘नो-यूपीआई डे’
भोपाल। प्रदेशभर में बुधवार को व्यापारियों ने यूपीआई भुगतान पर प्रस्तावित चार्ज के विरोध में ‘नो-यूपीआई डे’ मनाया। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर समेत कई शहरों में व्यापारियों ने 2 हजार रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान स्वीकार नहीं किए। दुकानों पर लगे क्यूआर स्कैनर और साउंड बॉक्स पर काला कपड़ा बांधकर विरोध जताया गया। कुछ स्थानों पर यूपीआई के प्रतीकात्मक पुतले भी लगाए गए।
राजधानी भोपाल के पुराने शहर के थोक किराना, दवा, सराफा, कपड़ा और लोहा बाजार में विरोध का असर दिखाई दिया। व्यापारियों ने क्यूआर स्कैनर और साउंड बॉक्स पर काली पट्टी बांधी। भोपाल चेंबर ऑफ कॉमर्स के पदाधिकारियों ने कहा कि यूपीआई पर प्रस्तावित शुल्क उचित नहीं है और इसे वापस लिया जाना चाहिए। सराफा कारोबारियों ने आशंका जताई कि अतिरिक्त लागत का असर आगे चलकर वस्तुओं की कीमतों पर पड़ सकता है। वहीं इंदौर में टाइल्स एंड सैनिटरी वेयर ट्रेडर्स एसोसिएशन ने रीगल स्क्वायर पर प्रदर्शन किया। इसमें 150 से अधिक व्यापारी शामिल हुए। व्यापारियों ने यूपीआई के प्रस्तावित चार्ज के विरोध में नारेबाजी की।
ग्वालियर में व्यापारियों ने यूपीआई से न तो भुगतान लिया और न ही किया। दुकानों के क्यूआर कोड पर काली पट्टी लगाई गई। व्यापार मंडल के पदाधिकारियों ने कहा कि प्रस्तावित चार्ज से खासकर थोक कारोबारियों की लागत बढ़ सकती है। उनका कहना है कि थोक किराना कारोबार में बड़ी संख्या में लेनदेन 2 हजार रुपये से अधिक के होते हैं। उदाहरण के तौर पर 15 लीटर तेल के एक जार की कीमत करीब 2,200 रुपये तक होती है। ऐसे में ग्राहक यूपीआई से भुगतान करता है तो प्रस्तावित शुल्क का भार व्यापारी पर पड़ सकता है। व्यापारी संगठनों ने 2 हजार रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर प्रस्तावित चार्ज वापस लेने की मांग की है।
आयुर्वेद ने दुनिया में बनाई पहचान, आयुष इंटर्न को जल्द मिलेगा बढ़े स्टाइपेंड का तोहफा
मुख्यमंत्री डॉ. यादव बोले भारतीय जीवनशैली में सदियों से रचा-बसा है आयुर्वेद
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय योग और आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति की दुनिया में फिर प्रतिष्ठा बढ़ी है। भारतीय संस्कृति और जीवनशैली में आयुर्वेद सदियों से समाहित है। हमारी रसोई में इस्तेमाल होने वाले खाद्य पदार्थ और मसाले भी आयुर्वेदिक परंपरा से जुड़े हैं। भारतीय संस्कृति और वेदों के ज्ञान में ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ और ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की भावना निहित है।
मुख्यमंत्री बुधवार को 11वें राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के अवसर पर पंडित खुशीलाल शर्मा शासकीय स्वशासी आयुर्वेद महाविद्यालय में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने आयुष इंटर्न चिकित्सकों के स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग पर कहा कि इस संबंध में आयुष मंत्री इंदर सिंह परमार से चर्चा के बाद समुचित निर्देश दिए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि जल्द ही इंटर्न चिकित्सकों को शुभ समाचार मिलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि आयुर्वेद ऐसी चिकित्सा पद्धति है, जो स्वास्थ्य को केवल बीमारी के उपचार तक सीमित नहीं रखती, बल्कि रोग से बचाव पर भी जोर देती है। आयुर्वेद आहार, विचार और व्यवहार में संतुलन की सीख देता है। बीमारी होने से पहले व्यक्ति को स्वस्थ रखना इसकी प्रमुख अवधारणा है।
184 करोड़ के विकास कार्यों की सौगात
राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को आयुष क्षेत्र से जुड़ी विभिन्न विकास परियोजनाओं की सौगात दी। उन्होंने 184 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित 25 आयुष भवनों, अस्पतालों और महाविद्यालयों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन किया। इसमें 4.70 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित 12 आयुष भवनों का लोकार्पण और 179 करोड़ रुपए की लागत से 13 आयुष भवनों, चिकित्सालयों एवं आयुर्वेद महाविद्यालयों की आधारशिला रखना शामिल है। मुख्यमंत्री ने आयुर्वेद महाविद्यालय परिसर में छह एकड़ क्षेत्र में विकसित स्टेट कंपोजिट हर्बल गार्डन का भी लोकार्पण किया। उन्होंने जनजातीय बहुल डिंडौरी जिले में आयुर्वेद को बढ़ावा देने के लिए 102 करोड़ रुपए की लागत से स्थापित आयुर्वेद महाविद्यालय का शुभारंभ भी किया।
शरीर रूपी मंदिर को स्वस्थ रखना हमारा दायित्व
मुख्यमंत्री ने कहा कि आयुर्वेद विशेषज्ञों के अनुसार किसी क्षेत्र में बीमारी फैलने पर उसकी औषधीय वनस्पतियां आसपास के 25 से 30 किलोमीटर के दायरे में मिल सकती हैं। उन्होंने कहा कि बीमार होने के बाद इलाज तलाशने के बजाय स्वस्थ रहने की जीवनशैली अपनाने पर जोर दिया जाना चाहिए। इसी सोच के साथ वेलनेस की अवधारणा को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि नियमित दिनचर्या, संतुलित खानपान, योग और आयुर्वेद आधारित जीवनशैली अपनाकर स्वस्थ रहा जा सकता है।
प्रदेश में खुलेंगे नौ नए आयुर्वेदिक महाविद्यालय
मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश में पहला आयुर्वेदिक महाविद्यालय भवन वर्ष 1916 में ग्वालियर में बना था। इसके बाद 1972 में जबलपुर, इंदौर और उज्जैन में तीन संस्थान स्थापित हुए। बाद में बुरहानपुर और भोपाल में पंडित खुशीलाल आयुर्वेद महाविद्यालय की स्थापना हुई। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने प्रदेश में नौ नए आयुर्वेदिक महाविद्यालय स्थापित करने की शुरुआत की है। आयुष चिकित्सा पद्धति के विस्तार के लिए वर्ष 2002-03 की तुलना में आयुष विभाग के बजट में 16 गुना वृद्धि की गई है।
पर्यटन स्थलों पर खुलेंगे 12 आयुष हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर
डॉ. यादव ने कहा कि आयुष चिकित्सा पद्धति को पर्यटन से भी जोड़ा जा रहा है। प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर 12 आयुष हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर खोले जा रहे हैं। सरकार पर्यटन के माध्यम से आयुष चिकित्सा और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रही है।