केंद्र सरकार के सभी मंत्रियों का दो दिवसीय ‘चिंतन शिविर’ बुधवार से शुरू हुआ। पहले दिन की बैठक में सरकार के कामकाज को बेहतर बनाने, प्रशासनिक सुधारों, योजनाओं की प्रभावी डिलीवरी और महिलाओं व युवाओं तक कल्याणकारी योजनाओं की पहुंच बढ़ाने समेत कई मुद्दों पर चर्चा हुई। सूत्रों के मुताबिक, चार घंटे से अधिक चली बैठक में अलग-अलग मंत्रालयों और विभागों के बीच बेहतर तालमेल बनाने पर भी जोर दिया गया।
आठ समूहों में बंटे मंत्री
बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्रियों को आठ समूहों में बांटा गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रत्येक समूह के साथ अलग-अलग बातचीत की। बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री ने मंत्रियों से विभिन्न मुद्दों पर फीडबैक लिया और सरकार के कामकाज से जुड़े कई पहलुओं पर उन्हें दिशा-निर्देश दिए। पहले दिन की चर्चा में शासन व्यवस्था, प्रशासनिक सुधार और कल्याणकारी योजनाओं को महिलाओं तथा युवाओं तक प्रभावी तरीके से पहुंचाने के मुद्दे प्रमुख रहे। इसके अलावा सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन और आम लोगों को सरकारी सेवाएं आसानी से उपलब्ध कराने के तरीकों पर भी चर्चा हुई
‘जन विश्वास से जन आधार’ पर भी चर्चा
मंत्रियों ने ‘जन विश्वास से जन आधार’, सरकार के सभी क्षेत्रों में सुधार और ‘विकसित भारत@2047’ के लक्ष्यों को लेकर भी विचार-विमर्श किया। बैठक का उद्देश्य सरकार के अब तक के कामकाज की समीक्षा करने के साथ भविष्य की प्राथमिकताएं तय करना भी है। सूत्रों के अनुसार, चिंतन शिविर में कल्याणकारी योजनाओं और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा, नीतियों को लागू करने में आने वाली दिक्कतों और मंत्रालयों के बीच समन्वय जैसे मुद्दों पर भी ध्यान दिया जा रहा
योजनाओं की डिलीवरी और काम की निगरानी पर जोर
बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि सरकारी योजनाओं का लाभ लोगों तक समय पर और प्रभावी तरीके से पहुंचे। इसके लिए अलग-अलग मंत्रालयों और विभागों के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत पर चर्चा हुई। सरकार के कामकाज में समय प्रबंधन, योजनाओं की प्रगति की निगरानी, नीतियों का प्रभावी क्रियान्वयन और सार्वजनिक सेवाओं की डिलीवरी भी चिंतन शिविर के एजेंडे में शामिल हैं।
विकसित भारत@2047 की दिशा में आगे बढ़ाने की कोशिश
‘विकसित भारत@2047’ को लेकर सरकार की कवायद 2021 से चल रही है। इसके तहत सचिवों के 10 अलग-अलग क्षेत्रीय समूह बनाए गए थे, जिन्हें देश के विकास के लिए अल्पकालिक और दीर्घकालिक योजनाओं का रोडमैप तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई थी। इस प्रक्रिया में अलग-अलग पक्षों और विशेषज्ञों से भी सुझाव लिए गए हैं। अब तक केंद्रीय मंत्रिपरिषद के सामने विकसित भारत से जुड़े अलग-अलग विषयों पर आठ प्रस्तुतियां और चर्चाएं हो चुकी हैं। मौजूदा चिंतन शिविर को इसी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है। इसमें सचिवों के समूहों, मंत्रालयों, विभागों, कैबिनेट सचिवालय और नीति आयोग के काम को एक साथ जोड़कर आगे की रणनीति पर विचार किया जा रहा है।
अगले सप्ताह भी हो सकता है ऐसा आयोजन
सूत्रों के मुताबिक, सरकार के विभिन्न पहलुओं की समीक्षा और आगे की रणनीति पर चर्चा के लिए अगले सप्ताह भी इसी तरह का चिंतन सत्र आयोजित किया जा सकता है। इस तरह का पिछला चिंतन शिविर 21 अक्तूबर 2021 को हुआ था। उस समय मुख्य रूप से शासन व्यवस्था और नीति निर्माण से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई थी। हाल के दिनों में प्रधानमंत्री मंत्रियों और मंत्रालयों को सरकारी कामकाज की निगरानी और लोगों की समस्याओं के समाधान को प्राथमिकता देने के निर्देश देते रहे हैं। मंत्रियों को मंत्रालयों की गतिविधियों के लाइव डैशबोर्ड, काम की नियमित समीक्षा और कर्मचारियों से बातचीत कर सुझाव लेने को कहा गया है। इसी महीने की शुरुआत में प्रधानमंत्री ने मंत्रालयों और विभागों की आधिकारिक वेबसाइटों को भी अधिक यूजर-फ्रेंडली बनाने पर जोर दिया था।